लखनऊ में एक अपहरण की फ़िरौती में बिटकॉइन देने का क्या है मामला

- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पीजीआई इलाक़े से एक व्यापारी को चार लोगों ने अग़वा किया. किडनैपर्स ने फ़िरौती में व्यापारी से एक करोड़ से ज़्यादा के बिटकॉइन लिए और उन्हें मारपीट कर सड़क किनारे फेंक दिया.
बीबीसी से बात करते हुए व्यापारी ने अपनी आपबीती बताई और कहा, "तीन घंटे मेरे हाथ-पांव बांधकर उन्होंने मुझे लगातार लाठियों से मारा था. मुंह में पिस्टल और डंडे घुसेड़ दिए थे."
व्यापारी के अनुसार वो बुरी तरह से ज़ख़्मी हैं. वो कहते हैं, "पूरा मुंह फटा हुआ है. तीन दिन तक कुछ खा नहीं पाया था. तीन दिन पानी ही पीता रहा, उसके बाद ही खाना शुरू कर पाया. दोनों हाथों में फ्रैक्चर हैं. एक हाथ में मल्टीपल फ्रैक्चर है."
"डॉक्टर को तुरंत ऑपरेशन करना चाहिए था पर डॉक्टर ने तुरंत ऑपरेशन न करके कुछ दिन टाल दिया. अब दूसरे डॉक्टर कह रहे हैं कि ऑपरेशन नहीं हो पाएगा. डॉक्टरों का कहना ह कि अब दाहिना हाथ ज़्यादा से ज़्यादा 80 प्रतिशत ही ठीक हो पाएगा."
व्यापारी ने बीबीसी को आगे बताया कि "वो ऊपर से नीचे तक ख़ून में लथपथ थे और उन्हें लखनऊ की कुर्सी रोड पर अपहरणकर्ताओं ने फेंक दिया था."
व्यापारी के मुताबिक एक टेंपो वाले ने उनकी मदद की. टेंपो वाले ने उनको इंजीनियरिंग कॉलेज तक छोड़ा और फिर इंजीनियरिंग कॉलेज से दूसरा ऑटो करके वह अपने घर पहुंचे.
पुलिस ने किया पर्दाफ़ाश
पुलिस के अनुसार सात अगस्त की शाम को व्यापारी को अग़वा किया गया था. पुलिस ने 16 अगस्त को मामले में तीन अभियुक्तों संदीप प्रताप सिंह, रणवीर सिंह, और विजय प्रताप सिंह को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस ने मीडिया को जानकारी दी कि किडनैपर्स ने कारोबारी के बिटकॉइन वॉलेट से अपने बिटकॉइन अकाउंट में फ़िरौती के पैसे ट्रांसफ़र कराए. ये रक़म एक करोड़ तीन लाख रुपये थी.

पुलिस के मुताबिक़ गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों के पास से एक पिस्तौल, कारतूस, एक कार और 30 हज़ार रुपये की नक़दी बरामद हुई है. पुलिस को फ़िरौती के बिटकॉइन ट्रांज़ेक्शन की जानकारी भी मिली है.
लखनऊ पूर्व की डीसीपी प्राची सिंह ने बयान जारी कर कहा, "सात से आठ अगस्त की रात के बीच में थाना पीजीआई के अन्तर्गत यह वारदात हुई. सुबह व्यापारी की पत्नी ने थाने में तहरीर दी और उस तहरीर के आधार पर मुक़दमा दर्ज हुआ जिसमें धारा 364 ए(फ़िरौती के लिए अपहरण करना), 392 (लूटपाट), 411(संपत्ति चोरी), 323 (किसी को चोट पहुंचाना), 347 (जबरन वसूली), 386 (जान का ख़तरा ), 506 (धमकी देना) और 3/25 शस्त्र अधिनियम में मुक़दमा लिखा गया था."
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16 अगस्त को पकड़े गए अभियुक्त
डीसीपी प्राची सिंह ने यह भी बताया कि "16 अगस्त 2022 को तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. इन अभियुक्तों ने व्यापारी को बंधक बनाकर उनको सीतापुर के फार्म हाउस में रखा."
उन्होंने बताया, "फार्म हाउस पर ही व्यापारी के बिटकॉइन वॉलेट से अपने बिटकॉइन अकाउंट में पैसे ट्रांसफ़र किए और जो बिटकॉइन का अमाउंट था, उसकी वैल्यू एक करोड़ तीन लाख के लगभग है. अभी तक पुलिस टीम ने 90 लाख के लगभग अमाउंट वापस कर दिया है."

इमेज स्रोत, Reuters
पुलिस के मुताबिक़ सीतापुर के फ़ार्म हाउस के मालिक वीरू भी वांछित हैं. पुलिस कह रही है कि उन्हें पकड़ने के लिए टीमें लगाई गई हैं और दावा कर रही है कि जल्द ही उनकी गिरफ़्तारी भी कर ली जाएगी.
व्यापारी को जानता था एक अभियुक्त: पुलिस
डीसीपी लखनऊ पूर्व प्राची सिंह ने ये भी बताया कि "मास्टर माइंड राजवीर व्यापारी को पहले से जानता था और उसे व्यापारी के बिटकॉइन वॉलेट की पूरी जानकारी भी थी. उसे मालूम था कि वो बिटकॉइन में इतना पैसा लगाते रहे हैं."
पुलिस के मुताबिक़ अभियुक्तों ने पुलिस से बचने के लिए कार में उच्च न्यायालय का बोर्ड लगा रखा था. तीनों अभियुक्तों को मुख़बिर की सूचना पर पकड़ा गया था.
पुलिस की कार्रवाई के बारे में व्यापारी ने बीबीसी से कहा, "मैं बहुत ज़्यादा तकलीफ़ में हूँ. दोनों हाथों में मल्टीपल फ्रैक्चर है. मैं इस समय मानसिक रूप से बहुत ज़्यादा परेशान चल रहा हूं. पुलिस ने अच्छे से सपोर्ट किया मैं इससे ज़्यादा और कुछ नहीं कहना चाहता हूं."
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