वज़ू के बारे में क्या कहता है इस्लाम, जानें हर अहम बात

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- Author, स्नेहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद का निरीक्षण कार्य पूरा होने के बाद ये दावा किया जा रहा है कि परिसर में 'शिवलिंग' मिला है. इसको लेकर स्थानीय अदालत ने उस स्थान को तत्काल सील करने के आदेश दिए थे.
मस्जिद प्रबंधन इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुँचा. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान मस्जिद परिसर में जिस जगह 'शिवलिंग' मिलने की बात कही जा रही है, उसे संरक्षित रखने का निर्देश दिया है.
साथ ही अदालत ने कहा कि मुसलमानों को वहां नमाज़ पढ़ने की पूरी इजाज़त होगी. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार को होगी.
इस सारे मामले में जो एक बात सामने आई है वो है वज़ू और वज़ूख़ाना.
उसका कारण यह है कि जहां 'शिवलिंग' मिलने की बात कही जा रही है वो फ़िलहाल मस्जिद में वज़ूख़ाना है.
तो आईए जानते हैं कि वज़ू क्या होता है.
वज़ू क्या है?
वज़ू के बारे में इस्लाम के विद्वान और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मशावरत के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल हमीद नोमानी ने बताया कि इस्लाम में नमाज़ के लिए वज़ू जरूरी है.
अब्दुल नोमानी कहते हैं,"वज़ू के बगैर नमाज़ नहीं हो सकती है. ये एक अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है साफ़ करना. इसमें पहले हाथ, फिर चेहरे को धोना है. उसके बाद नाक में पानी डालना, कुल्ली करना है."
"शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ना है. फिर पैर को धोना और फिर सिर धोकर मसह करना है यानी अपना गीला हाथ सिर पर फिरा लेना. केहुनी तक दोनों हाथ इसमें धोया जाता है."
उन्होंने बताया कि बुनियादी बात यह है कि नमाज़ से पहले इंसान पाक (साफ-सुथरी) हालत में होना चाहिए.
अब्दुल हमीद नोमानी बताते हैं कि इस्लाम में इस बारे में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में कम से कम पानी का इस्तेमाल होना चाहिए. अगर कोई इंसान समंदर के किनारे भी वज़ू कर रहा हो तो वहां भी वह कम-से-कम पानी का इस्तेमाल करे.
वज़ू में एक बार, दो बार या तीन बार धोने के लिए कहा जाता है. इसमें तीन बार अधिकतम है और कम-से-कम एक बार है.

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इस्लाम में वज़ू को लेकर क्या हैं दिशा-निर्देश
दिल्ली के फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉक्टर मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम अहमद कहते हैं कि इस्लाम मजहब में पाकीज़गी (शुद्धता) की बहुत अहमियत है. इस धर्म की बुनियादी शिक्षा साफ़-सुथड़ा और पाक़ रहना है.
शाही इमाम कहते हैं," नमाज़ पढ़ने से पहले यह जरूरी है कि आप पाक (शुद्ध) हो जाओ. साफ़-सुथरे कपड़े पहनो और जगह भी स्वच्छ हो. हर नमाज़ से पहले वज़ू जरूरी है. अगर कोई घर से नहाकर आए तो मस्जिद में उसे वज़ू करने की ज़रूरत नहीं है. इस्लाम में यह कहा गया है कि जो लोग वज़ू करते हैं, वो पाक-साफ रहते हैं और उनके गुनाह भी धुल जाते हैं."
उन्होंने कहा कि मुसलमानों में यह जरूरत भी है और शर्त भी है. अगर कहीं मस्जिद में वज़ू करने की व्यवस्था नहीं हो तो घर से लोग वज़ू करके आते हैं. उदाहरण के तौर पर समझें तो ईद वाले दिन हजारों लोग जब मस्जिद आते हैं तो ऐसे में वे घर से ही वज़ू करके आते हैं. वज़ू के बारे में कुरान के सूराह अल मायदा में तरीके बताए गए हैं.

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ज्ञानवापी मस्जिद का मामला
ज्ञानवापी मस्जिद का मामला मीडिया में सुर्खियों में हैं. ज्ञानवापी मस्जिद विवाद काफी पुराना है.
दरअसल 18 अगस्त 2021 को पाँच महिलाओं ने बनारस की एक अदालत में एक नई याचिका दाखिल की थी.
इन महिलाओं का नेतृत्व राखी सिंह कर रही हैं जो दिल्ली की रहने वाली हैं. बाकी चार महिला याचिकाकर्ता बनारस की निवासी हैं.
इन सभी की मांग है कि उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, आदि विशेष और नंदी जी और मंदिर परिसर में दिख रही दूसरे देवी-देवताओं के दर्शन, पूजन और भोग लगाने की अनुमति दी जाए.
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