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पश्चिम बंगाल: अर्पिता मुखर्जी कौन हैं, ईडी ने जिनके घर से बरामद किए 21 करोड़ रुपये
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की भर्तियों में कथित घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार सुबह ममता बनर्जी सरकार में नंबर दो रहे उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है.
इससे पहले उनसे करीब 27 घंटे तक पूछताछ की गई. लेकिन उनकी गिरफ्तारी से ज्यादा सुर्खियां हाल तक अनाम रहीं अर्पिता मुखर्जी ने बटोरीं जिन्हें मंत्री पार्थ चटर्जी का 'करीबी' बताया जा रहा है. पार्थ चटर्जी तृणमूल कांग्रेस के महासचिव भी हैं.
अधिकारियों के मुताबिक़, अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से 21 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम बरामद की गई है. ये रकम बोरियों में भर कर आलमारी में रखी थी. ईडी के अधिकारियों के मुताबिक़, इस रकम का संबंध भर्ती घोटाले से हो सकता है.
अर्पिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
जानकारों का कहना है कि इस पूरे मामले ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है.
पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी कथित करीबी अर्पिता के घर से इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद अब तक मुख्यमंत्री या पार्टी ने कोई टिप्पणी नहीं की है. गिरफ़्तारी को लेकर भी अब तक कोई बयान नहीं आया है.
टीएमसी चुप, ईडी ने क्या कहा?
पहले ईडी और सीबीआई की पूछताछ को वे बीजेपी की ओर से बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार देती रही है. लेकिन अब 'ठोस सबूत' सामने आने के बाद किसी से कुछ कहते नहीं बन रहा है.
इस मामले के सामने आने के बाद अर्पिता और मंत्री पार्थ चटर्जी से उनकी 'करीबी' को लेकर अटकलों और अफवाहों का दौर शुरू हो गया है.
इससे पहले शुक्रवार शाम को पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा था कि इस रकम से पार्टी का कोई संबंध नहीं है. ये कहां से आई, इसकी जवाबदेही उसकी है जिसके पास ये बरामद हुई है. दूसरी ओर, मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शुक्रवार को मंत्री से पूछताछ की कार्रवाई को 'बदले की भावना से की जाने वाली कार्रवाई' करार दिया था.
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, "अर्पिता के फ्लैट से अब तक 21 करोड़ रुपये नकदी के अलावा करीब पचास लाख रुपये के आभूषण भी बरामद किए गए हैं. वहां 20 आईफोन के अलावा कुछ विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है. लेकिन अर्पिता इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी है कि यह आए कहां से."
फ़िल्मों में काम कर चुकी हैं अर्पिता
अर्पिता आखिर क्या करती हैं? उसके पास इतनी रकम आई कहां से? मंत्री पार्थ चटर्जी के साथ उसके संबंध कैसे हैं?
अब ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं. अर्पिता ने दावा किया है कि वह एक अभिनेत्री हैं और अभिनय ही उनकी आय का स्रोत है. उन्होंने ईडी की पूछताछ में ये दावा किया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में भी खुद को अभिनेत्री बताया है.
अर्पिता ने वर्ष 2005 में मॉडलिंग के जरिए अपने करियर की शुरुआत की थी. उसके बाद उन्होंने कुछ बांग्ला और उड़िया फिल्मों में भी काम किया है.
प्रसेनजीत अभिनीत 'मामा-भाग्ने (मामा भांजा)' और देव अभिनीत 'पार्टनर' में भी उहोंने अहम भूमिकाएं निभाई थी. वर्ष 2008 में आई 'पार्टनर' ही उनकी पहली बांग्ला फिल्म थी.
अर्पिता की मां मिनती मुखर्जी ने दावा किया है कि उनकी पुत्री ने उड़िया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है. अर्पिता कुछ विज्ञापन फिल्मों में भी काम कर चुकी है. उन्होंने नेल आर्ट की भी ट्रेनिंग ली है.
मंत्री से संपर्क को लेकर ईडी ने क्या किया दावा?
वे दक्षिण कोलकाता के नाकतला उदयन संघ की दुर्गा पूजा के विज्ञापनों में भी नजर आती रही हैं. कोलकाता की शीर्ष पूजा में गिनी जाने वाली इस समिति के प्रमुख थे मंत्री पार्थ चटर्जी.
