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सिब्बल के गांधी परिवार पर हमले के बाद कांग्रेस का पलटवार, क्या कहा?
कांग्रेस में असंतुष्ट G-23 गुट के नेताओं में से एक कपिल सिब्बल का गांधी परिवार पर हमला सोनिया-राहुल के वफादारों को रास नहीं आया है.
कपिल सिब्बल ने अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि गांधी परिवार को पार्टी का नेतृत्व छोड़ देना चाहिए. नेतृत्व का मौका अब किसी और को मिलना चाहिए. इंटरव्यू के सामने आते ही कांग्रेस में गांधी परिवार के वफादार नेताओं ने उन पर तीखा वार किया है. पार्टी के सीनियर नेताओं ने सिब्बल पर आरएसएस और बीजेपी की भाषा बोलने का आरोप लगाया है.
कांग्रेस के बड़े नेताओं का सिब्बल पर पलटवार
पार्टी में राहुल गांधी के बड़े समर्थक और लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी चाहती है कि गांधी परिवार कांग्रेस का नेतृत्व छोड़ दे ताकि इसकी हत्या हो जाए और 'आइडिया ऑफ इंडिया' ध्वस्त हो जाए.
टैगोर ने ट्वीट कर कहा, '' आरएसएस और बीजेपी नेहरू-गांधी को नेतृत्व से क्यों हटाना चाहते हैं? क्योंकि गांधी के नेतृत्व के बगैर कांग्रेस जनता पार्टी बन जाएगी. इसके बाद कांग्रेस की हत्या आसान हो जाएगी. फिर इसके बाद भारत के विचार की हत्या भी इतनी आसानी से हो जाएगी''.
'' कपिल सिब्बल ये जानते हैं इसीलिए वो आरएसएस या बीजेपी की भाषा बोले रहे हैं. ''
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी ट्वीट कर सिब्बल पर हमला बोला. खेड़ा ने कहा कि सिब्बल को नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने के बजाय पार्टी अध्यक्ष के लिए चुनाव कराने चाहिए.
उन्होंने लिखा, '' डॉ. हर्षवर्द्धन ने आपको चांदनी चौक से हटने के लिए नहीं कहा था. उन्होंने चुनाव लड़ा और कपिल सिब्बल को हराया. जो कांग्रेस का नेतृत्व करना चाहते हैं उन्हें हर दिन मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाने के बजाय अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव लड़ना चाहिए. ''
सिब्बल ने इंटरव्यू में क्या कहा था?
सिब्बल ने अंग्रेजी अखबार ' इंडियन एक्सप्रेस' को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी को पार्टी नेतृत्व से हट जाना चाहिए. उन्हें पार्टी की कमान अब किसी दूसरे को दे देना चाहिए.
इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, '' कांग्रेस नेतृत्व ख्याली दुनिया में जी रहा है, जबकि मैं 'सबकी कांग्रेस' चाहता हूं, जबकि कुछ लोग 'घर की कांग्रेस' चाहते हैं. ''
सिब्बल का यह बयान कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दो दिन बाद आया. विधानसभा चुनावों में पार्टी की बुरी हार की समीक्षा के लिए रविवार को कार्यसमिति की बैठक हुई थी. इसमें पांच घंटे तक हार की वजहों पर चर्चा हुई थी. बैठक के दौरान सोनिया गांधी को ही नेतृत्व की कमान थामे रखने को कहा गया. कार्यसमिति में पार्टी को मजबूत करने लिए कुछ उपाय भी सुझाए गए.
कार्यसमिति की बैठक में सोनिया और राहुल की ओर से कहा गया कि वे पार्टी के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं. लेकिन कार्यसमिति ने उनकी यह पेशकश खारिज कर दी. माना जा रहा था कि इसके जरिये दोनों पार्टी नेतृत्व से हटने की इच्छा जता रहे थे.
बहरहाल, कांग्रेस कार्यसमिति ने सोनिया के नेतृत्व में भरोसा जताया है. पार्टी ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के सभी नेताओं का एक वीडियो ट्वीट किया है. पार्टी ने कहा है , '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे. हम अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे. ''
इसीबीच चुनाव में पार्टी की हार के बाद अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में कांग्रेस अध्यक्षों से इस्तीफा देने को कहा है. गोवा और उत्तराखंड ने पार्टी के आदेश के बाद इस्तीफ़ा दे दिया है.
पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से पूर्व सीएम चरणजीत सिंह सरकार के लगातार विरोध की वजह से पार्टी को चुनाव में बड़ा झटका लगा है.
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