झारखंड में क्या सरकार गिराने की कोशिश हो रही है?

कांग्रेस जेएमएम

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    • Author, आनंद दत्त
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए रांची से

30 जुलाई की शाम झारखंड की राजनीति हिचकोले खाने लगी. सत्तारूढ़ कांग्रेस के तीन विधायक 49 लाख 37 हजार 300 रुपए नगद के साथ पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पकड़े गए.

इसमें जामताड़ा के विधायक डॉ इरफ़ान अंसारी, खिजरी से विधायक राजेश कच्छप और कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगारी शामिल थे. इसके अलावा इरफ़ान अंसारी के ड्राइवर और उनके निजी सहायक को भी पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हावड़ा ग्रामीण की एसपी स्वाती भंगालिया ने बताया कि आरोपियों पर 420/120 बी, 171 ई/34 के अलावा 8/9 पीसी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. केस अब सीआईडी के पास है.

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पूछताछ में किसी विधायक ने गाड़ी खरीदने के लिए आने की बात कही तो किसी ने कहा कि वो साड़ी खरीदने आए हैं. लेकिन पैसे का स्रोत कोई नहीं बता पाया. पुलिस हिरासत में रहने के बाद 31 की शाम को तीन विधायकों को हावड़ा सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां मजिस्ट्रेट ने उन्हें दस दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

इरफ़ान अंसरी और हेमंत सोरेन

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इधर 31 की दोपहर बाद बेरमो सीट से विधायक कांग्रेस के कुमार जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह ने रांची के अरगोड़ा थाने में ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज़ कराई. एफ़आईआर में उन्होंने लिखा कि, 'इन तीनों विधायकों का उन्हें फ़ोन आया जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार गिराने के एवज में प्रति विधायक 10 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.'

'इरफ़ान और राजेश मुझे कोलकाता बुला रहे थे, जहां से गुवाहाटी जाना था. वहां मेरी मुलाकात सीएम हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात करवाने की बात कही और मंत्री पद के लिए आश्वसम दिया. इरफ़ान ने यह भी कहा कि जो नई सरकार बनेगी, उसमें उन्होंने अपने लिए स्वास्थ्य मंत्री के पद का वायदा लिया है.'

'उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि वे लोग कोलकाता पहुंच रहे हैं. इसके लिए उन्हें पैसे भी ट्रांसफ़र किए गए हैं. असम के सीएम यह काम अपनी पार्टी के टॉप के नेताओं के कहने पर कर रहे हैं, जो दिल्ली में बैठे हैं.'

हालांकि दर्ज़ एफ़आईआर में इस बात का ज़िक्र नहीं है कि फ़ोन किस नंबर से आया था. साथ ही फोन किस वक्त आया ये भी नहीं बताया गया है, न ही किसी तरह की रिकॉर्डिंग पेश किए जाने का ज़िक्र नहीं है.

कांग्रेस

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कांग्रेस ने बताया साजिश

एफ़आईआर दर्ज होने के कुछ घंटे बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पंचायती राज मंत्री आलमगीर आलम ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. राजेश ठाकुर ने कहा कि तीनों विधायकों के पकड़े जाने की घटना निंदनीय है.

उन्होंने कहा इस जेएमएम-कांग्रेस सरकार को गिराने की सुनियोजित साज़िश बताया है. उन्होंने कहा, 'बीजेपी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है. वह सभी विधायकों से संपर्क कर तरह-तरह के प्रलोभन दे रही है.'

वहीं मंत्री आलमगीर आलम ने कहा , 'हम लगातार पूरे मामले पर नज़र बनाए हुए हैं. जांच चल रही है, आगे जो भी रिपोर्ट सामने आएगी, हम उसे जनता और मीडिया के सामने पेश करेंगे. साथ ही पूरी रिपोर्ट दिल्ली आलाकमान को भी भेजी जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि तीनों विधायकों को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है.'

पूर्व विधायक बंधू तिर्की ने कहा कि जिन लोगों ने पैसे दिए हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए. उन्हें भी पकड़ा जाना चाहिए.

