शशि थरूर बनाम अशोक गहलोत: कांग्रेस अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों के बारे में जानिए

शशि थरूर और अशोक गहलोत

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कांग्रेस पार्टी 17 अक्टूबर को अपना अध्यक्ष चुनेगी और इस बार पार्टी की बागडोर किसी ग़ैर-गांधी नेता के हाथों में होगी या गांधी परिवार ही पार्टी का नेतृत्व करेगा इसे लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ कांग्रेस सांसद शशि थरूर पार्टी अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश कर सकते हैं. ख़बरों की मानें तो सोमवार को शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया है कि वह अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं. इसके जवाब में सोनिया गांधी ने सहमति देते हुए कहा है कि वह चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्ष रहेंगी.

इसके बाद रिपोर्ट सामने आई कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शशि थरूर को इस चुनाव में चुनौती दे सकते हैं.

हालांकि माना जा रहा है कि अशोक गहलोत तभी ये चुनाव लड़ेगे जब राहुल गांधी इस चुनाव में उम्मीदवारी ना पेश करें. अगर राहुल गांधी अध्यक्ष ना बनने के अपने पुराने फ़ैसले पर अड़े रहे तो इस सूरत में अशोक गहलोत के अध्यक्ष पद की दावेदारी पेश करने की ख़बरें हैं.

हालांकि दोनों नेताओं या पार्टी की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इन दोनों नेताओं के नाम सामने आने से कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया है.

20 साल में पहली बार पार्टी में अध्यक्ष पद के लिए इस तरह चुनाव होने वाले हैं जहां ग़ैर-गांधी नेताओं की दावेदारी की बात की जा रही है.

आइए जानते हैं इन दोनों नेताओं के सियासी सफ़र के बारे में:-

शशि थरूर

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शशि थरूर:संयुक्त राष्ट्र से संसद तक का सफ़र

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  • शशि थरूर कांग्रेस के जी-23 समूह का हिस्सा रहे हैं. जी-23 नेताओं का वो समूह है जिसने सोनिया गांधी से पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और एक नए अप्रोच की गुज़ारिश की थी.
  • शशि थरूर ने दिल्ली के सेंट स्टीफ़ेन्स कॉलेज से पढ़ाई की और उन्होंने अमेरिका के फ़्लेचर स्कूल ऑफ़ लॉ एंड डिप्लोमेसी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की.
  • थरूर ने साल 1978 से लेकर 2007 तक संयुक्त राष्ट्र में काम किया. साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद पर दक्षिण कोरिया के बान की मून को नियुक्त किया गया, इस पद के दावेदारों में शशि थरूर दूसरे स्थान पर रहे.
  • इसके बाद ही 2007 में उन्होंने यून से अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी.
  • साल 2009 में शशि थरूर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और इसी साल केरल के तिरूवनंतपुरम से लोकसभा चुनाव जीता.
  • यूपीए-1 सरकार में साल 2009-10 तक थरूर ने बतौर विदेश राज्य मंत्री काम किया.
  • साल 2012-14 के बीच शशि थरूर मानव संसाधन विकास मंत्री रहे.
  • वह भारतीय इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, राजनीति, समाज, विदेश नीति पर 23 किताबें लिख चुके हैं.
  • हाल ही में शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि- "उम्मीद करता हूं ज़्यादा से ज़्यादा लोग आगे आएंगे और अपनी उम्मीदवारी पेश करेंगे. पार्टी और देश के लिए अपना विज़न सामने लाने से जनता के भीतर भी रुचि पैदा होगी."
  • शशि थरूर अपनी अच्छी अंग्रेज़ी के कारण चर्चा में रहते हैं. अक्सर ट्विटर पर उनके द्वारा किए गए नए अंग्रेज़ी शब्दों का इस्तेमाल उनके सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने का एक अहम कारण है.
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अशोक गहलोत

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अशोक गहलोत: गांधी परिवार से क़रीब

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  • अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं और बतौर मुख्यमंत्री ये उनका तीसरा कार्यकाल है.
  • अशोक गहलोत 1968 से 1972 के बीच गाँधी सेवा प्रतिष्ठान के साथ सेवा ग्राम में काम करते रहे.
  • साल1973 में वो कांग्रेस के नए गठित हुए राष्ट्रीय छात्र संगठन से जुड़े. उस वक़्त गहलोत अर्थशास्त्र में एम.ए. के विद्यार्थी थे.
  • गहलोत ने अर्थशास्त्र में एम.ए. के बाद क़ानून की पढ़ाई की और फिर राजनीति में बढ़ते चले गए.
  • पार्टी ने उन्हें 1974 में छात्र संगठन की राजस्थान इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया.
  • गहलोत ने 1977 में जब पहली बार कांग्रेस के टिकट पर जोधपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ा तो साढ़े चार हज़ार वोटों से हार गए.
  • गहलोत पहली बार 1980 में जोधपुर से सांसद चुने गए. गहलोत ने पांच बार संसद में जोधपुर का प्रतिनिधित्व किया है.
  • 1982 में पहली बार इंदिरा गाँधी मंत्रिमंडल में उन्हें उप-मंत्री बनाया गया.
  • 1991 में जब उन्हें कपड़ा मंत्री बनाया गया तो उनके कामकाज की सराहना सराहना की गई.
  • गुजरात में बीते विधानसभा चुनाव में गहलोत को वहां प्रभारी बनाकर भेजा गया था.
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आख़िरी बार सीताराम केसरी के रूप में एक ग़ैर-गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे जिनसे सोनिया गांधी ने मार्च 1998 में पार्टी की कमान अपने हाथों में ली थी. ये वो समय था जब कांग्रेस बुरे दौर से गुज़र रही थी. पति राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने राजनीति से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन 1998 में उन्होंने पार्टी का कामकाज संभाला और साल 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलवाई थी.

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(कॉपी- कीर्ति दुबे)

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