सीमा पात्रा: नौकरानी पर ज़ुल्म करने वाली बीजेपी नेता की कहानी कैसे सामने आई

    • Author, आनंद दत्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए रांची से

आदिवासी युवती सुनीता खाखा प्रताड़ना केस में बीजेपी की नेता सीमा पात्रा को गिरफ़्तार कर लिया गया है. रांची पुलिस ने बुधवार को उन्हें उनके अशोक नगर स्थित घर से गिरफ़्तार किया.

सीमा पात्रा को पुलिस ने बुधवार दोपहर बाद रांची कोर्ट में पेश किया. इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के दौरान सीमा पात्रा ने कहा कि वो बेकसूर हैं.

सीमा के ऊपर एससी-एसटी प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रॉसिटीज एक्ट के तहत केस दर्ज हुए हैं.

उन पर आईपीसी की धारा 323 (जानबूझ कर मारना), 325 (जानबूझ कर गंभीर चोट देना), 346 (ग़लत तरीक़े से बंधक बनाना), 374 (जबरन मज़दूरी कराना) लगाई गई है.

इस मामले में हमने सीमा पात्रा के पति, बेटे और बेटी से बात करने की कोशिश की. सिर्फ़ उनकी बेटी ने फोन उठाया लेकिन जैसे ही हमने परिचय दिया उन्होंने रॉन्ग नंबर कह कर फोन काट दिया.

सीमा पात्रा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी महेश्वर पात्रा की पत्नी हैं. उनके घर से बीते 22 अगस्त को एक आदिवासी युवती को रांची ज़िला प्रशासन की ओर से रेस्क्यू किया गया था.

इस बारे में रांची के ही विवेक आनंद बास्के ने शिकायत की थी.

विवेक आनंद बास्के सीमा पात्रा के बेटे आयुष्मान पात्रा के दोस्त हैं.

कैसे सामने आया ये मामला?

आयुष्मान ने फ़ोन पर अपनी मां की करतूतों के बारे में पूरी जानकारी विवेक को दी थी. विवेक इस वक़्त झारखंड सरकार में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं.

विवेक आनंद बास्के ने शिकायत में बताया था, '' सुनीता खाखा को बीते आठ सालों से प्रताड़ित किया जा रहा है. वह मरने के कगार पर हैं. लोहे के रॉड से मारकर उनके दांत तोड़ दिए गए हैं.''

विवेक आनंद बास्के ने बीबीसी को पूरी घटना विस्तार से बताई. उन्होंने कहा, "सीमा पात्रा के बेटे आयुष्मान पात्रा मेरे दोस्त हैं. हमने साथ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. कुछ दिन पहले उनका फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि उनके घर में जो आदिवासी लड़की नौकरानी है, उसे बचा लो. मेरी मां उसे मार देंगी."

वो कहते हैं,''आयुष्मान के फ़ोन के कुछ देर बाद ही सीमा पात्रा का भी फ़ोन आया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनका बेटा मानसिक रोगी हो चुका है. घर में बहुत हिंसा करता है. उसे मानसिक अस्पताल में एडमिट कराना होगा.''

''मैंने आयुष्मान की बात पर यकीन नहीं किया. बल्कि उनकी मां सीमा पात्रा के कहने पर उन्हें (आयुष्मान को) रांची के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री (सीआईपी) यानी केंद्रीय मनचिकित्सा संस्थान में एडमिट कराने ले गया.''

एडमिट होने के दौरान ही आयुष्मान अपनी मां पर जोर से चिल्लाने लगा और कहने लगा "आप कितनी निर्दयी महिला हैं. आपने सुनीता को विकलांग बना दिया. वो जब चल नहीं पाती थी और कपड़े में ही पेशाब कर देती थी, तब आप उसके मुंह से उसे साफ़ करवाती थीं."

विवेक कहते हैं, "इतना सुनते ही मैं चौंक गया. बाद में मैंने सीमा पात्रा के घर के अन्य कर्मचारियों से इसके बारे में जानकारी जुटाई. जो जानकारी सामने आई, वो दिल दहला देनेवाली थी."