कांग्रेस

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पहले भी हुई है एफ़आईआर

ये पहला मौका नहीं है जब सरकार गिराने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज़ कराई गई है. इससे पहले 22 जुलाई 2021 को भी कुमार जयमंगल ने ही रांची के ही कोतवाली थाने में एक एफ़आईआर दर्ज़ कराई थी.

उसमें भी सरकार गिराने की साज़िश के आरोप में बोकारो के फल एवं सब्जी विक्रेता निवारण महतो, अमित सिंह और अभिषेक दुबे को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से किसी का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था. एक साल होने को है, पुलिस अभी तक चार्जशीट दायर नहीं कर पाई है. जिस वजह से तीनों आरोपी जमानत पर बाहर हैं.

पिछले दस साल से क्राइम कवर कर रहे पत्रकार अखिलेश सिंह कहते हैं, "चार्जशीट 60 दिनों में दायर करना होती है. यहां ऐसा नहीं हुआ. जांच के दौरान एक ही पीएनआर पर दिल्ली की यात्रा करनेवाले कांग्रेस के विधायक इरफ़ान अंसारी, उमाशंकर अकेला और निर्दलीय विधायक अमित यादव का नाम सामने आया, शक था कि ये लोग बीजेपी नेताओं से मिलने दिल्ली गए थे. लेकिन पुलिस ने कभी इनसे पूछताछ की ही नहीं."

उन्होंने बताया, "इसके ठीक एक महीने बाद अगस्त 2021 को घाटशिला के जेएमएम विधायक रामदास सोरेन ने रांची के धुर्वा थाने में एफ़आईआर दर्ज़ कराया. जिसमें उन्होंने कहा कि जेएमएम के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रवि केजरीवाल और व्यापारी अशोक अग्रवाल सरकार गिराने की साज़िश कर रहे हैं. इस मामले में भी चार्जशीट नहीं हुई है. हालांकि रवि केजरीवाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था."

इन दोनों ही मामलों पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरा है. बीबीसी से उन्होंने कहा, 'इस तरह के आरोप दो बार पहले भी सरकार लगा चुकी है, लेकिन जांच क्यों नहीं कर रही. जबकि दोनों ही मामले थाने में दर्ज़ हैं. साफ़ दिख रहा है कि कांग्रेस अपने ही पार्टी के विधायकों को फंसा रही है. आरोप बीजेपी पर लगा रही है.'

सोरेन

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क्या 'ऑपरेशन लोटस' फेल हुआ?

ऐसे में सवाल उठता है क्या तथाकथित ऑपरेशन लोटस झारखंड में नाकाम हो गया है? इसके लिए हमें तीन बयानों पर गौर करना होगा.

पहला बयान पैसा जब्ती के बाद हावड़ा की ग्रामीण एसपी स्वाती भंगालिया ने कहा कि, हमारे पास एक स्पेशल इनपुट आया. जिसमें बताया गया कि कुछ गाड़ी में भारी मात्रा में कैश है. इसके बाद हमने उन्हें इंटरसेप्ट किया और जांच के दौरान इन्हें पकड़ा गया.

इसके बाद अगर आप विधायक अनूप सिंह की बातों पर गौर करें तो उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि कितना पैसा और कौन लोग कोलकाता कब पहुंच रहे हैं. इस वक्त झारखंड में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है. सोमवार 1 अगस्त को सदन के बाहर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कुमार जयमंगल सिंह ने कहा कि, 'अगर शरीर का कोई अंग खराब हो जाता है तो पहले उसका इलाज किया जाता है, लेकिन सामनेवाले ने इलाज का मौका नहीं दिया, इसलिए काटकर फेंकना पड़ा.'

तीसरा, एफ़आईआर में जब असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का जिक्र आया तो उन्होंने एएनआई को अपना बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि, 'मैं 22 साल कांग्रेस में रहा हूं, वहां के नेता मेरे संपर्क में हैं तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है. मुझे नहीं पता, ये एफ़आईआर क्यों दर्ज़ की गई है.'

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तो क्या झारखंड कांग्रेस ने ही ऑपरेशन लोटस को फेल किया है? कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर कहते हैं, "बीजेपी की तरफ से ऐसा प्रयास सरकार बनने के कुछ दिन बाद से ही हो रहा है. नमन विक्सल कोंगारी ने ही तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को उस वक्त जानकारी दी थी."

