बिहार के रोहतास में 60 फुट लंबा लोहे का पुल चोरी, क्या है पूरा मामला

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार के रोहतास ज़िले में इन दिनों अजीबोगरीब घटनाएं घट रही हैं. इसी साल फरवरी माह में यहां से 1871 में बनी धूप घड़ी का शंकु चोरी हो गया था और अब चोर ज़िले का एक पुल ही काट कर लेते गए है. चोर जल संसाधन विभाग के कर्मचारी बनकर आए और पुल काटकर अपने साथ लेते गए.
पुल चोरी मामले में रोहतास पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने बीबीसी को बताया, "इस मामले की जांच की जा रही है. मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है और जल्दी ही दोषियों की गिरफ़्तारी करके चोरी हुए सामान को बरामद कर लिया जाएगा. इस मामले में सभी बिंदुओं पर जांच हो रही है."
इस मामले में 8 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इसमें नहर विभाग के एक कर्मचारी समेत चार कबाड़ वाले शामिल बताए गए हैं.

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क्या है पुल चोरी का मामला?
सुर्खियों में आया पुल रोहतास के विक्रमगंज अनुमंडल के नासरीगंज थाने के अंतर्गत आता है. सोन नहर पर बने इस पुल को आरा कैनाल भी कहते है. 12 फ़ीट ऊंचे और 60 फ़ीट लंबे इस पुल के चोरी की घटना अमियावर नाम के गांव के पास घटी है.
चोरी के संबंध में रोहतास के नासरीगंज थाने में इंजीनियर अरशद कमाल शम्सी ने बीती 6 अप्रैल को अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट लिखवायी है. अरशद कमाल, जल संसाधन विभाग की सोन नहर प्रमंडल में इंजीनियर है.
उन्होंने बीबीसी से फ़ोन पर इस पूरी घटना की जानकारी दी. उन्होंने बताया, "जल संसाधन विभाग का एक यांत्रिक विभाग होता है, जिसका काम पुल का रखरखाव करना होता है. यांत्रिक विभाग के लोग इसी मौसम में जाकर पुल आदि की जांच करते है. इसी का फ़ायदा उठाते हुए चोर गए और उन्होने कहा कि वो विभागीय आदेश के साथ पुल काटने आए हैं."
अरशद कमाल शम्सी के मुताबिक, पहले भी कई बार गांव वाले ये आवेदन दे चुके थे कि पुल जर्जर हो चुका है और इसके चलते जानवर घायल होते है और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है. इसलिए जेसीबी, पिक-अप और गैस कटर लेकर आए चोरों पर किसी को शक़ नहीं हुआ.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चोर तीन दिन तक इस काम को अंजाम देते रहे.
वहीं इस घटना की जानकारी शम्सी को कैसे हुई?
ये पूछने पर अरशद कमाल शम्सी बताते है, "मैं किसी दूसरे पुल का निमार्ण कार्य देखने गया था. वहां लोगों से इस संबंध में चर्चा सुनी तो फिर मैंने जाकर पुल देखा. इसे चोर ले गए थे. इसके बाद मैने प्राथमिकी दर्ज कराई."

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'500 टन लोहा नहीं था पुल में'
जिस पुल को चोरों ने काटा वो जर्जर हालत में आ चुका था. स्थानीय लोग बताते हैं कि 1972 -73 में बना ये पुल अमियावर, चितौखर, घोंघा, मनौली, पड्डी गांव को जोड़ता था. बहुत दिन से ये पुल बेकार पड़ा था. इस कारण इसके समानान्तर दूसरा एक पुल बन गया जिसका इस्तेमाल लोग करते हैं.
वहीं ज़िला पार्षद प्रतिनिधि गांधी चौधरी बताते है, "पुल चोरी होने की सूचना हमें अख़बार से मिली. मुझे लगता है कि सिंचाई विभाग की मिलीभगत से ये चोरी हुई है."
इस पुल को लेकर एक चर्चा यह भी है कि इसमें 500 टन लोहा था. लेकिन अरशद ने बीबीसी को बताया, "ये पुल जर्जर हो चुका था. इसमें इतना लोहा था ही नहीं जितना रिपोर्ट किया गया है."
स्थानीय पत्रकार जितेन्द्र कुमार का घर घटनास्थल से महज 200 मीटर की दूरी पर है.
वो बताते है, "ये बहुत संकरा पुल था. पुल से पैदल, साइकिल या फिर एक बाइक गुजर सकती थी. पुल में कम ही लोहा रहा होगा. हम लोग चूंकि सुबह टहलने इसी तरफ आते हैं तो मैंने और तकरीबन 500 लोगों ने 4 और 5 अप्रैल को पुल कटते देखा. लेकिन पुल इस्तेमाल नहीं होता था इसलिए कोई कुछ नहीं बोला. पुल लोगों के लिए सिरदर्द बन गयाथा क्योंकि जानवर यहां फंसकर मर जाते थे और दुर्गन्ध फैल जाती थी. इस पुल के समानान्तर जो पुल बना है वो भी जर्जर हालत में है."
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मामले में ट्वीट करते हुए लिखा है, "45 वर्ष पुराने 500 टन लोहे के पुल को 17 वर्ष की भाजपा-नीतीश सरकार ने दिन दहाड़े लुटवा दिया."
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इसी साल धूप घड़ी भी हुई थी चोरी
फरवरी 2022 में रोहतास के डेहरी के सिंचाई विभाग के कैंपस में 1871 में लगी धूप घड़ी का शंकु भी चोरी हो गया है. शंकु धूप की घड़ी में लगने वाला धातु का टुकड़ा होता है, जिसकी परछांई से समय का अनुमान लगाया जाता है.
ये घड़ी अंग्रेजों के दौर में बनाई गई थी जिसमें हिंदी और रोमन अंक खुदे हुए है. धूप घड़ी का शंकु चोरी होने के कुछ दिन बाद ही रोहतास पुलिस ने इस शंकु को मानिकचंद गुप्ता नाम के कबाड़ वाले के यहां से बरामद कर लिया गया था. मानिकचंद गुप्ता ने धूप घड़ी के शंकु को महज 2,000 रूपये में चोरों से खरीदा था.
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