यूपी विधान परिषद चुनाव: समाजवादी पार्टी का नामांकन में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप, बीजेपी ने दी सफ़ाई

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनावों में समाजवादी पार्टी आरोप लगा रही है कि उनके प्रत्याशियों को जगह-जगह नामांकन भरने से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रोका और उनके साथ मारपीट की.
पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में निर्वाचन आयोग में एक शिकायत सौंपी है और कर्रवाई की मांग की है.
पश्चिम उत्तर प्रदेश के एटा में पार्टी के दो प्रत्याशियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट वाले वीडियो सामने आए हैं.
एटा के स्थानीय प्राधिकारी और एमएलसी चुनाव के उम्मीदवार उदयवीर सिंह धाकरे ने आरोप लगाया है कि उनके और पार्टी के दूसरे प्रत्याशी राकेश यादव को भाजपा कार्यकर्ताओं ने नामांकन भरने से रोका और उनके साथ मारपीट की. उदयवीर सिंह इस वक्त समाजवादी पार्टी के एमएससी हैं.
उधर, बीजेपी का कहना है कि उदयवीर सिंह धाकरे और राकेश यादव पहले अंदर जाना चाह रहे थे जिसकी वजह से कहा-सुनी हुई.
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दरअसल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद तुरंत विधान परिषद के चुनाव हो रहे हैं. चुनावों का नामांकन 21 मार्च यानी सोमवार को ख़त्म हो गया, लेकिन नामांकन की समीक्षा 22 को समाप्त हुई. चुनाव 9 अप्रैल को होगा और मतगणना 12 अप्रैल को. कुल 36 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है जिसमें एक बार फिर भाजपा और सपा आमने-सामने हैं.
क्या हुआ एटा में ?
सपा के उदयवीर सिंह धाकरे का आरोप है कि सोमवार को जब वो एटा से दूसरे सपा प्रत्याशी राकेश यादव के साथ अपना दूसरा पर्चा भरने गए तो भाजपा का एक कार्यकर्ता उनका पर्चा छीन कर भागने लगा. सपा कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट करने लगे और बाद में पुलिस ने उस आदमी को छुड़ा लिया. इस पूरी घटना का वीडियो स्थानीय पत्रकारों ने बनाया.
मंगलवार सुबह एडीएम ने सभी प्रत्याशियों को पर्चों की समीक्षा के लिए बुलाया था और उदयवीर सिंह धाकरे और राकेश यादव भी नामांकन सेंटर पहुंचे. उनका आरोप है कि उन्हें भाजपा के प्रत्याशी आशीष यादव और मारहरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक वीरेंद्र लोधी ने अपने समर्थकों के साथ रोकने की कोशिश की.

आरोप के मुताबिक़, जब उदयवीर सिंह दौड़ कर आगे बढ़े तो भाजपा विधायक वीरेंद्र लोध और ब्लॉक प्रमुख पुष्पेंद्र लोध उनके पीछे दौड़ पड़े और उन्हें पकड़ लिया और घसीट कर वापस बाहर ले जाने लगे. घटना से जुड़े वीडियो में पुलिस मौके पर तैनात दिख रही है, लेकिन जब उदयवीर सिंह को भाजपा के कार्यकर्ता पकड़ कर ले जाने लगते हैं तो पुलिस उन्हें छुड़ाने का प्रयास करती नज़र नहीं आती.
मौके से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में भाजपा प्रत्याशी आशीष यादव सपा के उदयवीर सिंह धाकरे के साथ धक्का-मुक्की करते हुए, उनकी गर्दन पर मारते हुए और उन्हें कलेक्टरेट परिसर से बाहर धकेलते हुए नज़र आ रहे हैं.
इस घटना के बारे में उदयवीर सिंह धाकरे का कहना है, "हम पहली बैरिकेड पर पहुंचे. पहली बैरिकेड पर यह स्पष्ट कर दिया गया कि आपकी सिक्योरिटी भी आपके साथ नहीं जाएगी और आप दोनों अकेले जाएंगे. हमने दूसरा बैरिकेड पार किया तो तीसरे बैरिकेड पर आशीष यादव आशु ख़ुद और बीसियों लोगों को लेकर मौजूद थे. और वहां पर बहुत सारे भाजपा के लोगों के अलावा पुलिस वाले भी थे.
उनके सामने उन्होंने पहले हमें रोका. जब हम जाने लगे तो उन्होंने हाथापाई की, झगड़ा किया. हमने अपना बचाव किया. बाद में पुलिस हमें आरओ के पास लेकर पहुँची और हमने आरओ को पूरी स्थिति बताई और अपना शपथ पत्र दे दिया. ऐसे आरओ पर हमारा क्या विश्वास, जहाँ मुख्यमंत्री चाहता हो कि हम सदन में ना पहुंचें, मुख्यमंत्री चाहता हो कि यहाँ गुंडागर्दी हो."
सोमवार को उदयवीर सिंह धाकरे ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने एटा के एसपी को अपना पर्चा छीने जाने की कोशिश की आशंका जताई थी. उनका आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी और उनकी मिलीभगत से पर्चा छिनवाने की कोशिश की.
सपा के दोनों पर्चे हुए ख़ारिज
मीडिया से बात करते हुए एटा के एडीएम (प्रशासन) आलोक कुमार ने इस बात की जानकारी दी कि दोनों उदयवीर सिंह धाकरे और राकेश यादव का पर्चा रद्द कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि, "आज सुबह 11 बजे समीक्षा शुरू हुई थी और लोगों को बुलाया गया था. सभी पार्टियों के लोग उपस्थित हुए. अंत में तीन पर्चे अपूर्ण पाए जाने के कारण निरस्त किए गए जिसमें उदयवीर सिंह का पत्र नियत प्रारूप में न होने की वजह से निरस्त किया गया. उनका अनुपूरक शपथ पत्र भी अपूर्ण था."

