अमेरिका चले पाक सेनाध्यक्ष बाजवा, पटरी पर लौटते रिश्तों के संकेत? प्रेस रिव्यू

बाजवा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अच्छे सैन्य संबंध रहे हैं. लेकिन हाल के महीनों में दोनों के देशों के रिश्तों में तल्ख़ियां बढ़ती हुई दिखी हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान तो सार्वजनिक रूप से उनकी सरकार गिराने में अमेरिकी हाथ का ज़िक्र करते रहे हैं.

भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जयशंकर के दौरे के ठीक बाद अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे हैं. पढ़िए ये रिपोर्ट

बीबीसी हिंदी

अंग्रेज़ी अख़बार द इकॉनमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एक सप्ताह पहले ही भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका का दौरा किया और अब अमेरिका पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की एक सप्ताह तक मेज़बानी कर रहा है. माना जा रहा है कि इस दौरा में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य साझेदारी में दोबारा जान फ़ूंकने की कोशिश होगी.

अख़बार को मिली जानकारी के मुताबिक़ पाकिस्तान सैन्य और आर्थिक सहायता चाहता है, इसलिए बाजवा के अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन, नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक एवरिल डी हैन्स और सीआईए के निदेशक विलियम जे बर्न्स से मिलने की उम्मीद है.

इससे पहले बाजवा और ऑस्टिन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई. इस दौरान दोनों के बीच आपसी हित, क्षेत्रीय स्थिरता, रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मामलों पर चर्चा की गई.

इस दौरे से पहले 18 अगस्त को अमेरिका के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर जनरल माइकल ई कुरिला ने भी जनरल बाजवा से पाकिस्तान आर्मी जनरल हेडक्वार्टर में मुलाकात की थी. बैठक के दौरान आपसी हित, क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और स्थिरता, रक्षा- सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग, ख़ासकर सैन्य संबंधों के मामलों पर चर्चा की गई.

ये भी दिलचस्प हैं कि बाजवा विभिन्न अमेरिकी थिंक टैंकों के सदस्यों और पाकिस्तानी मामलों में रुचि रखने वाले अन्य जानकारों से भी मुलाकात करेंगे.

ऐसी खबरें हैं कि अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने परस्पर सहयोग के लिए अपने मंच को एक बार फिर बहाल किया है और पाकिस्तान फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफ़एटीएफ़ के तहत अमेरिका से समर्थन चाहता है.

बीते सप्ताह भारत ने पाकिस्तानी F16 फाइटर जेट्स के लिए अमेरिका से मिलने वाले समर्थन पर कड़ा विरोध जताया था. लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने काउंटर-टेररिज़म की दलील देते हुए इस कदम का बचाव किया था.

ब्लिंकन ने कहा था कि पाकिस्तान को वास्तविक आतंकी ख़तरों का सामना करना पड़ा है और पैकेज इसके खिलाफ़ लड़ने में पाकिस्तानी क्षमताओं में इज़ाफ़ा करेगा.

अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान विदेशमंत्री जयशंकर ने कहा था कि पाकिस्तान को की जाने वाली इस आपूर्ति से किसी को वेबकूफ़ नहीं बनाया जा सकता.

बाजवा ने अमेरिका यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सैन्य सलाहकार जनरल बिरामे डियोप से मुलाकात की. दोनों के बीच आपसी हित के मामले और पाकिस्तान में बाढ़ के कारण उपजी प्राकृतिक आपदाओं सहित क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई.

आखिरी बार बाजवा ने साल 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के साथ अमेरिका का दौरा किया था. पाकिस्तानी अधिकारी जनरल बाजवा और अमेरिका के विदेश मंत्री ब्लिंकन के बीच मुलाकात की भी कोशिश कर रहे हैं.

टीवी चैनल

इमेज स्रोत, Getty Images

टीवी, वेबसाइट और ओटीटी पर बंद हों सट्टेबाज़ी के विज्ञापन

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट्स, ओटीटी प्लेटफार्म और निजी टीवी चैनलों को ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफार्म्स या उन्हें प्रमोट करने वाले किसी भी तरह के सरोगेट उत्पाद के विज्ञापनों को प्रकाशित या प्रसारित ना करने की सलाह दी.

इसका उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है, मंत्रालय ने कहा कि 13 जून, 2022 को एडवाइज़री जारी करने के बावजूद, कुछ ऑनलाइन ऑफ़-शोर सट्टेबाजी प्लेटफार्म्स ने टीवी चैनलों पर विज्ञापन देने के लिए न्यूज़ वेबसाइटों को सरोगेट उत्पादों के रूप में इस्तेमाल किया.

सरकार ने कहा है भारत के अधिकांश हिस्सों में सट्टेबाजी और जुआं अवैध हैं और इसलिए सट्टेबाजी प्लेटफार्म्स के विज्ञापन टीवी चैनलों पर नहीं दिखाए जा सकते.

चारा संकट

इमेज स्रोत, Getty Images

बढ़ते चारा संकट पर केंद्र सरकार के वादे की हक़ीकत

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने देश के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते चारा संकट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में होने वाले चारे की कमी से उपजे संकट से केंद्र सरकार कम से कम दो साल पहले ही परिचित थी और इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से एक ख़ाका तैयार किया गया था लेकिन सरकार की इन तैयारियों की ज़मीनी हक़ीकत कुछ और है.

अभी भी किसानों के परिवारों पर संकट का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से चारे के लिए लगभग 100 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित करना शामिल था, लेकिन अभी तक ऐसा एक भी एफपीओ पंजीकृत नहीं किया गया है.

ख़ास कर चारे के लिए 100 एफपीओ स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने सितंबर 2020 में तैयार किया गया था. मई 2019 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सत्ता में लौटने के तुरंत बाद बजट 2019-20 में घोषित 10,000 एफपीओ बनाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का ये एक हिस्सा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में औपचारिक रूप से इस योजना का शुभारंभ भी किया था.

लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस साल 16 अगस्त तक, 13 एजेंसियों को 8,416 एफपीओ आवंटित किए गए, जिनमें से 3,287 एफपीओ रजिस्टर हुए.

इसके अलावा, एनडीडीबी को आवंटित 26 एफपीओ में से केवल एक को 16 अगस्त, 2022 तक पंजीकृत किया गया है. मंत्रालय के सूत्रों ने अख़बार से कहा कि एनडीडीबी के तहत यह एफपीओ भी शहद के लिए है, चारे के लिए नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)