दर्ज एफ़आईआर में विवेक ने दावा किया कि कई बार सुनीता खाखा को गर्म तवे से दागा गया है. उसके दांत तोड़ दिए गए हैं. कई दिनों तक उसे एक कमरे में ही बंद करके रखा जाता था. इस दौरान वह कपड़े में ही मल-मूत्र त्याग कर देती थी, जिसे देखते ही सीमा पात्रा उसपर चिल्लाने लगती थीं और उसके मुंह से पेशाब साफ़ करवाती थीं. नौकरों ने ये बताया कि बीते तीन सालों से सुनीता ने सूरज की रोशनी नहीं देखी है.

वो कहते हैं, ''अब मुझे अपने दोस्त की बात पर यकीन होने लगा. मैंने तत्काल इसकी जानकारी रांची के ज़िलाधिकारी राहुल सिंह को दी. उन्होंने तत्काल एसएसपी से बात कर एक टीम गठित की और 22 अगस्त को सुनीता को सीमा पात्रा के घर से रेसक्यू किया गया. इसके बाद उसे रिम्स में एडमिट कर दिया गया.

रिम्स के डॉ. शीतल मलुआ ने बीबीसी को बताया कि सुनीता की हालत स्थिर है. वह बहुत कमज़ोर है. फिलहाल उसे दवाई दी जा रही है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा.

डॉ. मलुआ ने यह भी बताया कि सालों की प्रताड़ना का सुनीता के दिमाग पर असर पड़ा है. इस असर को कम करने में समय लगेगा.

दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक सुनीता सीमा पात्रा की बेटी वत्सला के दिल्ली रहने के दौरान उनके घर में भी काम करती थीं. यहां भी उनके साथ ऐसा ही सलूक किया जाता था. वत्सला इस वक़्त नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन के रामगढ़ स्थित केंद्र में काम कर रही हैं.

दोनों मां बेटी का अत्याचार यहीं नहीं ख़त्म हुआ. दोनों जब भी घर से बाहर निकलती थीं तो उसके (सुनीता के) कमरे में ताला लगा कर जाती थीं. अगर वो दो दिन घर नहीं लौटती थीं तो सुनीता पूरे समय भूखे-प्यासे ही कमरे में बंद रहती थी.

जब सुनीता की हालत बहुत अधिक ख़राब हो गई तो सीमा पात्रा उसे किसी आश्रम में छोड़ने का प्लान बना रही थीं.

कौन हैं सीमा पात्रा

जमशेदपुर में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार बताते हैं, "सीमा पात्रा फ़िल्म अभिनेत्री बनना चाहती थीं. मैं उस वक़्त 'समकालीन तापमान' नामक पत्रिका में काम करता था. यह पत्रिका पटना से प्रकाशित होती है. उस वक्त सीमा पात्रा को 'ड्रीम गर्ल ऑफ़ बिहार भी कहा जाता था."

1998 में सीमा पात्रा की प्रोफ़ाइल उस मैगज़ीन में छपी थी. जिसकी हेडलाइन थी- कहां हैं पिंकी पात्रा. सीमा के घर का नाम पिंकी है. ये वो दौर था जब चारा घोटाले से संबंधित हर दिन नई जानकारी सामने आ रही थी.

वो बताते हैं, "सीबीआई जांच में बात भी सामने आई थी कि आरके राणा जो कि आरजेडी के नेता थे, वे सीमा पात्रा को मुंबई घुमाने ले गए थे. दावा किया गया कि उस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. इन सब ख़बरों के बीच सीमा पात्रा अचानक गायब हो गई थीं. तभी हमने इस हेडलाइन के साथ ख़बर छापी थी.

वहीं छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल कहते हैं, "उन दिनों मैं पटना से निकलने वाले अख़बार जनशक्ति में काम करता था. 1991 में मैं पलामू में चुनाव कवर करने पहुंचा था. हमने पहली बार रंगीन पोस्टर, बैनर देखे थे. ये सारे सीमा पात्रा के थे. वो चंद्रशेखर की पार्टी जनता दल से लोकसभा चुनाव लड़ रही थीं. हालांकि इस चुनाव में उनकी ज़मानत तक ज़ब्त हो गई थी."

