संसद में असंसदीय शब्दों की सूची पर क्यों मचा है हंगामा?

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

तानाशाह, जुमलाजीवी, जयचंद, अंट-शंट, करप्ट, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना, निकम्मा जैसे आम बोलचाल में कहे जाने वाले शब्द अब संसद की कार्यवाही के दौरान अमर्यादित माने जाएंगे.

संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसके 12 अगस्त तक चलने की संभावना है. इससे पहले लोकसभा सचिवालय ने हिंदी और अंग्रेज़ी के ऐसे शब्दों-वाक्यों की सूची जारी की है, जिनका सदन में इस्तेमाल असंसदीय माना जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जिन शब्दों को असंसदीय भाषा की श्रेणी में रखा गया है उनमें शकुनि, तानाशाह, तानाशाही, जयचंद, विनाश पुरुष, ख़ालिस्तानी और ख़ून से खेती शामिल हैं.

यानी अगर इन शब्दों का इस्तेमाल संसद में किया गया तो उसे सदन के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा.

विपक्षी पार्टी के नेताओं ने हमलावर रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि सूची में वो सारे शब्द हैं, जिसका इस्तेमाल सदन में सरकार के लिए विपक्ष करता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सूची में जो नए शब्द इस बार जोड़े गए हैं वो सभी शब्द 2021 में संसद के दोनों सदनों , अलग अलग विधानसभाओं और कॉमनवेल्थ देशों की संसद में इस्तेमाल किए गए हैं.

किन शब्दों पर लगी रोक?

जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, बहरी सरकार, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, उचक्के, अहंकार, कांव-कांव करना, काला दिन, गुंडागर्दी, गुलछर्रा, गुल खिलाना, गुंडों की सरकार, दोहरा चरित्र, चोर-चोर मौसेरे भाई, चौकड़ी, तड़ीपार, तलवे चाटना, तानाशाह, दादागिरी, दंगा सहित कई अंग्रेज़ी के शब्दों का इस्तेमाल भी अब लोकसभा या राज्यसभा में बहस के दौरान कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाएगा.

अंग्रेज़ी शब्दों की फ़ेहरिस्त में अब्यूज़्ड, ब्रिट्रेड, करप्ट, ड्रामा, हिपोक्रेसी और इनकॉम्पिटेंट, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट शामिल हैं.

इसके अलावा अध्यक्ष पर आक्षेप को लेकर इस्तेमाल किए गए कई वाक्यों को भी असंसदीय अभियव्यक्ति की श्रेणी में रखा गया है, मसलन- आप मेरा समय खराब कर रहे हैं, आप हम लोगों का गला घोंट दीजिए, चेयर को कमज़ोर कर दिया गया है, मैं आप सब से यह कहना चाहती हूं कि आप किसके आगे बीन बजा रहे हैं?

लोकसभा अध्यक्ष

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इमेज कैप्शन, संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फ़ाइल फ़ोटो)
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सदन में ये नहीं बोल पाएंगे सांसद

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  • जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, बहरी सरकार,
  • उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, उचक्के, अहंकार,
  • कांव-कांव करना, काला दिन, गुंडागर्दी, गुलछर्रा,
  • गुल खिलाना, गुंडों की सरकार, दोहरा चरित्र,
  • चोर-चोर मौसेरे भाई, चौकड़ी, तड़ीपार,
  • तलवे चाटना, तानाशाह, दादागिरी
  • अंट-शंट, अनपढ़, अनर्गल, अनार्किस्ट, उचक्के
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राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा के शब्द भी शामिल

सूची में राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही से हटाए गए जिन शब्दों और वाक्यों को शामिल किया गया है उनमें अंट-शंट, अनपढ़, अनर्गल, अनार्किस्ट, उचक्के, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, औकात, कांव-कांव करना, गिरगिट, गुलछर्रा, घड़ियाली आंसू, घास छीलना, चोर-चोर मौसेरे भाई, ठग, ठगना, ढिंढोरा पीटना, तड़ीपार, तलवे चाटना, धोखाधड़ी, नाटक आदि शामिल हैं.

