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पश्चिम बंगाल में बीजेपी विधायक का शव मिला, बीजेपी ने कहा- ममता का गुंडाराज
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर ज़िले में सोमवार सुबह बीजेपी के एक विधायक का शव बरामद होने के बाद इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति गरमा गई है.
ज़िले के हेमताबाद से विधायक देवेंद्र नाथ राय के परिजनों और प्रदेश बीजेपी नेताओं ने जहाँ इसे हत्या करार देते हुए इसकी जाँच सीबीआई से कराने की मांग की है, वहीं पुलिस ने राय की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद होने का दावा किया है.
पुलिस का कहना है कि उस सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए राय ने दो लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया है.
प्रदेश बीजेपी नेताओं के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने भी इस कथित हत्या के लिए ममता बनर्जी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी इस हत्या पर सवाल उठाते हुए सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जाँच की माँग की है.
पुलिस ने बताया कि सुबह स्थानीय लोगों ने राय का रस्सी से लटकता शव देख कर थाने में इसकी सूचना दी. उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए इसकी सीबीआई जाँच की माँग की है. उन्होंने राज्य में क़ानून औऱ व्यवस्था की स्थिति के लिए सरकार की भी खिंचाई की है.
राय की पत्नी चंद्रिमा राय ने अपने पति की हत्या का आरोप लगाया है. उनका कहना है, "मेरे पति की हत्या कर उनका शव फंदे पर लटका दिया गया है. हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए."
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा हत्या है ये
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर इसे हत्या करार दिया. नड्डा ने अपने ट्वीट में कहा है, "पश्चिम बंगाल के हेमताबाद से बीजेपी विधायक देवेंद्र नाथ राय की संदिग्ध जघन्य हत्या बेहद हैरान करने वाली और खेदजनक है. यह ममता सरकार के गुंडाराज और फेल क़ानून व्यवस्था को बताता है. लोग ऐसी सरकार को भविष्य में माफ़ नहीं करेंगे. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं."
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने अपने ट्वीट में लिखा, "ममता बनर्जी की राजनीतिक हिंसा और प्रतिशोध के ख़त्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. उत्तर दिनाजपुर के हेमताबाद से विधायक देवेंद्र नाथ राय की मौत से हत्या के आरोप समेत कई गंभीर सवाल उठते हैं. सच्चाई को उजागर करने और राजनीतिक हिंसा को ख़त्म करने के लिए पूरी तरह निष्पक्ष जाँच की ज़रूरत है."
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता कन्हैया लाल अग्रवाल ने सिन्हा के आरोपों को निराधार बताते हुए इस हत्या की जाँच की माँग उठाई है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. अग्रवाल कहते हैं, "राय पहले सीपीएम में थे. उसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए. हमारी पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं था. सुबह हमें उनकी मौत की सूचना मिली. पुलिस मामले की जाँच कर रही है. इससे सच्चाई सामने आ जाएगी."
बीजेपी विधायक की मौत पर गरमाती राजनीति के बीच पुलिस ने राय की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद होने का दावा किया है. पुलिस ने एक ट्वीट में कहा, "सोमवार सुबह हेमताबाद के विधायक देवेंद्रनाथ राय का शव बरामद किया गया. उनकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला है. उसनमें उन्होंने अपनी मौत के लिए दो लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया है."
ममता राज पर आरोप
देवेंद्र नाथ राय ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में सीपीएम के टिकट पर हेमताबाद सीट जीती थी. लेकिन वर्ष 2019 में वे बीजेपी में शामिल हो गए थे. इससे पहले वे लगातार तीन बार इलाक़े में पंचायत प्रमुख भी रहे थे.
वैसे, अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ तेज़ होने लगी हैं. बीते महीने पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में एक नेता पवन जाना की हत्या कर दी गई थी. इससे पहले बीते साल अक्तूबर में मुर्शिदाबाद ज़िले में आरएसएस के एक कार्यकर्ता की सपरिवार हत्या ने देश-विदेश में सुर्ख़ियाँ बटोरी थीं.
इसके अलावा कभी कोरोना तो कभी अंफान राहत के नाम पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच हिंसक झड़पें होती रही हैं. बीते साल अक्तूबर में नड्डा ने दावा किया था कि अक्तूबर, 2018 से अक्तूबर, 2019 के बीच 12 महीनों के दौरान पार्टी के 23 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है.
गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी वर्चुअल रैली के दौरान ममता बनर्जी सरकार को इस मुद्दे पर कठघरे में खड़ा किया था. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष दावा करते हैं, "अब तक पार्टी के 104 लोगों की हत्या हो चुकी है. ममता बनर्जी के सत्ता में रहने तक राजनीतिक हिंसा पर अंकुश लगाना संभव नहीं है."
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