इला पोपट: तीन देशों में रह चुकी हैं ये महिला, लेकिन अब भी उनका कोई देश नहीं

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- Author, मेरिल सबेस्टियन
- पदनाम, बीबीस न्यूज़, कोचीन
इला पोपट भारत में पांच दशकों से रह रही हैं. उनकी यहां शादी हुई और बच्चे भी हैं. उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी कार्ड भी है.
लेकिन, वो एक भारतीय के तौर पर अब भी विदेश नहीं जा सकतीं क्योंकि उनके पास पासपोर्ट नहीं हैं.
उनके पास भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश का पासपोर्ट नहीं है और एक तरह से वो 'स्टेटलेस' हैं यानी उनका कोई देश नहीं है. उनके पास किसी देश की नागरिकता नहीं है.
अब इला पोपट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अपील की है कि वो भारतीय अधिकारियों को उनका पासपोर्ट जारी करने का आदेश दे.
66 साल की इला पोपट का जन्म 1955 में यूगांडा में हुआ था और जब वो 10 साल की थीं तो अपनी मां के पासपोर्ट पर भारत आई थीं.
वो तब से भारत में रह रही हैं और इसे ही अपना घर बना लिया है. उनके पास अपने 'भारतीयता' साबित करने के लिए कई दास्तावेज हैं.
इला पोपट की इस मुश्किल की वजह ये है कि पासपोर्ट लेने की उनकी दशकों की कोशिश ने उन्हें तीन अलग-अलग देशों में 'स्टेटलेस' बना दिया.
वह कहती हैं, "हर बार बात मेरी नागरिकता पर आकर अटक जाती है."

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यूगांडा से भारत कैसे आईं
इला के पिता का जन्म गुजरात के पोरबंदर में हुआ था और वहीं उनकी परवरिश भी हुई. 1952 में वो रोजगार के लिए यूगांडा चले गए और कुछ सालों बाद ब्रिटेन का पासपोर्ट ले लिया.
इला पोपट का जन्म ब्रितानी शासन से यूगांडा की आज़ादी से सात साल पहले 1955 में कामुली शहर में हुआ.
1966 में वो अपनी मां और छोटे भाई के साथ यूगांडा से भारत आ गईं. उस समय यूगांडा में राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुज़र रहा था और देश में आपातकाल के हालात थे.
इला पोपट कहती हैं, "मैं भारत में नाबालिग के तौर पर आई थी. मेरा नाम मेरी मां के पासपोर्ट में दर्ज था. उनके पासपोर्ट पर लिखा था कि वो ब्रिटेन से सुरक्षा प्राप्त शख़्स हैं."
ब्रिटेन की सरकार ने उन्हें इसी श्रेणी की नागरिकता दी थी.
उनके वकील आदित्य चिताले बताते हैं कि इला पोपट उस समय कैसे बिना पासपोर्ट के देश में आईं. वह कहते हैं, "संभव है कि उस समय के नियम ये थे कि कोई बच्चा अपने माता-पिता के पासपोर्ट पर किसी देश की यात्रा कर सकता है."
भारत में इला पोपट का परिवार पहले पोरबंदर में रहा था लेकिन बाद में 1972 में मुंबई आ गया. यहां उनकी 1977 में शादी हुई और परिवार आगे बढ़ा.
1997 में इला पोपट ने भारत के नागरिकता क़ानून, 1955 की शर्तों को पूरा करते हुए नागरिकता के लिए आवेदन दिया. इस क़ानून के तहत भारत के नागरिक से शादी होना और देश में सात साल तक रहना ज़रूरी है. लेकिन, उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया.

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ब्रिटेन से भी नहीं मिला पासपोर्ट
इसके बाद उन्होंने मुंबई में ब्रितानी उच्चायोग से संपर्क किया क्योंकि उनके दोनों माता-पिता के पास ब्रितानी पासपोर्ट है. उनकी मां का परिवार अब भी ब्रिटेन में है.
हालांकि, उच्चायोग ने कहा कि वो ब्रिटेन के पासपोर्ट के लिए योग्य नहीं हैं क्योंकि ना तो उनके पिता और ना ही उनके दादा का जन्म और ना ही पंजीकरण 1962 के बाद ब्रिटेन में या उसके उपनिवेश में हुआ था.
उच्चायोग ने ये भी कहा कि इला पोपट यूगांडा की नागरिक लगती हैं, "लेकिन अगर यूगांडा की सरकार पासपोर्ट की सुविधा नहीं देती है तो आप स्टेटलेस (जिसका कोई देश नहीं) हो जाएंगी."
कई मौकों में से ये पहली बार था जब उन्हें स्टेटलेस होने का तमगा मिला.
आने वाले दशकों में उन्होंने दो बार पासपोर्ट के लिए आवेदन किया लेकिन वो हर बार खारिज हो गया.
इला कहती हैं, "मैंने पूछा था कि क्या मुझे ब्रिटेन में अपने दादा से मिलने के लिए कम से कम ट्रैवल पासपोर्ट मिल सकता है लेकिन मुझे वो भी नहीं दिया गया."

