सोने की तस्करी मामले में केरल के सीएम पी विजयन के विरोध की वजह क्या?

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

सोने की तस्करी के मामले में एक अभियुक्त के आरोप लगाने के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्हें एक हवाई यात्रा के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा है.

पी विजयन देर शाम की फ़्लाइट से अपने गृह ज़िले कन्नूर से राजधानी तिरुवनंतपुरम लौट रहे थे, जब हवाई जहाज़ के भीतर दो युवाओं ने चिल्लाना शुरू किया, "अस्वीकार, अस्वीकार, मुख्यमंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए" और जहां मुख्यमंत्री बैठे थे उस सीट की ओर बढ़े.

हालांकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चे के संयोजक ईपी जयराजन ने मुख्यमंत्री को अपमानित करने की उन युवाओं की कोशिशों को विफल कर दिया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्होंने दोनों युवाओं को इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि वो दोनों विमान के गलियारे में गिरते हुए दिखे.

केरल की यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तीन सेकेंड का एक वीडियो जारी किया है.

फ़्लाइट के अंदर हुए विरोध के बाद कथित रूप से डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं ने केरल कांग्रेस के दफ़्तर में तोड़फोड़ की जिसमें कार और फ्लेक्स बोर्ड क्षतिग्रस्त हुए हैं. इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी एके एंटनी कांग्रेस दफ़्तर में मौजूद थे.

डीवाईएफ़आई कार्यकर्ताओं के हिंसा और तोड़फोड़ की ख़बरें कासरगोड और इडुक्की से भी आईं. कांग्रेस और सीपीएम कार्यकर्ताओं के भिड़ने की ख़बर पथानामत्थिटा से आई वहीं यूथ कांग्रेस और डीवाईएफ़आई कार्यकर्ता कन्नूर के इरिट्टी में भिड़ गए.

विमान में विरोध करने वाले दोनों युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बाद में पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

ये युवा विमान से पहले मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर राज्य सचिवालय और केरल के अन्य हिस्सों में भी बीते हफ़्ते कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे.

कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी तब से मुख्यमंत्री से इस्तीफ़े की मांग कर रही हैं जब से सोने की तस्करी में मुख्य अभियुक्त स्वप्ना सुरेश ने इस मामले में उनका, उनकी पत्नी और बेटी की मिलीभगत की बात कही है.

भारत में किसी फ़्लाइट के भीतर विरोध का यह दूसरा मामला है, पहली बार टीवी एंकर पत्रकार अर्नब गोस्वामी को इसका सामना करना पड़ा था. तब स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने जनवरी 2020 में लखनऊ-मुंबई की एक फ़्लाइट में अशिष्ट टिप्पणी की थी.

विजयन की प्रतिक्रिया

फ़्लाइट के राज्य की राजधानी में उतरने के बाद मुख्यमंत्री विजयन ने अपने एक वीडियो मैसेज में कहा, "जो कुछ भी कन्नूर से तिरुवनंतपुरम की फ़्लाइट में हुआ वो निंदनीय है. शीर्ष कांग्रेसी नेताओं ने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हिंसक व्यवहार को सही ठहराया है. उनकी प्रतिक्रिया साबित करती है कि इस घटना को सोच समझ कर योजनाबद्ध तरीक़े से अंजाम दिया गया है."

मुख्यमंत्री इस विरोध को लोकतंत्र और लोगों के लिए एक चुनौती के रूप में देखते हैं. वे कहते हैं, "ये प्रजातंत्र और उसके लोगों के लिए एक चुनौती है. उनकी योजना देश भर में अराजकता फ़ैलाना है. जो लोग सरकार और लोगों से प्यार करते हैं उन्हें भड़काने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं. मैं सभी से इस तरह के हिंसक और अराजक क़दमों के ख़िलाफ़ लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध करने और विपक्ष के झांसे में नहीं आने के लिए सावधान रहने का अनुरोध करता हूं."

विजयन के साथ फ़्लाइट में मौजूद ईपी जयराजन मलयालम टीवी चैनल से बोले, "फ़्लाइट के अंदर जो हुआ वो एक तरह से आतंकी कार्य था और उसके पीछे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे."

ताज़ा घटना के पीछे की कहानी

सोने की तस्करी के मामले में मुख्य अभियुक्त स्वप्ना सुरेश ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत सात जून को कोर्ट में जो बयान दिया उसके बाद से कांग्रेस और बीजेपी केरल में अलग अलग विरोध प्रदर्शन कर रही है.

सुनवाई के बाद स्वप्ना ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी कमला, बेटी वीना और पूर्व मंत्री केटी जलील का नाम लिया है. उन्होंने कहा, "कमला और वीना सुखी जीवन जी रही हैं. केवल मुझे कष्ट भोगने के लिए छोड़ दिया गया है."

उनका ये बयान, उनके पहले के उन बयानों के उलट था जिसमें ये कहा गया था कि मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं थे.