विपक्ष ने साधा निशाना

नई सूची पर विपक्षी पार्टी के नेताओं ने भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं.

राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नई सूची पर लिखा है, "मोदी सरकार की सच्चाई दिखाने के लिए विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी शब्द अब असंसदीय माने जाएंगे. अब आगे क्या विषगुरु?"

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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया है, "लोकसभा और राज्यसभा के लिए असंसदीय शब्दों की सूची में 'संघी' शामिल नहीं है. दरअसल, सरकार ने हर उस शब्द को बैन कर दिया है जिसके ज़रिए विपक्ष ये बताता है कि बीजेपी कैसे भारत को बर्बाद कर रही है."

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प्रियंका गांधी

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लिखा है, "सरकार की मांशा है कि जब वो भ्रष्टाचार करे, तो उसे भ्रष्ट नहीं; भ्रष्टाचार को मास्टरस्ट्रोक बोला जाए. 2 करोड़ रोज़गार, किसानों की आय दुगनी, जैसे जुमले फेंके, जो उसे जुमलाजीवी नहीं; थैंक यू बोला जाएगा. संसद में देश के अन्नदाताओं के लिए आंदोलनजीवी शब्द किसने प्रयोग किया था?"

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इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने नई सूची को लेकर अख़बार में छपी एक ख़बर का क्लिप शेयर करते हुए लिखा है, "अब आम बोलचाल में बोले जाने वाले शब्द हमारी संसदीय बहस में असंसदीय हैं. कुछ प्रतिबंधित शब्द वाक़ई हंसी के लायक हैं. बहुत कुछ और है करने को लेकिन..."

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राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने ट्वीट किया है, "ये जानकर अच्छा लगा कि सरकार उन विशेषणों से अवगत है जो उसके कामकाज का सटीक और सही वर्णन करते हैं."

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"हर साल जारी होती है सूची"

असंसदीय शब्दों की सूची पर लोकसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बीबीसी हिंदी से बातचीत के दौरान इस बात की पुष्टि की है कि जो शब्द मीडिया की ख़बरों में बताए जा रहे हैं, वो वाकई प्रतिबंधित हुए हैं और यही सचिवालय की ओर से जारी ताज़ा सूची है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "लोकसभा या राज्यसभा के अध्यक्ष ने कभी न कभी इन शब्दों को असंसदीय बताया होगा. ये सूची हम ख़ुद से तैयार नहीं करते. ये अध्यक्ष का फ़ैसला होता है और उन्हीं के हिसाब से सूची बनती है."

उन्होंने बताया, "ये सूची लोकसभा-राज्यसभा के साथ ही विधानसभा की कार्यवाहियों के दौरान अमर्यादित घोषित किए गए शब्दों को मिलाकर बनती है. ये ताज़ा सूची 2021 की है. हम हर साल ये सूची अपडेट करते हैं. जब 2022 साल बीत जाएगा तब 2023 में नई सूची निकलेगी."

अधिकारी ने बताया, "सामान्य तौर पर जनवरी-फ़रवरी से इस सूची को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती है. ये सूची लोकसभा के अधिकारी निकालते हैं लेकिन ये राज्यसभा के लिए भी लागू होती है. लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष जिन शब्दों को असंसदीय बता चुके होते हैं, हम उनकी एक सूची तैयार कर लेते हैं. हो सकता है कि किसी संदर्भ में कोई शब्द सही लग रहा हो लेकिन संदर्भ को देखते हुए ही कोई शब्द असंसदीय घोषित किया जाता है."

एक साल में कितने शब्द जुड़ते हैं इस सवाल पर अधिकारी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि इस बार 15-20 नए शब्द जुड़े होंगे. जो शब्द वास्तव में सदन के अंदर इस्तेमाल किए गए हैं, उन्हें इस सूची में शामिल किया गया है.

उन्होंने बताया कि असंसदीय घोषित होने के बावजूद भी अगर कोई सदस्य इन शब्दों का बहस के दौरान इस्तेमाल करता है तो इन शब्दों को रिकॉर्ड से बाहर कर दिया जाएगा.

कॉपी - प्रियंका झा

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