पीएम मोदी ने बताया, भ्रष्टाचार और परिवारवाद का क्या है इलाज

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल क़िले से अपने भाषण में मौजूदा वक़्त में देश के सामने खड़ी कई चुनौतियों का ज़िक्र किया. आइए पढ़ें कि प्रधानमंत्री ने किन प्रमुख मुद्दों का ज़िक्र किया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैं जानता हूँ चुनौतियाँ अनेक हैं. मर्यादाएँ अनेक हैं. मुसीबतें भी हैं. बहुत कुछ है. हम लगातार कोशिश कर रहे हैं. हम रास्ते खोजते हैं. लेकिन दो विषयों की चर्चा मैं यहाँ करना चाहता हूँ. चर्चा अनेक विषयों की हो सकती है, मगर समय की कमी की वजह से मैं केवल दो विषयों पर चर्चा करना चाहता हूँ."
"मैं सबकी चर्चा नहीं करते हुए केवल दो विषयों पर ज़रूर चर्चा करना चाहता हूँ. एक है- भ्रष्टाचार, और दूसरा है- भाई-भतीजावाद, परिवारवाद."
भ्रष्टाचार पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल क़िले से अपने भाषण में भ्रष्टाचार की समस्या पर विस्तार से बात की.
उन्होंने कहा,"भारत जैसे देश में जहाँ लोग ग़रीबी से जूझ रहे हैं. एक तरफ़ ऐसे लोग हैं जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है. दूसरी तरफ़ वो लोग हैं जिनके पास चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है."
ये कहते हुए कि 'ये स्थिति अच्छी नहीं है', पीएम मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पूरी ताक़त से लड़ने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने कहा,"पिछले आठ वर्षों में, डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र के द्वारा, आधार, मोबाइल, इन सारी आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग करते हुए, दो लाख करोड़ रुपये जो ग़लत हाथों में जाते थे, उसको बचाकर देश की भलाई के काम में लगाने में हम सफल हुए हैं."
प्रधानमंत्री ने साथ ही पिछली सरकारों को भी आड़े हाथ लिया.
उन्होंने कहा,"जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूट-लूट कर भाग गए, उनकी संपत्तियाँ ज़ब्त करके वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. कइयों को जेलों में जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं."
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प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर समाज के नज़रिये में बदलाव की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा,"जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफ़रत का भाव पैदा नहीं होता होता, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता ख़त्म नहीं होने वाली है."
"ये चिंता का विषय है कि आज देश में भ्रष्टाचार के प्रति नफ़रत तो दिखती है, व्यक्त भी होती है, मगर कभी-कभी भ्रष्टाचारियों के प्रति उदारता बरती जाती है. कई बार तो लोग इतनी बेशर्मी तक चले जाते हैं कि कोर्ट में सज़ा हो चुकी हो, जेल जाना तय हो चुका हो, जेल जा चुके हों, उसके बाद भी उसके महिमामंडन में लगे रहते हैं."
"जब तक समाज में गंदगी के प्रति नफ़रत नहीं होती है, स्वच्छता के प्रति चेतना जगती नहीं है. जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफ़रत का भाव पैदा नहीं होता है, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता ख़त्म नहीं होने वाली है."
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भ्रष्टाचार को लेकर प्रयास एक निर्णायक दिशा में बढ़ रहे हैं.
उन्होंने कहा,"मैं साफ़ देख रहा हूँ कि अब हम भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक निर्णायक कालखंड में क़दम रख रहे हैं. बड़े-बड़े भी बच नहीं पाएँगे. भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है, मुझे इसके ख़िलाफ़ लड़ाई करनी है, उसे तेज़ करना है, उसे एक निर्णायक मोड़ पर लेकर जाना है."
"हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटाना भी पड़े, वो स्थिति हम पैदा करें."
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परिवारवाद, भाई-भतीजावाद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार के बाद परिवारवाद को लेकर भी विस्तार से अपनी बात रखी और साथ ही कहा कि ये चुनौती केवल राजनीति के क्षेत्र में ही नहीं है.
