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हाई कोर्ट जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला जज होंगी बहाल, सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- Author, सुचित्र मोहंती
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में मध्य प्रदेश के एक हाई कोर्ट जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश (एडीजे) को अपने पद पर बहाल करने का आदेश दिया है. महिला एडीजे का आरोप लगाने के बाद तबादला कर दिया गया था जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की दो सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को ये आदेश जारी किया.
पूर्व एडीजे ने साल 2014 में आरोप लगाया था कि अब सेवानिवृत्त हो चुके जस्टिस एस के गंगेले ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के रजिस्ट्रार के ज़रिए उनके पास एक संदेश भिजवाया था कि वो उनके आवास पर 'एक आइटम सॉन्ग पर डांस' करें. जस्टिस गंगेले तब उनके सुपरवाइज़र जज थे.
ये आरोप लगाने के बाद महिला जज का तबादला ग्वालियर से सीधी कर दिया गया. इसके बाद 15 जुलाई 2014 को उन्होंने अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
अपील
जनवरी 2018 में राज्यसभा ने एक समिति गठित की जिसने महिला के यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को ख़ारिज कर दिया. समिति ने इस बात का प्रमाण पाया कि 'प्रतिवादी जज ने शिकायतकर्ता के तबादले के मामले में हस्तक्षेप किया और उन्हें अपना पक्ष रखने से रोका'.
हालांकि, समिति ने शिकायतकर्ता महिला को दोबारा जज के रूप में बहाल करने की सिफ़ारिश की. पर ये बाध्यकारी नहीं थी.
इसके बाद 2018 की जुलाई में महिला ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दायर कर अपनी बहाली की अपील की जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनके पक्ष में आदेश जारी कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि ग्वालियर के एडीजे पद से याचिकाकर्ता के इस्तीफ़े को स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता है और 17 जुलाई 2014 को उनका इस्तीफ़ा स्वीकार करने वाले आदेश को रद्द किया जाता है.
'ऐतिहासिक फ़ैसला'
महिला न्यायाधीश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रही वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने सुनवाई के बाद बीबीसी से कहा, "आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट से उन्हें न्याय मिला. मैं आज बहुत ख़ुश हूं. अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने आज उनके साथ न्याय किया."
जयसिंह ने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला हमेशा याद रखा जाएगा और "ये एक ऐतिहासिक निर्णय है".
उन्होंने कहा, "उनके साथ जो भी अन्याय किया गया, उसे आज सुधार लिया गया."
उन्होंने ये भी स्पष्ट कर दिया कि केस महिला जज के अवैध तबादले से जुड़ा था और वह ख़ुश हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बहाल कर दिया है.
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