हालांकि, बीते हफ़्ते स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि जब विजयन 2016 में दुबई में थे तो उन्हें नोटों से भरे सामान भेजे गए थे.

स्वप्ना ने कहा कि जब वे संयुक्त अरब अमीरात के तिरुवनंतपुरम स्थित कांसुलेट में कार्यकारी सचिव के पद पर कार्यरत थीं तब मुख्यमंत्री के सचिव एम शिवशंकर ने उनसे संपर्क किया और कहा कि एक बैग मुख्यमंत्री को दुबई में डिलीवर करना है.

उन्होंने 7 जून को संवाददाताओं से कहा, "शिवशंकर ने मुझे कहा कि मुख्यमंत्री को एक बैग दुबई ले जाना था जिसे वो भूल गए हैं. जब बैग कांसुलेट में लाया गया और हमने उसे स्कैन किया तो पता चला कि उसमें नोट थे. मैं कोर्ट में दिए गए अपने बयान के बारे में सबकुछ नहीं बता सकती."

हालांकि मुख्यमंत्री विजयन ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए ख़ारिज़ कर दिया और कहा कि यह उनके ख़िलाफ़ चलाए जा रहे एक पहले से तय एजेंडे का हिस्सा है.

सीएम विजयन ने कहा, "जब सोने की तस्करी का मामला सामने आया तो राज्य सरकार ने केंद्र से व्यापक जांच कराने का आग्रह किया था. राजनीतिक कारणों से हमारे ऊपर कुछ आरोप बार-बार लगते रहे हैं. ये पहले से तय एजेंडे का एक हिस्सा है. मुझे यकीन है कि केरल का समाज बेबुनियाद आरोपों के ज़रिए फ़ायदा उठाने वालों को ज़ोरदार जवाब देगा."

इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और सीमा शुल्क विभाग (कस्टम) ने की थी.

सोने की तस्करी का मामला क्या है?

स्वप्ना सुरेश, 5 जुलाई 2020 को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग के 30 किलो सोना बरामद करने के बाद ख़बरों में आई हैं. इसकी रक़म 15 करोड़ रुपये बताई गई थी. कार्गो को बाथरूम फिटिंग, नूडल्स, बिस्किट और खजूर के नाम पर बुक किया गया था.

उस बैगेज को लेने सरित कुमार गए थे जिनका दावा था कि वो वाणिज्य दूतावास में तब जनसम्पर्क अधिकारी (पीआरओ) के रूप में काम कर रहे थे, हालांकि उन्हें एक साल पहले पद से हटा दिया गया था. सीमा शुल्क विभाग ने राजनयिकों के सामान की जांच के शर्त का पालन करते हुए कांसुलेट के अधिकारियों की मौजूदगी में उस सामान को खोलने का फ़ैसला लिया. स्वप्ना सुरेश के बाद सरित भी गिरफ़्तारी कर लिए गए.

स्वप्ना सुरेश को उनकी नौकरी और कांसुलेट से हटा दिया गया. हालांकि जल्द ही उन्हें केरल राज्य सूचना प्रौद्योगिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (केएसआईटीआईएल) में विकास अधिकारी के रूप में नौकरी मिल गई, जिसके अध्यक्ष शिवशंकर थे.

शिवशंकर ने इस बात से साफ़ इनकार किया कि उन्होंने कभी स्वप्ना के नाम की सिफारिश की थी.

आईएएस अधिकारी शिवशंकर तब मुख्यमंत्री के चीफ़ प्रिंसपल सेक्रेट्री और सूचना प्रौद्योगिकी के सचिव पद पर भी कार्यरत थे. बाद में उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया गया और गिरफ़्तार किया गया. 20 महीने जेल में रहने के बाद बीते वर्ष फ़रवरी में उन्हें जमानत मिली.

स्वप्ना सुरेश को बीते वर्ष नवंबर में ज़मानत मिली.

स्वप्ना ने बीते हफ़्ते आरोप लगाया कि शाज किरण नामक एक पत्रकार उन्हें मुख़्यमंत्री के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को वापस लेने के लिए मजबूर कर रहा है. किरण ने उनसे ये दावा किया था कि वो सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) के अपर महानिदेशक एम. आर. अजित कुमार के लगातार सम्पर्क में है. सरकार ने तुरंत ही उन्हें उनके पद से हटा दिया.

शनिवार को स्वप्ना सुरेश ने केटी जलील को सोशल मीडिया पर उनके एक पोस्ट के लिए उनकी वकील के ख़िलाफ़ मानहानि की शिकायत दर्ज करने पर भी निशाना साधा था.

सोमवार को वे एफ़आईआर को रद्द करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट गईं.

पलक्कड़ में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "वे मुझ पर इस तरह हमला क्यों कर रहे हैं. मैं अपने बयान पर कायम हूं. मेरे आसपास के लोगों को चोट न पहुंचाएं, कृपया मुझे मार डालें ताकि कहानी ख़त्म हो जाए."

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