जज ने ऐसा क्या कहा कि आनन फानन में गिरफ़्तार हुआ पुलिस का आला अधिकारी

कर्नाटक हाई कोर्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

कर्नाटक हाई कोर्ट के एक जज ने जब ये धमकी दी कि चाहे उनके जज का पद ही क्यों न चला जाए, वो 'बिल्ली के गले में फंदा' लगा कर रहेंगे तो एक वरिष्ठ नौकरशाह और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक के एक अधिकारी को गिरफ़्तार करने में पुलिस को महज़ कुछ ही घंटे लगे.

दो दिन पहले जस्टिस एचपी संदेश ने एक खुली अदालत में भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो के वकील को जब खरी खरी सुनाई तो आमजनों और ईमानदार नौकरशाहों बीच इसे ज़ोरदार समर्थन मिला, साथ ही इसने अन्य नौकरशाह भी अलर्ट मोड में आ गए.

कर्नाटक हाई कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी जज ने 'चाहे जो हो जाए' जैसा बयान दिया है.

जस्टिस संदेश ने खुली अदालत में कहा, "आपका एडीजीपी निश्चित तौर पर ताक़तवर दिखता है. किसी ने हाई कोर्ट के एक जज से बात की थी जिन्होंने मुझसे किसी और जज के ट्रांसफर का उदाहरण दिया था. इस जानकारी को देने वाले जज का नाम लेने में मैं संकोच नहीं करूंगा. इस कोर्ट में ट्रांसफर का ख़तरा मंडरा रहा है. मैं अपने जज के ओहदे की कीमत पर न्यायपालिका की आज़ादी की रक्षा करूंगा."

सोमवार को दिए गए इस फ़ैसले का सीधा प्रसारण कोर्ट के यूट्यूब चैनल पर किया गया.

उनकी टिप्पणी उस अभियुक्त की दायर आपराधिक याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसे कथित तौर पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने डिप्टी कमिश्नर बेंगलुरु शहर (जिसे अन्य राज्यों में कलेक्टर कहा जाता है) की ओर से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ़्तार किया था. इस मामले की पहले की सुनवाई के दौरान जज ने पूछा था कि एफआईआर में डिप्टी कमिश्नर का नाम क्यों नहीं लिया गया.

कोर्ट का फ़ैसला

इमेज स्रोत, iStock

नौकरशाही की खिंचाई

कोर्ट ने अपने पहले की सुनवाई में एसीबी के कामकाज की आलोचना की थी. जज एसीबी की ओर से दायर डेटा जैसे कि 'बी' रिपोर्ट और चार्जशीट फाइल करने में हुई देरी को लेकर नाराज़ थे. एसीबी के वरिष्ठ वकील के एक जवाब में जस्टिस संदेश ने कहा कि कोर्ट ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एसीबी के कामकाज के तरीके पर भी जा सकती है.

जज संदेश

इमेज स्रोत, High Court of Karnataka Official

इमेज कैप्शन, जज संदेश

"ये (भ्रष्टाचार) कैंसर जैसी बीमारी है. चौथे स्टेज में पहुंचने से पहले इसे रोक दिया जाना चाहिए. इसमें मेरा कोई निजी हित नहीं है. मेरे पास पिता की चार एकड़ की ज़मीन है. अगर मैं जज का पद छोड़ दूं तो भी कुछ लोगों को खाना खिला सकता हूं लेकिन इस हद तक नहीं गिरुंगा. मैं यहां किसी को खुश करने के लिए नहीं बैठा हूं. यह और कुछ नहीं बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है."

न्यायाधीश संदेश की टिप्पणी की वजह से महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी दोपहर में पेश हुए और उन्होंने आश्वासन दिया कि कोर्ट से मांगे गए सभी डेटा जमा कराए जाएंगे. जस्टिस संदेश ने सुनवाई 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी.

ये सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही थी तो एसीबी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से बेंगलुरु शहरी ज़िला से तत्कालीन उपायुक्त जे मंजूनाथ को गिरफ़्तार कर लिया. न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के कुछ घंटों बाद ही सरकार ने उन्हें सेवा से निलंबित करने का आदेश दे दिया.

एक नौकरशाह ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "तत्कालीन डीसी और वर्तमान एडीजीपी की गिरफ़्तारी में सरकार की त्वरित कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनकी बोली गई बात से नौकरशाही हिल गई. ज़ाहिर तौर पर ये जज भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नौकरशाही की खिंचाई के लिए अपने अनुभव का इस्तेमाल कर रहे हैं."

जस्टिस संदेश विभिन्न पदों पर रहते हुए काफी अनुभवी हैं. उन्होंने ज़िला और सत्र न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए परीक्षा देने से पहले दीवानी और आपराधिक मामलों के वकील के रूप में शुरुआत की. उन्हें 2018 में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और 2020 में वे स्थायी न्यायाधीश बनाए गए. एक वक़्त, जज संदेश उस अदालत के प्रमुख रह चुके हैं जो भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई करती थी.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

"चीज़ों में सुधार होना चाहिए"

डीसी के दफ़्तर से जुड़े पहले के एक रिश्वत के मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदेश ने आश्चर्य जताया था कि जब एक आईएएस अधिकारी के पास से पांच किलो सोना समेत 4.2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद हुई तब 'बी' रिपोर्ट कैसे फ़ाइल की गई. (संभवतः ये वही मामला है जिसका वो जज ज़िक्र कर रहे थे जिसमें 'बी' रिपोर्ट दायर करने पर एसीबी से सवाल पूछने वाले मैजिस्ट्रेट का ट्रांसफर कर दिया गया था.)

जस्टिस संदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) की नियुक्ति में भ्रष्टाचार के एक और मामले की सुनवाई कर रहे हैं. इस मामले में तत्कालीन एडीजीपी (रिक्रूटमेंट) अमृत पॉल को चौथे दौर की पूछताछ के बाद सीआईडी ने उसी शाम गिरफ़्तार कर लिया था.

स्थानीय अदालत से पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. पीएसआई के 545 पदों के लिए क़रीब 54 हज़ार उम्मीदवारों ने लिखित परीक्षा दी थी और इसके लिए रिश्वत की राशि कई लाख रुपये थी. एक बड़े राजनीतिक विवाद के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

जस्टिस संदेश की मौखिक टिप्पणियों के बाद नौकरशाही से दो तरह की प्रतिक्रियाएं आईं. एक में नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि ईमानदारी से काम करने के नाम पर इतना अधिक दबाव होता है कि अगर आप रूल बुक की बात करते हैं तो लोग नाराज़ हो जाते हैं और अधिकारियों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह का केस दर्ज कर देते हैं. कई बार तो हमें लगता है कि एक शांत पोस्टिंग ले लें जहां जनता के साथ ज़्यादा बातचीत न हो.

एक अन्य प्रतिक्रिया ये है कि नौकरशाही को इसने झकझोर दिया है. लेकिन पूर्व आईपीएस अधिकारी गोपाल होसुर ने बीबीसी को बताया कि, "ये एक झटके की तरह है. ऐसा होने पर लोग अपने घरों से बाहर निकलते हैं, फिर सब अपने अपने घर लौट जाते हैं. ऐसा लगता है कि इसका असर हुआ है. अंतिम उद्देश्य ये है कि चीज़ों में सुधार होना चाहिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)