वकील मलिक मुसलमान हैं पर शिव भक्ति में कांवड़ यात्रा पर भी जाते हैं

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- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
"मैं नमाज़ पढ़ता हूँ, लेकिन शिव भक्त भी हूँ. पाँच बार हरिद्वार कांवड़ यात्रा पर गया हूँ. इस बार छठी बार कांवड़ यात्रा पर जाने की इच्छा है. मुझे कुछ शरारतियों से डर है कि कहीं मेरे परिवार और बच्चों पर कोई परेशानी न आ जाए. इसलिए डीएम शामली को पत्र सौंपकर सुरक्षा की मांग की है."
ये बातें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शामली ज़िले के गाँव भैंसवाल निवासी वकील मलिक ने कही.
वकील मलिक इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं क्योंकि वे मुसलमान होने के बावजूद शिव भक्त होने का भी दावा करते हैं.
वह पाँच बार कांवड़ यात्रा कर चुके हैं और इस बार फिर से 22 जुलाई को कांवड़ लाने हरिद्वार जा रहे हैं.
हालांकि, इस बार उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए शामली की ज़िलाधिकारी को एक पत्र सौंपा है. उसमें उन्होंने शरारतियों के डर से आशंका जताते हुए डीएम से अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है.
शामली एसडीएम विशु राजा ने बीबीसी हिंदी को बताया, "वकील नाम का एक व्यक्ति सुरक्षा को लेकर डीएम मैडम से मिला था. वह पाँच साल से कांवड़ लाता है. उसे कांवड़ यात्रा में कोई परेशानी न हो या फिर गाँव में उसके परिवार को कोई परेशानी न हो, इस बारे उसने एक पत्र सौंपा है.''
उन्होंने आगे कहा, ''हमारी तरफ़ से वकील की सुरक्षा को लेकर बातचीत हुई है. वैसे गाँव में तो किसी को भी वकील की इस कांवड़ यात्रा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यात्रा के दौरान भी वह सुरक्षित रहे, इसे लेकर अधीनस्थों को निर्देश दिया गया है."

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नमाज़ और शिव भक्ति साथ-साथ, क्या कहते हैं वकील?
वकील मलिक पेशे से मज़दूर हैं. वे पाँच बार हरिद्वार से जल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया है.
मलिक बीबीसी से कहते हैं, "ये छठी कांवड है जो मैं लेकर आऊंगा, अकेला जाता हूँ और अकेला ही वापस आता हूँ. घर से हरिद्वार तक 22 जुलाई को सवारी से निकलूंगा और 23 तारीख़ को हरिद्वार से पैदल बागपत रोड, मेरठ में पूरा महादेव पहुँचकर शिव का जलाभिषेक करूंगा. इसके बाद यहाँ से सवारी से घर वापस आऊंगा."
वे आगे कहते हैं, "लॉकडाउन से पहले पाँच कांवड़ लेकर आ चुका हूँ लेकिन बीच में दो साल लॉकडाउन रहा तो कांवड़ लाना संभव नहीं था."

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डीएम को प्रार्थना पत्र के सवाल पर कहा, "मेरे कांवड़ लाने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है. पाँच साल हो गए कांवड़ लाते हुए, लेकिन आज तक किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन अब मुझे इस बात की आशंका है कि अगर कोई शरारती तत्व मेरे परिवार के लिए परेशानी खड़ा कर दे तो क्या होगा, इसलिए डीएम से परिवार की सुरक्षा की मांग की है."
वे आगे कहते हैं, "मेरे कांवड़ लाने को लेकर न तो मेरी पत्नी की तरफ़ से कोई आपत्ति है और न ही मेरे गांव में किसी को आपत्ति है. ये तो अपनी भक्ति का सवाल है. जब टाइम मिलता है मैं नमाज़ भी पढ़ता हूँ और साल में एक बार हरिद्वार से जल लाकर पूरा महादेव पर जलाभिषेक भी करता हूँ."
"मन्नतें जब पूरी हुईं तो जगीआस्था"
वकील मलिक में शिव भक्ति कहाँ से जगी, इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं, "मैं कुछ परेशानियों में था. अचानक मुझे लगा कि हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पर जाना चाहिए. इसके बाद मैं निकल गया और जलाभिषेक कर वापस लौटा तो मेरी परेशानियां काफ़ी हल हो चुकी थीं. अब मैं हर साल कांवड़ यात्रा पर जाता हूँ."

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वकील की आस्था पर क्या है लोगों की राय?
वकील के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा चार बेटियां और एक बेटा हैं. सबसे बड़ी बेटी की उम्र क़रीब 16 साल है, जो कक्षा सात की छात्रा हैं. उनके परिवार में वकील के चार भाई हैं. दो भाई बाहर रहते हैं जबकि वकील और एक अन्य भाई गाँव में ही रहते हैं.
बीबीसी हिंदी ने वकील मलिक के फ़ोन पर उनकी पत्नी से बातचीत की. हालांकि, वे ज़्यादा नहीं बोलीं, लेकिन उन्होंने कहा, "हाँ, ये कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं. ये जाते हैं तो जाने दो. कोई कुछ भी कहता है तो उसे कहने दो."
स्थानीय पत्रकार अनवर अंसारी कहते हैं, ''वकील पिछले कई सालों से कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं. उनको लेकर यहाँ ख़ूब चर्चा होती है. हालांकि, उनके समाज के लोग इस बारे में बातें तो करते हैं, लेकिन कभी किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया."
गाँव के ही एक अन्य व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "देखिए वह ग़लत संगत में है. उसका उठना-बैठना भी ऐसे ही लोगों में है. उसकी मर्ज़ी वह जो चाहे करे, हमें उससे मतलब नहीं है."
वकील के बड़े भाई जमील मलिक का घर उनसे कुछ ही दूरी पर है. वकील के कांवड़ लाने को लेकर पूछे गए सवाल पर वे कहते हैं, "देखिए जी हमारी तो उससे बोलचाल बंद है. हम मतलब-वास्ता नहीं रखते हैं उससे. हमारी माँ भी हमारे ही साथ रहती है जबकि बाबा की मृत्यु तभी हो गया था, जब वकील छोटा था. एक बार बँटवारे को लेकर वकील से हमारी बात चली, तो उसने हम पर ये इल्ज़ाम लगा दिया कि हम लोग उसको कांवड़ लाने से रोक रहे हैं."

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इस बार भंडारा कराने की इच्छा है वकील की
शामली ज़िले का उनका गाँव भैंसवाल मिश्रित आबादी वाला एक गांव है. गांव में हिंदू, मुस्लिम, जाट, दलित और कई अन्य बिरादरी के लोग रहते हैं. ग्राम प्रधान प्रह्लाद के मुताबिक़ उनके गाँव में लगभग 7,600 मतदाता हैं, जिनमें 500 वोट मुसलमानों के हैं.
वकील के बारे में ग्राम प्रधान कहते हैं, "आज ही तो वकील मेरे पास आया था. बोल रहा था कि प्रधान जी आपकी मदद चाहिए. मैं कांवड़ यात्रा से वापस आकर भंडारा कराना चाहता हूं. मैंने उसको हर संभव मदद का भरोसा दिया है."
एक सवाल के जवाब में ग्राम प्रधान प्रह्लाद कहते हैं, "वकील अपना मोहम्मडन भाई है. वह कई सालों से कांवड़ ला रहा है. हालांकि उसकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है, लेकिन उसके भंडारा कराने के अनुरोध को हम अनदेखा नहीं करेंगे और उसकी हरसंभव मदद करेंगे."
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