कोरोना: मैं निर्वाचित जनप्रतिनिधि हूं और आप मनोनीत हैं- ममता बनर्जी

    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कोरोना के मुद्दे पर बीते कई दिनों से जारी जंग गुरुवार रात चरम पर पहुंच गई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शाम को सात पेज के एक कड़े पत्र में राज्यपाल पर जमकर हमला बोला है.

इससे पहले राज्यपाल लगातार ट्वीट के ज़रिए ममता बनर्जी, उनके मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों पर हमले कर रहे थे.

सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि राज्यपाल को राजभवन में लॉकडाउन की सलाह दी थी. लेकिन ममता ने अब तक राज्यपाल पर कोई जवाबी टिप्पणी नहीं की थी. गुरुवार को उनका धैर्य जवाब दे गया.

वैसे तो बीते साल कार्यभार संभालने के बाद ही राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है. लेकिन इससे पहले कभी आपसी कटुता इतने चरम पर नहीं पहुंची थी.

ममता ने राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि वे यह बात याद रखें कि "मैं निर्वाचित जनप्रतिनिधि हूं और आप मनोनीत हैं. आप जिस राज्य के राज्यपाल हैं वहीं की सरकार, उसके मंत्रियों और अधिकारियों पर लगातार हमले कर रहे हैं जो असंवैधानिक है. आपको आत्ममंथन करना चाहिए."

राज्यपाल ने कहा है ममता के पत्र का प्रारंभिक जवाब भेज दिया गया है. अपने एक ट्वीट में उन्होंने ममता के पत्र को संवैधानिक रूप से कमज़ोर और तथ्यों की ग़लती से भरपूर बताया है.

मुख्यमंत्री ने लिखा है कि आप सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों पर लगातार हमले कर रहे हैं. यह संविधान के अनुरूप नहीं है.

उन्होंने लिखा है, "आपके आचरण को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने पत्र को सार्वजनिक करने का फ़ैसला किया है ताकि आम लोग इसका विचार करें."

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से कहा है कि वे उनकी और मंत्रिमंडल की सलाह की अनदेखी कर सकते हैं. लेकिन सरकार के कामकाज में हस्तेक्षप क्यों कर रहे हैं.

ममता ने लिखा है, "आप मुझ पर सीधे हमले कर रहे हैं. आपके शब्दों का चयन और आपकी भाव-भंगिमा असंसदीय है. आप पहले दिन से ही मेरी सलाह की अनदेखी करते रहे हैं. इसलिए मैं मजबूर होकर यह पत्र सार्वजनिक कर रही हूं."

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल पर संवैधानिक धर्म का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है.

ममता ने इससे पहले बुधवार को राज्यपाल के हमलों के जवाब में कहा था, "राज्यपाल के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही बेहतर है. वे उंचे क़द के व्यक्ति हैं और हम छोटे लोग हैं. उनसे हमारा मुक़ाबला नहीं हो सकता."

सरकार पर जारी हमलों की ताज़ा कड़ी में गुरुवार सुबह राज्यपाल ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि वे कोरोना को लेकर प्रदेश दौरे पर आई केंद्रीय टीम के राह में आने वाली रुकावटों से चिंतित हैं.

बंगाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम के लिए रेड कार्पेट बिछाने को लेकर भी धनखड़ ने सरकार पर हमला बोला था.

उन्होंने कहा था कि सरकार बताए कि डब्ल्यूएचओ टीम के दौरे से क्या फ़ायदा हुआ है. अब समय आ गया है कि संविधान को संभाला जाए.

इससे पहले उन्होंने कहा था कि राज्य और केंद्र सरकार में टकराव की स्थिति साफ़ है. राज्य सरकार ग़रीबों को राशन नहीं दे रही है. वह सिर्फ़ प्रचार में जुटी है और कोरोना से लड़ाई ड्रामेबाज़ी के ज़रिए जीती नहीं जा सकती है.

राज्यपाल ने कहा था कि कोरोना वायरस से उपजी परिस्थिति तीसरे विश्व युद्ध की तरह हैं. लेकिन राज्य सरकार इसे लेकर भी गंभीर नहीं है. वह केंद्र के साथ मिलकर काम करने की जगह अपने अहम की संतुष्टि पर ज़्यादा ध्यान दे रही है.

राज्यपाल का कहना था कि केंद्र सरकार के कामकाज से बंगाल के आम लोग संतुष्ट हैं. लेकिन लोग राज्य सरकार के कामकाज से ख़ुश नहीं हैं. राज्य की जनता केंद्र सरकार के साथ है.

धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार पर कोरोना मामले में आंकड़े छिपाने का भी गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि ममता सरकार कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में सकारात्मक रवैया नहीं अपना रही है.

राज्यपाल ने अपने एक ट्वीट में ममता बनर्जी को याद दिलाया था कि यह समय कोविड का फैलाव रोकने के लिए एक्शन लेने का है ना कि रिएक्शन यानी प्रतिक्रिया देने का.

इसके पहले भी राज्यपाल ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है.

उन्होंने कहा था कि पुलिस और प्रशासन के जो अधिकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं उनको बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए. राज्यपाल ने राज्य में लॉकडाउन लागू कराने के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तैनात करने की ज़रूरत पर विचार करने की भी सलाह दी थी.

धनखड़ ने आंबेडकर जयंती पर पर भी ममता पर निशाना साधा था. उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संविधान का पालन करना चाहिए.

साथ ही उन्होंने कहा था कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख यानी राज्यपाल के साथ उन्होंने जो लॉकडाउन कर रखा है उसे ख़त्म करना चाहिए. राज्यपाल सरकार पर ऐसे संकट की घड़ी में भी राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप लगा चुके हैं.

राज्यपाल का कहना था कि, "यह समय राजनीति का नहीं है लेकिन वह (ममता) राजनीति कर रही हैं. राज्य में लॉकडाउन का पालन नहीं हो रहा है. धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं."

राज्यपाल ने केंद्र सरकार की मदद किसानों तक न पहुंचने और राशन में घोटाला किए जाने का भी आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा था कि राज्य में 70 लाख किसान हैं. किसान सम्मान निधि योजना के तहत इन किसानों को आर्थिक मदद मिल जाती, लेकिन ममता सरकार ने केंद्र को जानकारी नहीं दी जिससे राज्य के ग़रीब किसान मदद से वंचित रह गए.

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