बाबा रामदेव: विवादों से नाता, पर फल-फूल रहा है पतंजलि का कारोबार

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को योग गुरु रामदेव के ख़िलाफ़ सख़्त टिप्पणी की. मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने इंडियन मेडिकल एसोसिशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि रामदेव को दूसरी आधुनिक दवाओं और इलाज प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए. रामदेव इस चिकित्सा प्रणाली को ख़ारिज नहीं कर सकते.
पिछले हफ़्ते दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बाबा रामदेव को आयुर्वेद के बारे में भ्रामक दावे करने से परहेज़ करने को कहा था.
आधुनिक मेडिसिन को लेकर बाबा रामदेव विवादित बयान देते रहे हैं. पिछले साल मई महीने में रामदेव ने दावा किया था कि एलोपैथी एक "बेवक़ूफ़ विज्ञान" है और रेमडेसिविर, फेविफ्लू जैसी दवाएं और भारत के औषधि महानियंत्रक (ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) द्वारा अनुमोदित अन्य दवाएं कोविड -19 रोगियों के इलाज में विफल रही हैं. एक वीडियो में रामदेव ने यह भी दावा किया था कि लाखों मरीज़ों की मौत एलोपैथिक दवाओं के कारण हुई हैं न कि ऑक्सीजन की कमी से.
पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक ने आईएमए को एक खुला पत्र भी लिखा था और उनसे एलोपैथी से संबंधित 25 प्रश्न पूछे थे. उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर साझा किए गए एक पत्र में लिखा, "अगर एलोपैथी सभी शक्तिशाली और 'सर्वगुण संपन्न' (सभी अच्छे गुणों से युक्त) है, तो डॉक्टरों को बीमार नहीं पड़ना चाहिए."

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रामदेव की भूल और माफ़ी
बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने रामदेव को पत्र लिखकर अपना बयान वापस लेने को कहा. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी.
नतीजतन रामदेव ने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी कर खेद प्रकट किया औऱ कहा कि वो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और एलोपैथी के विरोधी नहीं हैं.
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कोविड मामलों में वृद्धि के बीच, पतंजलि ने हरिद्वार स्थित दिव्य प्रकाशन पतंजलि अनुसंधान संस्थान में विकसित 'कोरोनिल' टैबलेट लॉन्च किया था.
दावा किया गया था कि यह सात दिनों में कोविड -19 को ठीक करता है. कोरोनिल के लॉन्च कार्यक्रम में ख़ुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन रामदेव का साथ मंच साझा करते नज़र आए थे. IMA ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

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पतंजलि आयुर्वेद ने उस समय ये दावा किया था कि टैबलेट को आयुष मंत्रालय से डब्ल्यूएचओ की प्रमाणन योजना के अनुसार कोविड के उपचार का समर्थन करने वाली दवा के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है.
बाद में ये सफ़ाई आई कि प्रमाणन केंद्र द्वारा दिया गया था और WHO "किसी भी दवा को स्वीकृत या अस्वीकृत नहीं करता है".
एक दूसरे वायरल वीडियो में बाबा रामदेव ने दावा किया था कि भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन की दोनों खुराक मिलने के बाद भी 10,000 से अधिक डॉक्टरों की मौत हो गई है. वीडियो में वायरस के ख़िलाफ़ अपने फेफड़ों को मज़बूत करने में योगाभ्यास के फ़ायदों के बारे में सलाह देते भी नजर आए थे. वह "बिना किसी डिग्री के लेकिन दिव्यता और गरिमा के साथ" डॉक्टर होने का भी दावा करते हैं.

विवादों में रामदेव

बाबा रामदेव शुरू से विवादों में रहे हैं.
- 2006 में, सीपीएम नेता वृंदा करात ने रामदेव पर अपनी दवाओं में इंसानों और जानवरों की हड्डियों को मिलाने का आरोप लगाया था. मीडिया में विवाद बढ़ा लेकिन पतंजलि ने आरोपों से इनकार किया. लगभग एक दशक बाद, पश्चिम बंगाल की एक लेबोरेटरी में गुणवत्ता परीक्षण में विफल होने के बाद सेना ने अपने कैंटीन से पतंजलि आंवला का रस वापस ले लिया.
- 2012 में विदेशों में जमा काले धन के ख़िलाफ़ अभियान की शुरुआत करते हुए रामदेव ने उत्तराखंड में सत्ता में आई कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था. कांग्रेस ने योग गुरु के ख़िलाफ़ कथित टैक्स चोरी, ज़मीन हड़पने और कथित भ्रष्टाचार के केसेज़ में 81 मामले दर्ज करके जवाबी कार्रवाई की और उनके कई केंद्रों पर छापेमारी करने के लिए पुलिस भेजी.

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- 2018 में, बाबा रामदेव के एक समय क़रीबी साथी रहे कर्मवीर ने पतंजलि घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाया. उन्होंने एक ऑनलाइन पोर्टल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर कोई देसी गाय से शुद्ध देसी घी बनाता है, तो उसकी क़ीमत लगभग 1,200 रुपये होगी. जबकि पतंजलि का घी आज क़रीब 600 रुपए किलो बिक रहा है.
इस तरह के आरोपों के बावजूद, पतंजलि लगातार फल-फूल रहा है.
रामदेव ने 2019 में कहा था कि वो एक फ़क़ीर हैं और वो देश के लिए काम करते हैं. उनका कहना था कि वो देश को मज़बूत करने का प्रयास कर रहे हैं और पतंजलि के फ़ायदे देश के लिए हैं.
उन्होंने कहा था कि आज पतंजलि 8,000 करोड़ रुपये की कंपनी बन गई है. तीन साल बाद अब पतंजलि 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की कंपनी हो गयी है.
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