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पश्चिम बंगाल में रामनवमी जुलूस में हिंसा: तीन मरे और डीसीपी का हाथ उड़ा
- Author, प्रभाकर एम.
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
रविवार और सोमवार को रामनवमी पर जुलूस के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत और कम से कम एक दर्जन लोगों के ज़ख़्मी होने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने ऐसे जुलूसों पर पूरी तरह से पाबंदी लगी दी है.
जिन इलाक़ों में जुलूस के दौरान हिंसा और आगजनी हुई थी वहां मंगलवार को भी भारी तनाव बना रहा. हिंसा के दौरान उत्तर 24-परगना ज़िले के कांकिनाड़ा में देश के पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना आज़ाद की एक मूर्ति भी तोड़ दी गई.
सरकार ने ऐहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाक़ों में सुरक्षा बढ़ा दी है. इस बीच इन जुलूसों में हथियार लेकर शामिल होने के मुद्दे पर सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच तलवारें खिंच आई हैं.
पुलिस ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और पार्टी की महिला मोर्चा अध्यक्ष लॉकेट चटर्जी के ख़िलाफ़ हथियार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है.
घोष जहां मेदिनीपुर की एक रैली में गदा लेकर शामिल हुए वहीं लॉकेट बीरभूम ज़िले में त्रिशूल लेकर रैली में शामिल हुई थीं.
हिंदुओं को एकजुट कर रही है बीजेपी
भाजपा ने इन जुलूसों को जहां हिंदुओं को एकजुट करने की दिशा में पहला क़दम करार दिया है वहीं तृणमूल कांग्रेस ने उसके ख़िलाफ़ धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया है.
तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार रामनवमी के मौक़े पर इतनी बड़ी तादाद में जुलूसों का आयोजन किया था. पार्टी ने इन जुलूसों को राज्य के विभिन्न तबके के लोगों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाने की दिशा में पहल बताया है.
लेकिन भाजपा की दलील है कि अब बंगाल सरकार ने आख़िर राज्य की हिंदू आबादी के महत्व को स्वीकार कर लिया है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, 'पार्टी की इन रैलियों को मिलने वाले समर्थन से तृणमूल कांग्रेस डर गई है.'
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि रामनवमी के बहाने निकलने वाले इन जुलूसों के दौरान तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी ताक़त दिखाने का प्रयास किया है. राज्य में अगले दो-तीन महीनों के दौरान होने वाले पंचायत चुनावों से पहले दोनों दलों ने इस मौक़े को अपनी-अपने तरीक़े से भुनाने का प्रयास किया है.
शक्ति प्रदर्शन
शक्ति प्रदर्शन के सिलसिले में हुई हिंसा के दौरान पुरुलिया और मुर्शिदाबाद ज़िलों में तीन लोगों की मौत हो गई है. बर्दवान ज़िले के आसनसोल और रानीगंज इलाक़े में जमकर आगजनी हुई और बम हमले में पुलिस उपायुक्त अरिंदम दत्त चौधरी का दाहिना हाथ उड़ गया.
पुलिस ने इस मामले में 18 लोगों को गिरफ़्तार किया है. मुर्शिदाबाद ज़िले के कांदी में तो तलवारों और त्रिशुलों के साथ रैली में शामिल लोगों ने स्थानीय थाने के भीतर घुसने का प्रयास किया. इस दौरान पुलिस से उनकी हिंसक झड़प हो गई.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते सप्ताह ही कहा था कि कुछ पुराने संगठनों के अलावा किसी को हथियार लेकर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी. लेकिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि उनको ऐसी किसी पाबंदी की जानकारी नहीं है.
उनका कहना है कि रामनवमी के दिन अस्त्र पूजा हिंदुओं की बहुत पुरानी परंपरा है. घोष सवाल करते हैं, 'सरकार ने आख़िर हथियार जुलूस पर पाबंदी क्यों लगाई है? ऐसा कोई सर्कुलर जारी क्यों नहीं किया गया?'
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुज शर्मा बताते हैं, 'पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद कई स्थानों पर हथियारों के साथ जुलूस निकाले गए. ऐसे आयोजकों के ख़िलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.'
तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुरुलिया में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित जुलूसों में हथियारों के साथ बच्चों ने भी शिरकत की थी. लेकिन विहिप अध्यक्ष सचिंद्रनाथ सिंह ने इन आरोपों का खंडन किया है.
राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग की अध्यक्ष अनन्या चटर्जी चक्रवर्ती कहती हैं, 'आयोग को इसकी सूचना मिली है. वह बच्चों के हथियार लेकर रामनवमी जुलूस में शामिल होने के मुद्दे पर ज़रूरी कार्रवाई करेगा. पुलिस से इस बारे में रिपोर्ट मांगी गई है.'
आलोचना
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रामनवमी के मौक़े पर हथियारों के साथ जुलूस निकालने के लिए भगवा संगठनों की जमकर आलोचना की है. उनका सवाल है कि क्या भगवान राम ने अपने अनुयायियों से पिस्तौल और तलवारों के साथ जुलूस निकालने को कहा था?
वो कहती हैं, 'कुछ गुंडे राम का नाम बदनाम कर रहे हैं. लेकिन धर्म के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जा सकती.' उन्होंने पुलिस महानिदेशक सुरजीत कर पुरकायस्थ को हथियारों के साथ जुलूस निकालने वालों और उपद्रव फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि पुलिस वाले अगर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क़दम नहीं उठाते तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी. ममता की फटकार के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई और भाजपा नेताओं समेत कई लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए हैं.
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