प्रधानमंत्री मोदी के भाई ने बताया कहाँ हैं अब्बास - प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Getty Images
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी मां हीराबेन के जन्मदिन पर एक ब्लॉग शेयर किया था जिसमें उन्होंने अब्बास नाम के एक शख़्स का ज़िक्र किया था. उनके इस लेख के बाद इस नाम की काफ़ी चर्चा हुई और सोशल मीडिया पर 'अब्बास' ट्रेंड करता रहा. रविवार के अख़बारों में भी इससे जुड़ी ख़बरें छपी हैं.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अब्बास के बारे में प्रधानमंत्री मोदी के भाइयों से बात की है.
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि मोदी के भाइयों ने बताया कि अब्बास मियांजीभाई रामसाणा मोमिन गुजरात में मेहसाणा ज़िले के केसिंपा गाँव में रहते थे. वो उन्हें 'परिवार के सदस्य' के तौर पर याद करते हैं.
अख़बार लिखता है कि अब्बास और पीएम मोदी के सबसे छोटे भाई पंकजभाई सहपाठी थे.
पंकजभाई ने अब्बास को एक "नेक इंसान" बताते हुए कहा कि वो दिन में पांच बार नमाज़ अदा किया करते थे और वो हज यात्रा पर भी गए.
उन्होंने बताया, "अब्बास के पिता और उनके पिता दोस्त थे. उनके गांव में कोई हाई स्कूल नहीं था और वह प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले थे. जिसके बाद मेरे पिता ने उनके पिता को अब्बास को उनके साथ भेजने के लिए मना लिया ताकि वो अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें."
पंकजभाई ने बताया कि अब्बास ने हमारे साथ रहकर अपनी आठवीं और नौंवी की पढ़ाई पूरी की.
पंकजभाई कहते हैं कि अब्बास अब 64 साल के हैं. वह गुजरात सरकार में द्वितीय श्रेणी के अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और अब वो रिटायर हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह ही वह ऑस्ट्रेलिया में अपने बेटे के पास सिडनी चले गए.
वहीं पीएम मोदी के सबसे बड़े भाई सोमाभाई ने बताया, "वह पंकज के क्लासमेट थे. वह क़रीब दो साल तक हमारे घर में रहे."
पंकजभाई ने बताया, "अब्बास परिवार के सदस्य की तरह थे. त्योहारों पर मेरी मां उनके लिए खाना बनाती थीं. मुहर्रम के दिन वह मेरी एक काली कमीज़ पहना करते थे."

इमेज स्रोत, ANI
गुजरात दंगों को किताबों से हटाने पर बीजेपी की सहयोगी जेडीयू बोली, 'इतिहास को बदला नहीं जा सकता'
बिहार में बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने कहा है कि 'इतिहास तो इतिहास है, इसे पलटा नहीं जा सकता है.'
केसी त्यागी ने यह बयान इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया है. दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया था कि एनसीईआरटी की किताबों से आपातकाल से लेकर गुजरात दंगों तक के अध्याय को हटा दिया जाएगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
"इतिहास के युक्तिकरण" के नाम पर "इतिहास को दोबारा" लिखने की सरकार की कोशिश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केसी त्यागी ने कहा कि इतिहास तो इतिहास है और इसे बदला नहीं जा सकता है. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने कहा, "जो घटना घट गई है, अच्छी या बुरी, उसे रिवर्स नहीं किया जा सकता है."
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस मुद्दे पर स्पष्ट राय दे चुके हैं. उन्होंने भी हाल में कहा था कि इतिहास को दोबारा नहीं लिखा जा सकता है. एनसीईआरटी की इतिहास की किताबों से अतीत के कई अध्यायाों को हटाने पर आपत्ति जताते हुए त्यागी ने कहा, "आज की और आने वाली पीढ़ी को इतिहास उसी तरह जानना चाहिए जैसा वह था. आपातकाल वाले अध्याय को हटाने का क्या मतलब?"
उन्होंने कहा कि कौन सा अध्याय रहे और कौन सा हटा दिया जाना चाहिए, ये इतिहासकारों और शोधकर्ताओं पर छोड़ दिया जाना चाहिए. जेडीयू के अलावा कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भी इसकी आलोचना की है. इसके अलावा राजद के सांसद मनोझ झा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा है कि बीजेपी एक ऐसा अतीत पेश करने की कोशिश कर रही है जो कभी था ही नहीं.
