जापान की डिजिटल एक्सचेंज कॉइनचेक से करोड़ों डॉलर की डिजिटल करेंसी चोरी

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जापान की डिजिटल करेंसी एक्सचेंज कॉइनचेक का कहना है कि उसने एक हैकिंग हमले में 53.4 करोड़ डॉलर क़ीमत की वर्चुअल मुद्रा गंवा दी है.
कॉइनचेक जोपान की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी एक्सचेंज में से एक है और अब उसने बिटकॉइन के अलावा तमाम तरह की क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन बंद कर दिया है.
कंपनी एनईएम नाम की वर्चुअल करेंसी में हुए नुक़सान का आंकलन कर रही है.
कंपनी के एक प्रतिनिधि ने जापानी मीडिया से कहा है कि कंपनी निवेशकों का पैसा शायद न लौटा पाए.
यदि इस चोरी की पुष्टि हो जाती है तो ये डिजिटल मुद्रा की सबसे बड़ी चोरी होगी.
टोक्यो स्थित एक और एक्सचेंज एमटीगॉक्स ने साल 2014 में स्वीकार किया था कि उसके नेटवर्क से 40 करोड़ डॉलर की मुद्रा चुरा ली गई है. इस ख़बर के बाद ये डिजिटल एक्सचेंज ठप हो गई थी.

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कैसे हुई चोरी?
माना जा रहा है कि कॉइनचेक की जो मुद्रा चोरी हुई है, वो 'हॉट वालेट' में रखी थी जो इंटरनेट से जुड़ा था. वहीं 'कोल्ड वॉलेट' में मुद्रा को ऑफ़लाइन नेटवर्क पर रखा जाता है.
कॉइनचेक का कहना है कि उसे मालूम है कि चुराई गई मुद्रा किन डिजिटल पतों पर भेजी गई है.
कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि हैकर उसके नेटवर्क में शुक्रवार सुबह घुसे थे लेकिन इस चोरी का पता आठ घंटे बाद ही चल सका.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युसूके ओतसूका का कहना है कि करीब 52.3 करोड़ एनईएम को इस दौरान कॉइनचेक के नेटवर्क से चुरा लिया गया.
कॉइनचेक अभी पता लगा रही है कि इस हैकिंग हमले में कुल कितने ग्राहक प्रभावित हुए हैं और ये हमला कहां से किया गया है.

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ओतसुका ने बताया कि उन्हें पता है कि मुद्रा को कहां भेजा गया है. उन्होंने कहा कि जांच की जा रही है और अगर मुद्रा को पूरी तरह ट्रैक कर लिया गया तो इस मुद्रा को वापस हासिल किया जा सकेगा.
कॉइनचेक ने इस चोरी के बारे में जापानी पुलिस और वित्तीय सेवा एजेंसी को जानकारी दे दी है.
ब्लूमबर्ग एजेंसी के मुताबिक चोरी के बाद दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी क्रिप्टो करेंसी एनईएम के बाज़ार भाव में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई है और ये इसकी क़ीमत कम होकर 87 सेंट हो गई है.
वहीं बिटकॉइन में 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और रिप्पल में 9.9 प्रतिशत की गिरावट आई है.
क्या है कॉइनचेक?

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2012 में स्थापित हुई ये कंपनी टोक्यो में स्थित है और इसमें बीते साल अगस्त तक 71 कर्मचारी कार्यरत थे.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक कंपनी टोक्यो के शीबूया ज़िले में स्थित है जहां कई स्टार्ट अप कंपनियों के दफ़्तर हैं. एमटीगॉक्स एक्सचेंज भी यहीं से संचालित थी.
टोक्यो के एक तीस वर्षीय ग्राहक कुनीहीको सातो ने बताया कि उन्होंने एक्सचेंज के डिजिटल वॉलेट में पांच लाख येन (लगभग 4600 डॉलर) जमा कर रखे थे.
उन्होंने कहा कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि जापान में भी ऐसा हो सकता है जहां क़ानून बहुत विकसित हैं.
कैसे काम करती है क्रिप्टो करेंसी?
पैसों को आमतौर पर सरकारें या पारंपरिक बैंक प्रिंट करते हैं, वहीं डिजिटल करेंसी को एक जटिल कंप्यूटर प्रक्रिया माइनिंग के ज़रिए उत्पादित किया जाता है.
ब्लॉकचेन तकनीक के ज़रिए दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी में हो रहे लेनदेन पर नज़र रखी जाती है.
हज़ारों ब्लॉकचेन हैं, जो ऑनलाइन मौजूद हैं. ये करेंसी आपकी जेब में रखे सिक्कों और नोटों की तरह नहीं होती है.
इसे सही से समझने के लिए आप इसे डिजिटल कैश के बजाए डिजिटल ऐसेट मान सकते हैं.
उदाहरण के तौर पर बिटकॉइन के ज़्यादातर धारक निवेशक हैं. लेकिन ये क्रिप्टो करेंसी पूरी तरह गुप्त होती है और इसकी वजह से बहुत से अपराधी भी इसका इस्तेमाल करते हैं.
किसी भी क्रिप्टो करेंसी का भाव इस बात से तय होता है कि कितने लोग उसमें निवेश कर रहे हैं और उसमें भरोसा रखते हैं.
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