जगदीप धनखड़ को जानिए, जिन्हें बीजेपी ने बनाया उपराष्ट्रपति उम्मीदवार

    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनने के बाद जितनी सुर्ख़ियां बटोरीं उतनी तो शायद उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में नहीं बटोरी थी.

राज्यपाल के तौर पर शपथ लेने के बाद से ही उनका राज्य सरकार और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ विभिन्न मुद्दों पर टकराव का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो हाल में महुआ मोइत्रा के 'काली विवाद' तक जारी रहा.

यही वजह है कि शनिवार शाम जब उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम का एलान किया गया तो राजनीतिक हलकों में किसी को ज़्यादा हैरत नहीं हुई.

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "इसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है. धनखड़ जिस तरह बीजेपी के नेता के तौर पर काम कर रहे थे, उसे ध्यान में रखते हुए पार्टी के शीर्ष नेता ने उनको इनाम के तौर पर उपराष्ट्रपति का पद देने का फ़ैसला किया है."

धनखड़ ने शनिवार शाम को ही पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी. उसके बाद से ही उन्हें उपराष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं. धनखड़ ने शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट की थी.

धनखड़ ने पहले दिन से ही जिस तरह राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस के ख़िलाफ़ आक्रामक तेवर अपनाया, उसके चलते अक्सर उन पर बीजेपी नेता के तौर पर काम करने और राजभवन को बीजेपी के कार्यालय में बदलने के आरोप भी लगते रहे.

शुरुआत में तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनके रिश्ते ठीक-ठाक रहे. इस दौरान ये दोनों नेता एक-दूसरे पर सीधे हमले करने से बचते रहे. लेकिन कुछ दिनों बाद ही दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे. ममता बनर्जी ने तो कई बार सार्वजनिक तौर धनखड़ को राज्यपाल पद से हटाने की मांग भी की.

राज्य सरकार से टकराव

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच अभी 36 का आंकड़ा है. बीच में एकाध बार उनमें सुलह के आसार ज़रूर दिखे, लेकिन यह संभावना क्षणभंगुर ही रही.

अब तक शायद ही कोई दिन ऐसा गुज़रा, जब राज्यपाल ने अपने ट्वीट के ज़रिए सरकार, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कठघरे में खड़ा न किया हो. चाहे कोरोना का मुद्दा हो, राशन वितरण का, चुनाव के दौरान या चुनाव के बाद होने वाली हिंसा का या फिर अंफान तूफान के बाद राहत औऱ बचाव कार्यों का, राज्यपाल लगातार सरकार पर हमले करते रहे.

नौबत यहां तक पहुंच गई कि ममता ने एक बार धनखड़ को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया. लेकिन यह नाराज़गी स्थाई नहीं रही.

अभी अब इसी सप्ताह दार्जिलिंग में राज्यपाल ने ममता और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के साथ चाय पीते हुए एक तस्वीर ट्वीट की थी.

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेताओं ने धनखड़ के नाम के एलान पर ख़ुशी जताई है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथागत राय कहते हैं, मैं इस ख़बर से बेहद ख़ुश हूँ. धनखड़ एक लड़ाकू व्यक्ति हैं, जिनकी रीढ़ की हड्डी बहुत मजबूत है.

तृणमूल कांग्रेस ने फ़िलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, फ़िलहाल मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.

हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने सवाल किया है कि भाजपा का अल्पसंख्यक चेहरा कहाँ गया. एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि अब धनखड़ राज्यपाल नहीं रहेंगे. ऐसे में रोज़ाना बेवजह सरकार को कठघरे में खड़ा करने का सिलसिला थम जाएगा.

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है, ''धनखड़ क़ानूनी मामलों के विशेषज्ञ हैं. कई बार बढ़िया बातें करते हैं. वे भाजपा के नजदीकी हैं. इसलिए उनको उम्मीदवार बनाया गया है.''

उधर सीपीएम नेता विकास रंजन भट्टाचार्य कहते हैं, "भाजपा ने धनखड़ को उम्मीदवार बनाकर एक बेहतरीन दांव चला है. वे संविधान को समझते हैं. ऐसे में उनसे भाजपा को सहायता मिलेगी."

कौन हैं जगदीप धनखड़?

राजस्थान ज़िले के झुंझुनू ज़िले के किठाना गाँव में 18 मई, 1951 को पैदा होने वाले जगदीप धनखड़ ने बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार 30 जुलाई, 2019 को संभाला था.

धनखड़ की शुरुआती पढ़ाई (कक्षा एक से पाँच तक) गाँव के ही सरकारी स्कूल में हुई. उसके बाद, उन्होंने स्कॉलरशिप हासिल करके चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में दाख़िला लिया.

धनखड़ ने जयपुर के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की. उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से ही क़ानून (एलएलबी) की पढ़ाई की. पढ़ाई में वे हमेशा अव्वल रहे.

धनखड़ ने वर्ष 1979 में राजस्थान बार काउंसिल की सदस्यता ली. 27 मार्च, 1990 को वे सीनियर एडवोकेट बने. उसी समय से धनखड़ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस करते रहे. वे 1987 में राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी चुने गए.

धनखड़ का राजनीतिक करियर वर्ष 1989 से शुरू हुआ. उस वर्ष वे भाजपा के समर्थन से जनता दल के टिकट पर झुंझुनू से लोकसभा चुनाव लड़े और जीत कर पहली बार संसद पहुंचे. वे केंद्र में मंत्री भी रहे.

जनता दल के विभाजन के बाद वो पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के खेमे में चले गए. लेकिन जनता दल से टिकट न मिलने पर बाद में वो कांग्रेस में चले गए. उन्होंने अजमेर से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए.

उसके बाद वर्ष 2003 में वे बीजेपी में शामिल हो गए. वर्ष 1993 से 1998 के बीच वे अजमेर की किशनगढ़ विधानसभा से विधानसभा के सदस्य रहे. लोकसभा और विधानसभा के अपने कार्यकाल के दौरान वे कई अहम समितियों के सदस्य रहे.

वहीं उनकी पुत्री कामना, जयपुर के एमजीडी स्कूल और अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद अमेरिका से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.

इस बार उपराष्ट्रपति का चुनाव 6 अगस्त को होना है. नामांकन की अंतिम तारीख़ 19 जुलाई है. मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को ख़त्म हो रहा है. नए उपराष्ट्रपति 11 तारीख़ को शपथ लेंगे.

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