कश्मीर में अल्पसंख्यकों की हत्या पर नाराज़गी, जम्मू में प्रदर्शन

भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले एक सप्ताह में सात लोगों की हत्या के बाद लोगों में नाराज़गी है.

गुरुवार को संदिग्ध चरमपंथियों की गोली से मारी गई स्कूल प्रिंसिपल सुपिंदर कौर की शवयात्रा में सिख समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया है.

राजधानी श्रीनगर की सड़कों से गुज़री उनकी अंतिम यात्रा में कई लोग भावुक नज़र आए. हमें इंसाफ़ चाहिए के नारों के साथ ये शवयात्रा शहर के बीच से आगे बढ़ी.

गुरुवार को श्रीनगर के ईदगाह इलाक़े में बंदूकधारियों ने एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और उसी स्कूल के एक अध्यापक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

ये इस सप्ताह श्रीनगर में होने वाली पाँचवीं हत्या थी. इससे पहले शहर के नामी केमिस्ट मखन लाल बिंद्रू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

कई लोग इन ताज़ा हत्याओं की तुलना 1990 के दशक जैसे हालात से कर रहे हैं जब हज़ारों कश्मीरी पंडित हिंसा से बचने के लिए घाटी छोड़कर, देश के विभिन्न हिस्सों में रिफ़्यूजी कैंपो में चले गए थे.

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ़ोरम ने जम्मू में इन हत्याओं के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था, "मोदी सरकार देश में वोट तो कश्मीरी पंडितों की रक्षा की दुहाई देकर बटोरती है पर उन्हें सुरक्षा देने में फ़ेल साबित हुई है. पाक समर्थित उग्रवाद पर कब क़ाबू पाएगी छद्म राष्ट्रवादी भाजपा सरकार?"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है.

प्रियंका गांधी ने कहा, "आतंकियों द्वारा हमारे कश्मीरी बहनों-भाइयों पर बढ़ते हमले दर्दनाक और निंदनीय हैं. इस मुश्किल घड़ी में हम सब अपने कश्मीरी बहनों-भाइयों के साथ हैं. केंद्र सरकार को तुरंत कदम उठाकर सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए."

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता मनजिंदर सिंह सिरसा ने उम्मीद जताई है कि कश्मीर का मुस्लिम समुदाय दहशतगर्दी के ख़िलाफ इस लड़ाई में अल्पसंख्यक सिख और पंडितों का साथ देगा.

पुलिस के मुताबिक़ इस साल विभिन्न घटनाओं में अब तक 28 लोग मारे गए हैं. इनमें पाँच लोग कश्मीरी हिंदू, सिख थे और दो हिंदू प्रवासी मज़दूर थे.

इस बीच गुरुवार को ही अनंतनाग ज़िले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ की गोली से एक आम नागरिक यासिर अली की मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि एक चेकप्वाइंट पर यासिर अली को अपनी गाड़ी रोकने को कहा गया था और ऐसा न करने पर सीआरपीएफ़ ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने इस घटना की निंदा की है और कहा है कि अलर्ट रहने का मतलब ये नहीं है कि आप किसी को गोली मार दें.

अल्पसंख्यकों में डर

बीते एक सप्ताह में सात मौतों के कारण कश्मीर में रहने वाले अल्पसंख्यकों के बीच डर बढ़ गया है.

नेशनल कॉन्फ़्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय से अपील की है कि वो घाटी छोड़कर न जाएँ. उन्होंने कहा कि आम लोगों की हत्या में शामिल लोगों को अपने मंसूबे में सफल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा- अपनी ओर से मैं उन लोगों से दिल से अपील कर रहा हूँ, जो डर से घाटी सोचने के बारे में सोच रहे हैं. कृपया ऐसा न करें. आपको बाहर करके हम इन आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वालों के नापाक मंसूबे को सफल नहीं होने दे सकते. हम लोगों में से ज़्यादातर नहीं चाहते कि आप यहाँ से जाएँ.

उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि कश्मीर में समुदायों के बीच दरार पैदा करने के लिए ये हत्याएँ की जा रही हैं.

शहरों में पुलिस हाई एलर्ट पर है और जगह-जगह तलाशी ली जा रही है. एक हफ़्ते के भीतर मरने वालों में तीन कश्मीरी मुसलमान भी हैं.

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