ये पूजा मंत्री के मोहल्ले में ही होती है. ईडी के अधिकारियों का दावा है कि संभवत उसी से दोनों के बीच करीबी बढ़ी. ममता बनर्जी ने जब इस पूजा का उद्घाटन किया, तब समारोह में भी अर्पिता को मंच पर मंत्री के साथ बैठे देखा गया.
अर्पिता मंत्री पार्थ चटर्जी के साथ चुनाव प्रचार भी करती रही हैं. अब उनके सुर्खियों में आने के बाद पार्थ के साथ हाथ जोड़ कर वोट मांगने वाली उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.
वे इसके अलावा भी दर्जनों ऐसे कार्यक्रमों में उपस्थित रही हैं जहां मुख्य अतिथि पार्थ चटर्जी थे.
अर्पिता अपने शरीर और स्वास्थ्य को लेकर बेहद सचेत थी. वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में योग और कसरत करते हुए कई तस्वीरें नियमित रूप से पोस्ट करती रहती थी.
अर्पिता की मां ने क्या कहा?
अर्पिता की मां मिनती मुखर्जी का कहना है कि उनकी पुत्री 'मॉडलिंग के साथ ही फिल्मों में भी काम करती थी.' लेकिन उनको यह नहीं पता कि वह 'इसके अलावा क्या करती थी.'
उन्होंने कहा, "मैंने अर्पिता के जीवन और बाकी गतिविधियों के बारे में कभी कुछ जानने का भी प्रयास नहीं किया है."
नाम नहीं छापने की शर्त पर ईडी के एक अधिकारी ने कहा, "शुरुआती सूची में अर्पिता का नाम भी नहीं था. पार्थ के घर की तलाशी के दौरान एक कागज बरामद हुआ जिस पर अर्पिता का नाम और पता लिखा था. उसके बाद ही अर्पिता के घर छापेमारी का फैसला किया गया."
'इतनी बड़ी रकम'
ईडी के सूत्रों बीबीसी को बताया कि फिलहाल पार्थ और अर्पिता के संबंधों की जांच की जा रही है. हालांकि, जांच एजेंसी का अनुमान है कि एसएससी घोटाले और अर्पिता के फ्लैट से बरामद रकम का एसएससी घोटाले से सीधा संबंध है.
ईडी के अधिकारियों का मानना है कि पार्थ ने बड़ी रकम को सुरक्षित रखने के लिए अर्पिता के फ्लैट को चुना था.
ईडी के मुताबिक, अर्पिता पूछताछ में सहयोग नहीं कर रही थी. इसलिए उनको पहले हिरासत में लिया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया. कोलकाता में बेलघरिया इलाके के एक बहुमंजिली आवासीय परिसर में उनके दो और फ्लैट का भी पता चला है. वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि कुछ महीने पहले तक अर्पिता नियमित रूप से वहां आती-जाती थी.
'इसके अलावा लाल बत्ती लगी कार में भी कुछ लोग अक्सर आते थे.' स्थानीय लोगों का कहना है, "आवासीय परिसर के गेस्ट रजिस्टर की जांच से ही पता चल जाएगा कि अर्पिता के पास कौन कौन आता था."
उसी इलाके में अर्पिता के नाम एक और मकान होने का पता चला है. उसमें अर्पिता की मां और कुछ अन्य परिजन रहते हैं. लेकिन लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या मॉडल और क्षेत्रीय फिल्मों के जरिए इतनी बड़ी रकम कमाई जा सकती है?
पिक्चर अभी बाकी है: शुभेंदु अधिकारी
ये मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं. बीजेपी तो पहले से ही आक्रामक मुद्रा में थी.
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस बरामदगी को 'टिप ऑफ आइसबर्ग' बताते हुए कहा है कि यह तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इसे 'बंगाल मॉडल' बताते हुए कहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "एसएससी घोटाले में राज्य के मंत्री की गिरफ्तारी से बंगाल की प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है. इस मामले में पार्थ के अलावा तृणमूल के कई बड़े नेता शामिल हैं."
राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रोफेसर समीरन पाल कहते हैं, "इस घोटाले की गंभीरता लगातार बढ़ रही है. अब ताजा घटनाक्रम को देखते हुए लगता है कि बंगाल की भावी राजनीति पर इसका गहरा असर होगा."
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