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क्वाड: चीन की समुद्र में मछली पकड़ने की ‘दादागिरी’ को ऐसे समाप्त करेगा भारत – प्रेस रिव्यू
जापान में होने वाली क्वाड बैठक में चीन के प्रशांत क्षेत्र में अत्यधिक मछली पकड़ने पर नकेल कसने की भी तैयारी हो रही है. माना जाता है कि चीन मछली पकड़ने में 'दादागिरी' करता है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' अपनी एक विशेष रिपोर्ट में लिखता है कि भारतीय नौसेना के इन्फ़ॉर्मेशन फ़्यूज़न सेंटर-इंडियन ऑशियन रीज़न (IFC-IOR) अवैध रूप से मछली पकड़ने में अहम भूमिका निभाएगा.
एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि टोक्यो में होने वाले सम्मेलन में चारों देशों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) के नेता इसकी घोषणा करेंगे.
इसके तहत सिंगापुर, भारत और प्रशांत क्षेत्र में एक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में अवैध अनियमित और असूचित मत्स्य पालन (IUUF) का पता लगाएगा.
भारत-प्रशांत क्षेत्र में IUUF के लिए अधिकतर बार चीनी जहाज़ों के बेड़ों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है और इस शुरुआत को एक तरह से चीन के ख़िलाफ़ क्वाड के दबाव के तौर पर देखा जा रहा है.
इसके अलावा अमेरिका इस सम्मेलन में एक नया आर्थिक और व्यापार समझौता ला सकता है जिसको इंडो-पैसिफ़िक इकोनॉमिक फ़्रेमवर्क नाम दिया गया है. इस समझौते का मक़सद भी इस क्षेत्र में चीन के आर्थिक दबदबे को कम करना है.
समुद्री सुरक्षा मुद्दों में क्षेत्रीय सहयोग के लिए साल 2018 में IFC-IOR की स्थापना की गई थी जिसके तहत समुद्री आतंकवाद, IUUF, समुद्री डकैती, मानव और प्रतिबंधित तस्करी को रोकना था.
गुड़गांव में स्थित यह डेटा फ़्यूज़न सेंटर 50 देशों के साथ सूचना साझा करने का तंत्र है.
इस सेंटर को भारत सरकार ने SAGAR (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फ़ॉर ऑल इन द रीज़न) फ्रेमवर्क के तहत स्थापित किया था जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग करता है. इसमें भारत के पड़ोसी देशों समेत कई अन्य देश भी शामिल हैं जिनमें ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, जापान, सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.
क्वाड की इस शुरुआत में अब दो और डाटा फ़्यूज़न सेंटर स्थापित किए जाएंगे जिनमें सिंगापुर नौसेना का इन्फ़ॉर्मेशन फ़्यूज़न सेंटर और ऑस्ट्रेलिया का पैसिफ़िक फ़्यूज़न सेंटर भी स्थापित होगा.
हाल के सालों में अवैध रूप से मछली पकड़ना समुद्री डकैती से बड़ा ख़तरा बन चुका है. शोध बताते हैं कि अवैध मछली पकड़ने की तुलना में अनियमित और कम मछली पकड़ना बड़ी चुनौती है क्योंकि इससे स्टॉक कम होता है और खाने पर निर्भर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर ख़तरा मंडराता है.
महंगाई कम करने के लिए सरकार ख़र्च करेगी 2 लाख करोड़ रुपये
लोगों को बढ़ती क़ीमतों और कई सालों से बढ़ती चली आ रही महंगाई से बचाने के लिए केंद्र सरकार 2022-23 वित्त वर्ष में अतिरिक्त 2 लाख करोड़ ख़र्च करने पर विचार कर रही है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' लिखता है कि हाल में सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल से जो टैक्स हटाया उससे सरकार के राजस्व पर 1 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ेगा और नए उपाय इस संख्या को डबल कर सकते हैं.
अप्रैल में खुदरा महंगाई दर आठ साल के सबसे उच्च स्तर पर जबकि थोक महंगाई दर 17 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी.
अख़बार लिखता है कि इस साल कई राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए ये सिरदर्द बन सकता है.
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी कहते हैं, "हम महंगाई नीचे लाने पर पूरा ध्यान लगाए हुए हैं. यूक्रेन संकट ने किसी की कल्पना से भी बुरी तरह असर डाला है."
अख़बार लिखता है कि दो अधिकारियों ने बताया है कि इस साल खाद पर सरकार 2.15 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देने वाली थी जिसमें वो 500 अरब रुपये अतिरिक्त देगी.
कांग्रेस राज्यसभा में भेज सकती है इन नेताओं को
दैनिक जागरण अख़बार लिखता है कि आगामी 10 जून को राज्यसभा की 57 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में कांग्रेस को अधिकतम नौ सीटें ही मिल सकती हैं, लेकिन अगर सहयोगी दलों ने दरियादिली दिखाई तो यह आंकड़ा 11 सीटों तक पहुंच सकता है.
अख़बार लिखता है कि कांग्रेस पी. चिदंबरम और जयराम रमेश जैसे पार्टी के कुछ दिग्गज नेताओं को वापस उच्च सदन में भेज सकती है.
इसके अलावा कांग्रेस पर ग़ुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा सरीखे असंतुष्ट नेताओं को उच्च सदन में भेजने का दबाव भी है. इसके बीच कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ तो कुछ उभरते नई पीढ़ी के चेहरे भी मौका हासिल करने के लिए पूरा ज़ोर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
चिदंबरम इस बार महाराष्ट्र की जगह अपने गृह राज्य तमिलनाडु से राज्यसभा में आ सकते हैं क्योंकि कांग्रेस और डीएमके के बीच हुए चुनावी समझौते के तहत पार्टी को सूबे से एक सीट मिलने की उम्मीद है.
ज्ञानवापी: पूजा करने की इजाज़त मामले में आज होगी सुनवाई
ज्ञानवापी मामले में सोमवार को ज़िला जज की अदालत में सुनवाई होगी. ज़िला जज की अदालत में सुनवाई का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. इस मामले में अदालत को आठ सप्ताह में सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है.
अमर उजाला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सबकी निगाहें ज़िला जज की अदालत में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं.
ज्ञानवापी परिसर में मां शृंगार गौरी की दैनिक पूजा-अर्चना की इजाज़त देने और अन्य देवी-देवताओं को संरक्षित करने के मामले में ये सुनवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर पक्ष के मुकदमे की योग्यता पर सवाल उठाने वाली मस्जिद पक्ष की दाखिल अर्ज़ी पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने का ज़िला जज को आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को सुनवाई करते हुए मामले की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत से ज़िला जज की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था.
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