सीमा पात्रा आरजेडी में रहीं, इसके बाद कांग्रेस जॉइन किया. पांच साल पहले वह बीजेपी में आई और यहां राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महिला मोर्चा की सदस्य थीं.

क्या सीमा हमेशा से ऐसी ही थीं?

इस सवाल का जवाब रांची में रहनेवाले बाल अधिकार कार्यकर्ता वैद्यनाथ कुमार देते हैं.

बीबीसी हिन्दी से उन्होंने कहा, "बतौर बाल मज़दूर पहली बार मैंने सीमा पात्रा के घर ही काम किया. उस वक़्त यानी साल 1994-95 में उनके पति श्रीकृष्ण लोकसेवा प्रशिक्षण संस्थान, रांची में डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात थे."

"सीमा पात्रा की आदत थी 11 बजे के बाद उठने की. मुझे पता नहीं चलता था कि कब उठीं, वो सीधे गाली देते हुए किचन में घुसती थीं और मेरे बाल पकड़ कर कहती थीं अभी तक तुमने चाय क्यों नहीं बनाई."

वो कहते हैं, "उनके पति बहुत ही सादगी पसंद और जीनियस किस्म के इंसान थे. वे हमारे साथ ज़मीन पर बैठकर मांड़-भात खा लिया करते थे. सीमा पात्रा जब भी उन्हें ऐसा करते देखती थीं, अपने पति को बहुत गाली देती थीं."

इस बात की तस्दीक विवेक आनंद बास्के भी करते हैं. वो कहते हैं, "जब मैंने पुलिस में इस मामले की शिकायत की तो सीमा के पति और बेटी मेरे घर आए. पति ने कहा कि आंटी को बचा लो. लेकिन ऐसा करने से मैंने मना कर दिया. तब जाते वक़्त उन्होंने कहा कि टेक केयर ऑफ़ सुनीता."

बीजेपी ने सीमा को निलंबित किया

इस बीच सीमा पात्रा के बीजेपी से संबंध सामने आने के तुरंत बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया.

हालांकि पार्टी ने उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया.

बीजेपी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव कहते हैं, "ये बहुत ही जघन्य अपराध है. इसकी कोई माफ़ी नहीं है. साथ ही ऐसी विकृत मानसिकता वालों के लिए बीजेपी के अंदर कोई जगह नहीं है. पार्टी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है. एक जांच कमेटी भी बैठाई गई है. उसकी रिपोर्ट आने के बाद बहुत संभावना है कि उन्हें पार्टी से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा."

बीजेपी में उनकी स्थिति के बारे में उन्होंने बताया कि निलंबित होने से पहले राष्ट्रीय महिला परिषद की सदस्य थीं. साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पहल की झारखंड प्रदेश की संयोजिका भी थीं.

पहला मामला नहीं

झारखंड की आदिवासी लड़कियों की तस्करी सालों से जारी है.

बंदना धीर नाम की एक कॉरपोरेट लाइजनिंग ऑफ़िसर के घर भी साल 2014-15 में साहेबगंज की आदिवासी लड़की को छुड़ाया गया था.

बाल अधिकार कार्यकर्ता वैद्यनाथ कुमार के मुताबिक उस लड़की को वंदना अपने पालतू कुत्ते के कटवाती थीं. जिस वक़्त हमने उसे वहां से निकाला, उसके पूरे शरीर में कीड़े लगे हुए थे.

वैद्यनाथ कुमार एक और घटना का ज़िक्र करते हैं. उन्होंने साल 2012 में लातेहार की एक लड़की को दिल्ली से छुड़ाया था. वे रांची के ही लालपुर में रहनेवाली भट्टाचार्य की बेटी के दिल्ली स्थित घर में काम करने के लिए ले जाई गई थीं.

उस परिवार में एक छोटी बच्ची थी, जिसकी देखभाल वो करती थीं. एक दिन बच्ची उसके हाथ से गिर गई. इसके बाद मालकिन ने उसके हाथ पर कई बार चाकू से वार किया था.

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