राज्य कांग्रेस को इन विधायकों के मूवमेंट के बारे में पहले से जानकारी थी. ऐसे में क्यों न माना जाए कि आप लोगों ने ही सूचना लीक कर उनकी गिरफ्तारी में भूमिका निभाई है? ऐसा करके अपनी सरकार को बचा लिया है?

राजेश ठाकुर कहते हैं, "ये बात सही है कि हमें सूचना थी. लेकिन हमने इसपर विश्वास नहीं किया. क्योंकि ऐसी बातें पिछले दो सालों से चल रही थी. लेकिन जब हमारे विधायक रंगे हाथ पकड़े गए, तब हमने एफ़आईआर भी कराई और उन्हें तत्काल सस्पेंड भी कर दिया."

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आंकड़े क्या कहते हैं?

आंकड़ों की बात करें तो 81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में इस वक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के पास 30, कांग्रेस के पास 18, आरजेडी के पास 1 विधायक हैं. यानी बहुमत के लिए जरूरी 41 में से आठ अधिक कुल 49 की संख्याबल है.

वहीं विपक्ष में बीजेपी के पास 26, आजसू के पास 2, एनसीपी एक, सीपीआईएमल 1, निर्दलीय 2 विधायक हैं. ऐसे में हेमंत सोरेन की सरकार को गिराने के लिए कुल 9 विधायकों को तोड़ना होगा.

तो क्या महाराष्ट्र मॉडल पर ही झारखंड में कांग्रेस को तोड़कर बीजेपी यहां सरकार बनाना चाहती है? बाबूलाल मरांडी एक बार फिर कहते हैं, "क्या तीन विधायकों को तोड़कर सरकार बन जाएगी हमारी. कांग्रेस के आपसी लड़ाई का यह परिणाम है."

उन्होंने यह भी कहा, 'कांग्रेस से यह सब हेमंत सोरेन करवा रहे हैं. उसे तो खुद हेमंत खत्म करना चाहते हैं. इन्हें आपस में लड़वा कर हेमंत ही कांग्रेस पार्टी को खत्म करना चाहते हैं.'

झारखंड कांग्रेस में ऐसी कौन सी स्थितियां है जिससे विधायक टूटने के लिए तैयार हैं, या फिर उनके टूटने की चर्चा आए दिन होती रहती है. वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुराग कहते हैं, 'परिस्थिति किसी पार्टी के भीतर नहीं है. जो लोग प्रलोभन दे रहे हैं असल में समस्या वहां है. झारखंड का किसी आदिवासी ने जीवन में 10 करोड़ रुपये नहीं देखे हैं. उस विधायक को अगर आप मंत्री पद और इतने पैसे देंगे, उसे तो ये 10 करोड़ भी 100 करोड़ के बराबर लगेगा.'

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वो कहते हैं, 'जेपी नड्डा ने बिहार में बयान दे ही दिया है कि वह सभी पार्टी को ख़त्म कर देंगे. इसी से आप समझ सकते हैं कि समस्या कहां है. और बीजेपी से इतर दूसरी पार्टियों के सत्ता में बने रहने में बाधा कौन बन रहा है. इसको समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस की ज़रूरत नहीं है.'

'दूसरी बात ये भी है कि भ्रष्टाचार कर चुके नेताओं को ईडी जैसी एजेंसियों का भय दिखाया जाता है और वो टूट जाते हैं.'

अब एक आख़िरी सवाल, क्या झारखंड में ऑपरेशन लोटस ख़त्म माना जाए. झारखंड कांग्रेस के सूत्रों की माने तो अभी भी उनके विधायकों से संपर्क किया जा रहा है. वो चौकन्ने हैं. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस विधायक से और कौन संपर्क कर रहा है. उन्होंने कहा, 'अगर ज़रूरत पड़ी तो सबूत के साथ जल्द ही उसका भी खुलासा करेंगे.'

लेकिन कांग्रेस पार्टी ये खुलासा तभी कर पाएगी, जब उसे उनके विधायक सबूत देंगे और कांग्रेस में रहकर ही अपने हित के बारे में सोचेंगे.

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