17 जून को एनसीईआरटी ने बताया था कि गुजरात दंगे, आपातकाल और दूसरे कई अध्यायों को पाठ्य पुस्तक से हटा दिया है. गुरुवार को एक नोटिफ़िकेशन जारी करते हुए एनसीईआरटी ने लिखा कि कोरोना महामारी के मद्देनज़र पाठ्यपुस्तक को रैशनल होना चाहिए, इसलिए संशोदन करने का फ़ैसला किया गया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
दलितों और अल्पसंख्यकों पर आधारित अध्यायों को लेकर भी बदलाव
इंडियन एक्सप्रेस ने स्कूल की किताबों में होने वाले बदलाव को लेकर अपनी पड़ताल का एक हिस्सा 18 जून को प्रकाशित किया था और एक हिस्सा आज प्रकाशित किया है. इस दूसरे पार्ट मे अल्पसंख्यकों और दलितों से जुड़े अध्याय पर रिपोर्ट की गई है.
अख़बार लिखता है, "एक दलित के अपने पारंपरिक कामों जैसे खेती, मैला ढोने या चमड़े का काम करने तक ही सीमित रहने की संभावना है."
"अल्पसंख्यकों के लिए यह ख़तरा हमेशा है कि बहुसंख्यक समुदाय राजनीति में सत्ता पर कब्ज़ा किये रहे और अपने धर्म और संस्कृति को प्रभावी बनाए रखने के लिए राज्य की ताक़तों का इस्तेमाल करे."
जाति-व्यवस्था और भेदभाव पर लिखे अध्याय में से ये कुछ वो वाक्य हैं जो अब एनसीईआरटी की किताबों के पाठ्यपुस्तक से हटा दिया गया है. बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में कई तरह के बदलाव किये गए हैं लेकिन व्यापकता के आधार पर यह सबसे बड़ा बदलाव है.
इंडियन एक्सप्रेस ने कक्षा छह से 12 तक के इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाज शास्त्र की पाठ्यपुस्तकों की पड़ताल की है और होने वाले बदलावों का पुराने पाठ्यक्रम से तुलनात्मक अध्ययन किया है. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी पड़ताल में पाया है कि दलित और अल्पसंख्यकों के साथ हुए भेदभाव के उदाहरण वाली बहुत सी सामग्री को हटा दिया जाएगा.
इससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार के दौरान संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर पर बने एक कार्टून के विरोध के बाद उसे 11वीं के पॉलिटिकल साइंस के पाठ्यक्रम से हटाया गया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
अग्निपथ विरोधी हिंसा भड़काने के पीछे कोचिंग सेंटर्स पर संदेह
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की पुलिस ने संदेह जताया है कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के पीछे उन कोचिंग सेंटर्स का हाथ हो सकता है जो सेना में भर्ती के लिए कोचिंग देते हैं.
हालांकि कोचिंग सेंटर्स के ऑपरेटरों, शिक्षकों और कोचिंग से जुड़े अन्य लोगों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इससे इनकार किया है और कहा है कि उन्हें फंसाया जा रहा है.
आंध्र प्रदेश पुलिस ने अग्निपथ विरोधी मामले में आर्मी के रिटायर्ड हवलदार अवुला सुब्बा राव को गिरफ़्तार भी किया है. वह कई कोचिंग सेंटर्स चलाते हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों को अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ भड़काया.
बिहार में हिंसा भड़काने के आरोप में दो कोचिंग सेंटर्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है. पटना और बिहार के दूसरे कई कोचिंग सेंटर्स भी पुलिस के रडार पर हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
केंद्र सरकार 400 सीए पर रख रही है नज़र
केंद्र सरकार ने 400 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सचिवों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफ़ारिश की है. आरोप है कि ये लोग मेट्रो शहरों में चाइनीज़ सेल कंपनियों के साथ जुड़े हुए थे. इन पर नियमों और मानदंडों को दरकिनार करने का आरोप है.
सरकार की यह कार्रवाई गलवान की घटना के बाद चीन और चीनी कंपनियों के ख़िलाफ़ उठाए गए भारत सरकार के क़दम का ही एक हिस्सा है. गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे.
द हिंदू की ख़बर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकार ने बताया कि जिन सीए और सीएस के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई, उन्होंने नियमों और क़ानून का पालन किये बिना बड़ी संख्या में चीनी स्वामित्व वाली या चीन संचालित शेल कंपनियों को शामिल करने में मदद की थी.
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पिछले दो महीनों में वित्तीय खुफ़िया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद कार्रवाई की सिफारिश की.
ये भी पढ़ें...
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