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कहां हुई गलती
वडोदरा में रहने वाले उनके छोटे भाई के पास अपने माता-पिता की तरह ब्रितानी पासपोर्ट है.
लेकिन, इला पोपट को ब्रितानी पासपोर्ट मिलने में कहां चूक हो गई है. वह कहती हैं, "हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे. हम ज़्यादा कुछ नहीं जानते थे और अपने बड़ों के कहे अनुसार ही काम करते थे. ऐसे में इस बारे में और जानने का सवाल ही नहीं उठता था इसलिए हमें नहीं पता कि उनसे क्या गलती हुई थी."
साल 2015 में उनका तीसरा आवेदन रद्द हो गया. भारतीय प्रशासन ने उन्हें पहले देश की नागरिकता के लिए पंजीकरण करने के लिए कहा.
आदित्य चिताले इस पर सहमति जताते हैं. वह कहते हैं, "उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए था जिसके बिना उन्हें पासपोर्ट नहीं मिल सकता था."
इला पोपट कहती हैं कि उन्हें ठीक से जानकारी नहीं मिली.
वह कहती हैं, "हम बहुत ज़्यादा नहीं जानते थे और किसी ने हमें नहीं बताया कि क्या करना है. हमने रास्ता निकालने के लिए कई सरकारी दफ़्तरों के चक्कर लगाए. हर जगह लोग मुझे सिर्फ़ स्टेटलेस कहता थे और मेरे मामले के लिए नाउम्मीदी जताते थे."
2018 में उनकी बेटी ने दिल्ली में यूंगाडा उच्चायोग को नागरिकता या पासपोर्ट देने के लिए लिखा जिसके आधार पर वो भारत में आवेदन कर सकें. उच्चायोग ने यूगांडा में उनके जन्म की तो पुष्टि की लेकिन कहा कि वो कभी 'यूगांडावासी' नहीं रहीं.
उन्हें एक बार फिर भारत में एक 'स्टेटलेस व्यक्ति के तौर पर' नागरिकता के लिए आवदेन करने के लिए कहा गया.

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अब पहुंची कोर्ट
साल 2019 में इला पोपट ने आख़िरकार भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया लेकिन वो खारिज हो गया. आधिकारिक आदेश में कहा गया कि वो देश में बिना उचित वीज़ा के रह रही हैं इसलिए वो नागरिकता क़ानून, 1955 की शर्तों को पूरा नहीं करती हैं.
इसके बाद इला पोपट निराश हो गईं. उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी याचिका में कहा, "मेरे पति भारतीय हैं, मेरे बच्चे और पोती-पोता भारतीय हैं. मेरे पास आधार सहित सभी दूसरे सरकारी दस्तावेज हैं लेकिन उनमें से कोई भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है."
1972 में यूगांडा के तानाशाह ईदी अमीन के एशियाई लोगों के लिए देश से जाने का फरमान सुनाने के बाद कई भारतीयों ने यूगांडा छोड़ दिया था. लेकिन, अधिकतर को ब्रिटेन, कनाडा या भारत में नागरिकता मिल गई.
इला पोपट के मामले की बॉम्बे हाई कोर्ट में अगस्त में सुनवाई होगी.
वह बताती हैं कि वो पहले ही ब्रिटेन में अपनी दो भांजियों की शादियों में नहीं जा पाई हैं. "मैं दुबई में अपने भांजे की शादी में भी नहीं जा पाऊंगी क्योंकि शादी सुनवाई की तारीख़ से एक हफ़्ता पहले है."
इला पोपट अब बस उस देश की नागरिकता पाने की उम्मीद रखती हैं जहां उनकी विरासत है और जहां उन्होंने अपने जीवन का लंबा हिस्सा बताया है.
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