उन्होंने कहा,"जब मैं भाई-भतीजावाद और परिवारवाद की बात करता हूं, तो लोगों को लगता है कि मैं सिर्फ राजनीति की बात कर रहा हूं. जी नहीं, दुर्भाग्य से राजनीतिक क्षेत्र की उस बुराई ने हिंदुस्तान के हर संस्थान में परिवारवाद को पोषित कर दिया है."
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवारवाद की वजह से देश में योग्यता की क़द्र नहीं हो पा रही है.
उन्होंने कहा,"परिवारवाद हमारी अनेक संस्थाओं को अपने में लपेटे हुए है और उसके कारण मेरे देश के टैलेंट को नुक़सान होता है, देश के सामर्थ्य को नुक़सान होता है. जिनके पास संभवनाएँ हैं, वो परिवारवाद के कारण बाहर रह जाता है. ये भी भ्रष्टाचार का एक कारण बन जाता है, ताकि जिसका कोई आसरा नहीं है, वो सोचता है कि कहीं से ख़रीद कर जगह बना लो."
पीएम मोदी ने कहा कि देश की संस्थाओं को परिवारवाद और भाई-भतीजावाद से बचाने के लिए इसे लेकर "एक नफ़रत पैदा करनी होगी, जागरुकता पैदा करनी होगी."
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि परिवारवाद ने सबसे ज़्यादा नुक़सान राजनीति का किया है.
उन्होंने कहा,"राजनीति में भी परिवारवाद ने देश के सामर्थ्य के साथ सबसे ज़्यादा अन्यनाय किया है. परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, उसको देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता है."
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प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आम लोगों का मनोबल ऊँचा रहे इसके लिए परिवारवाद से मुक्ति पाना ज़रूरी है.
उन्होंने कहा,"हिन्दुस्तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए, हिन्दुस्तान की सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए, हमें देश को इस परिवारवाद की मानसिकता से मुक्ति दिलाकर योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर बढ़ना होगा, ये अनिवार्यता है, वरना हर किसी का मन कुंठित रहता है, क्योंकि हर किसी को लगता है कि मैं उस चीज़ के लिए योग्य था, वो मुझे नहीं मिला, क्योंकि मेरा पिता-चाचा, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी कोई वहाँ थे नहीं. ये मनस्थिति किसी के लिए अच्छी नहीं है.
प्रधानमंत्री मोदी ने परिवारवाद पर अपनी बात रखते हुए हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों का उदाहरण दिया.
उन्होंने कहा,"ऐसा तो नहीं है कि देश के सामने पहले कोई प्रतिभा ही नहीं थी, हिन्दुस्तान में कोई खेलता ही नहीं था, लेकिन सेलेक्शन भाई-भतीजावादा के रास्ते होता था, इसलिए वो खेल के मैदान तक तो पहुँच जाते थे, उस देश तक चले जाते थे, मगर जीत-हार से उन्हें कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन जब पूरी पारदर्शिता से चयन होने लगा, सामर्थ्य का सम्मान होने लगा, तो आज देखिए दुनिया में खेल के मैदान में भारत का तिरंगा फहरता है, भारत का राष्ट्रगान गाया जाता है."

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पीएम मोदी ने और क्या कहा
- आजादी के 75 साल के बाद भी जिस आवाज़ को सुनने के लिए हमारे कान तरस रहे थे, वो आवाज आज सुनाई दी है. 75 साल के बाद लाल किले पर तिरंगे को सलामी देने का काम पहली बार #MadeInIndia तोप ने किया है.
- आज़ादी के दशकों बाद पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नज़रिया बदल चुका है. विश्व, भारत की तरफ अपेक्षा से देख रहा है.
- लाल बहादुर शास्त्री जी का दिया गया 'जय जवान, जय किसान' का मंत्र आज भी देश के लिए प्रेरणा है. अटल जी ने 'जय विज्ञान' कह कर उसमें एक कड़ी और जोड़ दी थी लेकिन अब अमृतकाल के लिए एक और अनिवार्यता है, वो है 'जय अनुसंधान.' 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान.'
- किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है, हमारी बोल-चाल में, हमारे व्यवहार में, हमारे कुछ शब्दों में... हम नारी का अपमान करते हैं. क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं?
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