सपा के उदयवीर सिंह धाकरे और राकेश यादव के साथ-साथ एक निर्दलीय प्रत्याशी अनुज कुमार का भी पर्चा निरस्त कर दिया गया. तो सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा के दोनों उम्मीदवार निर्विरोध एमएलसी बन जाएंगे? इस बारे में एडीएम आलोक कुमार ने कहा, "विजयी उम्मीदवार तो अभी कोई घोषित नहीं हुआ है क्योंकि 24 मार्च तक नाम वापसी की तारीख़ है. उसके बाद ही कोई निर्णय होगा."
सपा के उम्मीदवारों के साथ मारपीट के आरोपों के बारे में आलोक कुमार ने कहा, "नामांकन क्षेत्र के बाहर प्रस्तावकों के बीच में विवाद हुआ था और जैसे ही पुलिस को संज्ञान मिला तो पुलिस ने मौके पर जा कर विवाद को शांत कराया और सभी को सुरक्षा दी गई ताकि सभी प्रत्याशी रिटर्निंग अफ़सर तक पहुँच सकें."
सोमवार को पर्चा छीनने वाली घटना के मामले में पुलिस ने अपनी तहरीर पर एक एफआईआर दर्ज की है जिसमें उन्होंने अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है. जब बीबीसी ने मंगलवार की घटना के बारे में एटा के एसएसपी और उदयशंकर सिंह और डीएम अंकित अग्रवाल से बात करने की कोशिश की तो उनसे फ़ोन पर संपर्क नहीं हो सका.
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क्या कहना है भाजपा नेताओं का
मारहरा से भाजपा विधायक वीरेंद्र लोधी ने कहा कि मंगलवार को नामांकन की समीक्षा के लिए सभी दलों के प्रत्याशियों को बुलाया गया था और उसका क्रम तय किया गया था. क्रमानुसार भाजपा को पहले अंदर जाना था. उनका आरोप है कि उदयवीर सिंह धाकरे और राकेश यादव पहले अंदर जाना चाह रहे थे जिसकी वजह से कहा-सुनी हुई. वीरेंद्र लोध ने कहा कि, "यह लोग पीछे से दौड़ते हुए आए और बहस करने लगे."
जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि उन्होंने उदयवीर सिंह का पीछा कर उन्हें पकड़ा क्यों, तो विधायक वीरेंद्र लोधी ने कहा, "जब माहौल बन रहा था तो अपने बचाव के लिए कोई भी क़दम उठाएगा. क्रम से जाने के लिए कहा गया था. हमलोग अपने प्रत्याशी के साथ खड़े थे. पीछे से यह लोग आए और विरोध करने लगे. आगे-पीछे जाने की बात को लेकर बहस हुई."
इस बारे में सपा प्रत्याशी उदयवीर सिंह धाकरे का कहना है कि अगर उन्होंने किसी सरकारी नियम का उल्लंघन किया है तो उन पर करवाई करने का अधिकार पुलिस का है ना कि भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का.
जब बीबीसी ने मारपीट के बारे में विधायक वीरेंद्र लोधी से पूछा तो उन्होंने कहा, "हमारा ऐसा कोई भाव नहीं रहता है. हमलोग हमेशा क़ानून का पालन करते हैं और शिष्टाचार में रहते हैं. यह आरोप राजनीतिक है."
बीबीसी ने तस्वीरों और वीडियो में सपा प्रत्याशी के साथ धक्का-मुक्की करते दिख रहे भाजपा प्रत्याशी आशीष यादव से भी बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

फ़र्रुख़ाबाद में भी हुई सपा प्रत्याशी से मारपीट
सोमवार को फ़र्रुख़ाबाद में सपा के एमएलसी प्रत्याशी हरीश कुमार यादव का भी आरोप है कि नामांकन केंद्र के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने घेर लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की. घटना से जुड़े वीडियो में नज़र आ रहा है कि उन्हें दौड़ा कर घेरा जा रहा है.
घटना के बारे में हरीश कुमार यादव ने बीबीसी को बताया, "मेरे हाथ में जो परचा था वो फाड़ दिया गया. हम अपने अधिवक्ता के साथ जा रहे थे, हमें क्या मालूम था कि उनका अपहरण करने का इरादा है. उनके क़रीब सवा सौ आदमी लगे हुए थे. उन्होंने एकदम अटैक किया, जो आपके सामने है. सारा पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बन कर देखता रहा. उनकी अपहरण की पूरी कोशिश थी लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए."
ग़ौरतलब है कि एटा और फ़र्रुखाबाद दोनों घटनाओं में अभी तक किसी भी प्रत्याशी ने तहरीर नहीं दी है. हरीश कुमार यादव का कहना है कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और स्वस्थ होने पर वो मामले में तहरीर देंगे.
(एटा के पत्रकार अभितांशु शाक्य ने भी ख़बर में इनपुट दिया है )
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