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ममता के शपथ ग्रहण पर गतिरोध टूटा, विधानसभा में राज्यपाल ही दिलाएंगे शपथ
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत हाल के उपचुनाव में जीतने वाले तीनों विधायकों के शपथ ग्रहण पर सोमवार से ही राजभवन और सरकार के बीच जारी गतिरोध आखिर मंगलवार शाम को टूट गया.
राज्य सरकार के पत्र के मुताबिक, राज्यपाल जगदीप धनखड़ तय तारीख यानी सात अक्तूबर को ही सुबह 11.45 बजे विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने पर सहमति दे दी है. राज्यपाल ने मंगलवार शाम को अपने ट्वीट में इसकी जानकारी दी.
पश्चिम बंगाल में बीते कई दशकों में यह पहला मौका होगा जब उपचुनाव में जीतने वाले विधायकों को राज्यपाल शपथ दिलाएंगे. अब तक यह जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष ही निभाते रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और राज्य सरकार के आपसी रिश्तों की तल्ख़ी तो जगज़ाहिर है. विधानसभा चुनावों के बाद दोनों ओर की चुप्पी से युद्ध विराम की स्थिति बनती नज़र आ रही थी.
लेकिन अब राज्यपाल ने अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से नए चुने विधायकों को शपथ दिलाने की अनुमति वापस ले ली. इससे राजभवन और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर ठन गई थी.
हालत ये हो गई थी कि अगर शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में आयोजित किया जाता तो विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री इसमें शामिल नहीं भी हो सकते थे.
ताज़ा मामला
दरअसल, इस टकराव का ताज़ा मुद्दा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तीन विधायकों के शपथ ग्रहण को लेकर था.
कोलकाता की भवानीपुर के अलावा मुर्शिदाबाद ज़िले के दो सीटों- जंगीपुर और शमशेरगंज में 30 सितंबर को मतदान हुआ था और तीन अक्तूबर को इसके नतीजे घोषित किए गए थे.
राज्यपाल चाहते थे कि ये समारोह राजभवन में आयोजित हो और मुख्यमंत्री समेत तीनों नए विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी की जगह वह (राज्यपाल) दिलाएं.
लेकिन विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी को इस पर आपत्ति थी. हालांकि राज्यपाल को क़ानूनी अधिकार होने के नाते वह इस मामले में ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते.
फिर भी विधानसभा की ओर से सोमवार शाम को राज्यपाल को भेजे गए एक पत्र में उनसे कहा गया था कि वे सात अक्तूबर को दोपहर बारह बजे से पहले विधानसभा में आकर नए विधायकों को शपथ दिला दें.
लेकिन राज्यपाल ने अपने जवाबी पत्र में कहा है कि वे उपचुनाव के नतीजे की अधिसूचना जारी होने के बाद ही इस मुद्दे पर कोई फ़ैसला करेंगे. इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा था, "ममता बनर्जी का शपथ ग्रहण सात अक्तूबर को तय है. अब फ़ैसला राज्यपाल पर निर्भर है. हम चाहते हैं कि शपथ ग्रहण समारोह विधानसभा में आयोजित किया जाए."
क्या है कानूनी स्थिति
संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत मंत्री और विधायकों को शपथ दिलाने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है. आमतौर पर राज्यपाल यह ज़िम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते रहे हैं.
कोई सदस्य तब तक शपथ नहीं ले सकता जब तक राज्यपाल ख़ुद ऐसा नहीं करते या फिर विधानसभा अध्यक्ष को यह ज़िम्मेदारी नहीं सौंप देते. पश्चिम बंगाल में कई दशकों से यही परंपरा रही है, यानी विधानसभा अध्यक्ष ही शपथ दिलाते रहे हैं.
लेकिन राज्यपाल धनखड़ ने विधानसभा अध्यक्ष से ये अधिकार वापस ले लिया है.
राजभवन के एक अधिकारी बताते हैं, "बीते महीने उपचुनाव से पहले ही राजभवन से विधानसभा सचिवालय को एक पत्र भेजा गया था. उसमें कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने का अधिकार राज्यपाल को है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को यह अधिकार दिया था. लेकिन इसे अब वापस लिया जा रहा है."
पश्चिम बंगाल में तीन सीटों पर उपचुनाव के सिलसिले में जारी अधिसूचना की मियाद मंगलवार पाँच अक्तूबर को ख़त्म होगी. उसके बाद ही नतीजों की अधिसूचना जारी की जा सकती है.
पहले भी हुए हैं टकराव
वैसे, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के आपसी रिश्ते भी सहज नहीं रहे हैं. विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिख कर राज्यपाल पर विधानसभा के कामकाज में दख़ल देने का आरोप तक लगा चुके हैं.
इससे पहले धनखड़ ने विधानसभा में अपने अभिभाषण का सीधा प्रसारण करने को कहा था. लेकिन अध्यक्ष ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि तीन अक्तूबर को उपचुनाव के नतीजों के एलान के तुरंत बाद ही सरकार ने राज्यपाल से अनुरोध किया था कि वे चार अक्तूबर को विधानसभा अध्यक्ष को शपथ ग्रहण का अधिकार सौंप दें ताकि तीनों नए विधायकों को शपथ दिलाई जा सके.
संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने सोमवार को पूरे दिन विधानसभा परिसर में चली बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था, "हमने माननीय राज्यपाल से सात अक्टूबर को दोपहर से पहले ममता बनर्जी को शपथ दिलाने के लिए राज्य विधानसभा में आएं. उम्मीद है कि सात अक्टूबर तक गज़ट अधिसूचना जारी हो जाएगी और वह विधानसभा में आकर ममता बनर्जी सहित तीनों विधायकों को शपथ दिलाएंगे."
विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी कहते हैं, "अभी यह साफ़ नहीं है कि शपथ ग्रहण का आयोजन कहां होगा. लेकिन प्रोटोकॉल के मुताबिक़ इसका आयोजन विधानसभा में किया जाना चाहिए. अगर राज्यपाल इसका आयोजन राजभवन में करने पर अड़े रहे तो मैं उसमें शामिल नहीं भी हो सकता हूं."
उधर, राजभवन से सोमवार शाम को जारी बयान में कहा गया है कि शपथ ग्रहण को लेकर सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के दफ़्तर से जो अनुरोध किया गया है वह क़ानून की ग़लत व्याख्या पर आधारित है. राज्यपाल उपचुनाव के नतीजे की अधिसूचना जारी होने के बाद अनुच्छेद 188 के तहत इस मुद्दे पर फ़ैसला करेंगे.
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी राज्यपाल के फ़ैसले का बचाव करते हुए कहते हैं, "राज्यपाल अपने संवैधानिक दायरे के भीतर रह कर ही काम कर रहे हैं. संविधान ने उनको इसका अधिकार दिया है."
इस मुद्दे पर पैदा गतिरोध के बाद अब तमाम निगाहें राजभवन के फ़ैसले पर टिकी थीं.
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