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मुसलमान-मुसलमान को मार रहा है, ये कैसा जिहाद है: अमरीना भट्ट के पिता
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बडगाम से लौटकर
"मेरी बेटी को मारकर मेरे घर को तबाह कर दिया. मेरी अच्छी ख़ासी दुनिया उजाड़ के रख दी. मेरे घर की आमदनी का ज़रिया मेरी बेटी थी. मुझे मिट्टी में मिला के रख दिया. मेरी बेटी मेरे पास थी तो मैं बादशाह था, लेकिन उसे मारकर मुझे फ़क़ीर बना दिया गया."
यह कहना था अमरीना भट्ट के पिता ख़िज़र मोहम्मद भट्ट का जो अपनी बेटी की मौत के बाद सदमे में हैं. बडगाम के हुशरू गाँव में अपने मकान की दूसरी मंज़िल के एक कमरे में बैठे ख़िज़र मोहम्मद बार-बार अपने चेहरे पर हाथ फेरकर ठंडी आहें भर रहे थे.
उन्होंने कहा, "जिस दरख़्त के साए में मैं जी रहा था, उन्होंने उस दरख़्त को ही गिरा दिया गया. मैं बीमार इंसान हूं और मेरी बेटी सर्दियों में सारा ख़र्चा उठाकर मुझे जम्मू ले जाती थी, लेकिन अब कौन मुझे ले जाएगा और कौन मेरा इलाज करेगा."
बातचीत में उन्होंने सवाल किया- "मुसलमान-मुसलमान को मार रहा है, ये कैसा जिहाद है."
सोशल मीडिया पर कश्मीर में बहुत ही कम समय में अपनी पहचान बनाने वाली आर्टिस्ट तीस वर्षीय अमरीना भट्ट की बीते बुधवार देर रात हत्या कर दी गई थी. दो संदिग्ध चरमपंथियों ने उनके घर पर आकर अमरीना को बाहर बुलाया और फिर बहुत नज़दीक से उन पर गोली चलाई.
इस हमले में उनका दस साल का एक भांजा भी ज़ख़्मी हो गया. फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है.
अमरीना भट्ट ने कम वक़्त में काफ़ी शोहरत हासिल कर ली थी. सोशल मीडिया पर अमरीना भट्ट के वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है और हज़ारों लोग उनके फ़ॉलोअर थे.
अमरीना भट्ट की हत्या ऐसे समय में की गई, जब कश्मीर में टार्गेटेड हत्याओं का सिलसिला जारी है. कुछ दिन पहले एक कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की भी हत्या की गई थी. दो दिन पहले श्रीनगर के सौरा में एक पुलिसकर्मी और उनकी बेटी पर संदिग्ध चरमपंथियों ने हमला किया था.
इस तरह की हत्याओं के बाद कश्मीर में ख़ौफ़ का माहौल पैदा हो गया है. अमरीना के घर पर भी हमें ये बात देखने को मिली कि घर आए हुए कई लोग कैमरे से बचना चाहते थे.
जम्मू और कश्मीर में बीती रात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ की दो घटनाएं हुई हैं. पुलिस के अनुसार पहली मुठभेड़ में श्रीनगर में लश्करे तैयबा के दो चरमपंथी मारे गए हैं. वहीं दूसरी मुठभेड़ अवंतिपुरा में हुई है. पुलिस का कहना है कि वहां टीवी आर्टिस्ट अमरीना भट्ट की हत्या से जुड़े दो चरमपंथी मारे गए हैं.
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुख्ती ने शुक्रवार को बडगाम में अमरीना के परिवार से मुलाक़ात की. उन्होंने जम्मू कश्मीर प्रशासन से अपील की कि वो अमरीना के परिवार की मदद करे.
अमरीना के घर में मातम पसरा है. बीबीसी की टीम जब उनके घर पहुंची, घर के बाहर लगाए टेंट में काफ़ी महिलाएं जमा थीं. अमरीना की बड़ी बहन रज़िया अपनी बहन की मौत के बाद निढाल हैं.
अमरीना की हत्या के घटनाक्रम के बारे में बताते हुए वो कहती हैं, "हम सब अंदर बैठे थे. दो व्यक्ति आए और मेरे बेटे को कहा कि अमरीना भट्ट कहां हैं उनको बुलाओ. उसने अंदर जाकर उसे बुलाया. उन्होंने कहा कि हम यहां ही रहते हैं और शादी में आपको गाना है. अमरीना ने कहा कि में गाती नहीं हूँ. ये कहने के बाद उन्होंने अमरीना पर गोलियां चलाई. अमरीना भागते-भागते अंदर कमरे में गई और गिर गई. उसके बाद मेरी आँखों में अंधेरा छा गया और फिर मुझे किसी बात की ख़बर नहीं."
रज़िया का कहना था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अमरीना को क्यों मारा गया? उनके मुताबिक़ अमरीना सिर्फ़ दूरदर्शन के साथ काम करती थी और तीन महीने पहले सोशल मीडिया पर अपना चैनल 'भट्ट अमरीना' के नाम से खोला था और बीते एक साल से अब गाती भी थीं.
उनका ये भी कहना था कि अमरीना दिनभर दिहाड़ी मज़दूरी करती थीं और शाम को अपने घर लौटती थीं. अमरीना की बड़ी बहन ने कहा कि अमरीना ही कमा कर लाती थीं लेकिन अब कौन घर के लिए कमाएगा?
अमरीना के साथ काम करने वाले उनके साथी भी ग़ुस्से में हैं और इस तरह की हत्या को निंदनीय बता रहे हैं.
उनके एक साथी हस्सान जावेद का कहना है, "मैं पूछना चाहता हूँ कि ऐसा अमरीना ने क्या गुनाह किया था कि उनकी हत्या की जाए और इतनी बड़ी सज़ा मिले. घर में आकर गोलियां मारना ये सब क्या है? मैं इस हरकत से काफ़ी मायूस हूँ और इसकी निंदा करता हूँ."
जावेद कहते हैं, "किसी आर्टिस्ट या किसी आम इंसान को मारना जिसकी कोई ग़लती नहीं निंदनीय है. अगर आप अमरीना का सोशल मीडिया चैनल देखेंगे तो कहीं पर ऐसा कोई कंटेंट नहीं है कि किसी के ख़िलाफ़ वो बात कर रहीं हों. मेरी तरह अमरीना भी एक आर्टिस्ट थीं जो लोगों को हंसाती थीं."
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