द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में जमकर हुई क्रॉस वोटिंग, विपक्ष से किस-किसने दिए वोट? - प्रेस रिव्यू

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गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी अंतर से हरा दिया. मुर्मू को 64.03 फ़ीसद और यशवंत सिन्हा को 35.97 फ़ीसद वोट मिले.
मुर्मू की उम्मीदवारी का 44 छोटी-बड़ी पार्टियों ने समर्थन किया था. मगर चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी हुई. यानी विपक्ष के कई सांसदों और विधायकों ने भी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया.
बीजेपी के पदाधिकारियों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने लिखा है कि, एनडीए के सहयोगियों और समर्थक दलों के अलावा मुर्मू को 17 सांसदों और 126 विधायकों का समर्थन मिला.
सबसे अधिक क्रॉस वोटिंग असम में हुई है. असम में 22 क्रॉस वोट पड़े और इसके मध्य प्रदेश में 19 क्रॉस वोट डाले गए.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक़, "द्रौपदी मुर्मू को 126 सदस्यीय असम विधानसभा से 104 वोट मिले. असम विधानसभा में एनडीए के 79 सदस्य हैं. मतदान के दौरान विधानसभा के 2 सदस्य अनुपस्थित भी थे. ऐसे में द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में आने और इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने के लिए सभी को मेरा धन्यवाद."
देश के 15वें राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को मतदान हुए थे. इसके बाद 21 जुलाई को सुबह 11 बजे मतों की गिनती शुरू हुई और पहले राउंड से ही मुर्मू ने बढ़त बनाए रखी थी. रात आठ बजने तक नतीजे भी सामने आ गए जिसमें मुर्मू विजयी रहीं. राज्यसभा के महासचिव पीसी मूडी ने मुर्मू के नाम की घोषणा की.
इंडियन एक्सप्रेस ने भी अपनी एक ख़बर में क्रॉस वोटिंग को 'विपक्ष की एकता की कमी' के तौर पर दिखाया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में वोटों की गिनती समाप्त होने के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की शानदार जीत में क्रॉस वोटर्स की भूमिका भी है.
अख़बार लिखता है कि यह नतीजे देश की पहली महिला आदिवासी के राष्ट्रपति बनने की कहानी तो है ही लेकिन साथ ही यह विपक्ष के आपसी मतभेद और अलगाव को भी दिखाता है.

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अविवाहित महिला को भी गर्भपात का अधिकार- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक आदेश में कहा कि किसी महिला को गर्भपात से सिर्फ़ इसलिए नहीं रोका जा सकता है कि वो विवाहित नहीं, अविवाहित है.
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 25 साल की अविवाहित महिला के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फ़ैसले को पलटते हुए गर्भापत की अनुमति दे दी है.
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को अपने एक फ़ैसले में 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एम्स निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया ताकि गर्भपात में महिला के जीवन को ख़तरा ना हो. पीठ ने कहा कि महिला को सिर्फ़ इसलिए गर्भावस्था को समाप्त करने के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वह शादीशुदा नहीं है.
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया था, जिसमें उसने अपने 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात करने की अनुमति का अनुरोध अस्वीकार कर दिया था.

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सिंगापुर यात्रा की मंज़ूरी के लिए विदेश मंत्रालय का रुख़ करेंगे केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए सिंगापुर जाना चाहते हैं लेकिन गुरुवार को दिल्ली के उप-राज्यपाल ने उन्हें यात्रा के लिए मंजूरी देने से मना कर दिया.
जनसत्ता अख़बार की ख़बर के अनुसार, उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने इस यात्रा के लिए केजरीवाल को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है. अब इस मामले में मनीष सिसोदिया ने कहा है कि इस यात्रा की मंज़ूरी के लिए दिल्ली सरकार अब सीधे विदेश मंत्रालय का रुख करेगी.
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने उप-राज्यपाल के निर्णय को सही ठहराया है.

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सड़क हादसों में अभी तक 8 कांवड़ियों की मौत
हरिद्वार दिल्ली हाइवे पर कनखाल पुलिस थाने के अंतर्गत एक सड़क हादसे में दो कांवड़ियों की मौत हो गई है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, ये दोनों ही कांवड़िये 20 साल की उम्र के रहे होंगे. ये दोनों मोटर साइकिल पर सवार थे और इन दोनों की मोटरसाइकिल आफस में भिड़ गई, जिससे दोनों कांवड़ियों बुरी तरह घायल हो गए और बाद में दोनों की मौत हो गई.
इस साल शुरू हुई कांवड़ यात्रा में अभी तक कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है.
कनखाल पुलिस स्टेशन के सिनीयर सब-इंस्पेक्टर अभिनव शर्मा ने बताया, "हालांकि इस दुर्घटना के संबंध में अभी तक कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है. हालांकि मामले की जांच की जा रही है."
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