यूक्रेन संकट: 16,000 भारतीय लौटे, सूमी में फंसे 700 भारतीय छात्र किस हाल में- प्रेस रिव्यू

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यूक्रेन में फंसे भारतीयों की वतन वापसी के लिए चलाए गए ऑपरेशन गंगा के तहत अब तक 76 विमानों से 16,000 नागरिकों को भारत लाया जा चुका है. हालांकि, अभी भी सूमी में 700 छात्र फंसे हैं. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. आज के प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.
सरकार ने रविवार को अभियान के आख़िरी चरण का एलान कर दिया है. लेकिन सूमी में फंसे छात्रों का भविष्य अभी भी अनिश्चित है. राजधानी कीएव से 300 किलोमीटर दूर यूक्रेन के उत्तर-पूर्व में स्थित सूमी में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
बर्फ़ पिघलाकर प्यास बुझाने को मजबूर और भोजन की कमी झेल रहे सैकड़ों भारतीय छात्र हर सुबह सड़क पर इस आस में खड़े होते हैं कि शायद आज वो दिन हो, जब उन्हें इस युद्धग्रस्त देश से निकाल लिया जाए. हालांकि, ये इंतज़ार लंबा होता जा रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में अभी भी ऐसा कोई सुरक्षित रास्ता नहीं जहां से भारतीयों को रूसी सीमा तक ले जाया जा सके.
हंगरी में भारतीय दूतावास ने संकेत दिए हैं कि बचाव अभियान अपने आख़िरी चरण में है.
भारत अपने नागरिकों को रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और मॉल्डोवा से ला रहा है. भारतीयों को लेकर पहली उड़ान बुखारेस्च से 26 फ़रवरी को भारत पहुंची थी.
अधिकारियों के मुताबिक़, बीते 24 घंटे में 13 विमानों से क़रीब 2500 भारतीयों को वापस लाया गया है. उन्होंने कहा कि हंगरी, रोमानिया और पोलैंड में फंसे भारतीयों को लाने के लिए अगले 24 घंटे में सात उड़ानें और जानी हैं.
एक अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन गंगा के तहत अभी तक 76 विमानों में 15 हज़ार 920 भारतीयों को लाया गया है. इनमें से 13 विमान बीते 24 घंटे में पहुंचे हैं.
भारत का बढ़ता प्रभाव -पीएम मोदी ने किया ज़िक्र
रविवार को पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन गंगा की सफलता का ज़िक्र करते हुए कहा कि वैश्विक पटल पर भारत का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. उन्होंने कहा, "ऑपरेशन गंगा के ज़रिए हम युद्ध क्षेत्र से हज़ारों भारतीयों को सुरक्षित वापस ले आए. ये भारत का बढ़ता प्रभाव ही है जिससे हज़ारों छात्र यूक्रेन से अपनी मातृभूमि तक आ सके. बड़े-बड़े देशों को अपने नागरिकों को निकालने में दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है."
मोदी सरकार में मंत्री वीके सिंह ने ट्वीट करके बताया कि भारतीय छात्र हरजोत सिंह को भी सोमवार को दिल्ली लाया जा रहा है. उन्हें कीएव से भागने की कोशिश के दौरान गोली लगी थी. वहीं, एक मार्च को खारकीएव में हुई गोलाबारी की चपेट में आने से कर्नाटक के मेडिकल छात्र नवीन एसजी की मौत हो गई थी.
सूमी में फंसे कुछ छात्र सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां कर रहे हैं. ऐसे ही एक छात्र ने वीडियो संदेश में लिखा, "यहां पानी नहीं है, बिजली आपूर्ति भी बाधित है. एटीएम में पैसे नहीं हैं. लड़कियों के पास सैनिटरी नैपकिन नहीं हैं."
भारत ने शनिवार को रूस और यूक्रेन की सरकार से संपर्क करते हुए ये संदेश दिया कि वे सूमी में तत्काल युद्धविराम लागू करें और 700 भारतीयों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाएं. रविवार को यूक्रेन पर रूस के हमले का 11वां दिन था.
आज ख़़त्म होगी उत्तर प्रदेश में वोटिंग, पूर्वांचल पर सबकी नज़रें

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को आख़िरी चरण का मतदान हो रहा है. आख़िरी चरण में पूर्वांचल के नौ ज़िलों में फैली 54 सीटों के लिए वोटिंग होनी है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राज्य में बीजेपी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी मानी जा रही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की लोकसभा सीट आज़मगढ़ भी शामिल हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, आज 2.03 करोड़ मतदाता 613 उम्मीदवारों के भविष्य का फै़सला करेंगे.
54 में से 11 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं. सोनभद्र ज़िले की दो सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं. इस चरण में चकिया (चंदौली), रॉबर्ट्सगंज और दुद्धी (सोनभद्र) को नक्सल प्रभावित इलाका घोषित किया गया है.
वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिनों तक वाराणसी में रहे तो वहीं, अखिलेश यादव ने प्रचार का आख़िरी दिन आज़मगढ़ में बिताया.
कभी समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले पूर्वांचल में साल 2017 के चुनाव में बीजेपी ने हवा बदली. यहां 54 में से 29 सीटों पर बीजेपी जीती. सपा के ख़ाते में 11 सीटें गईं तो बहुजन समाज पार्टी छह सीटों पर जीत पाई थी.
निषाद पार्टी ने भदोही के ज्ञानपुर में एक सीट जीती थी तो वहीं बीजेपी की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने चार सीटें जीती थीं. इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने एसपी से गठबंधन किया है, तो वहीं निषाद पार्टी बीजेपी के साथ आ गई है.
फ़लस्तीन में भारत के प्रतिनिधि मुकुल आर्या दफ़्तर में मृत मिले

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फ़लस्तीन क्षेत्र में भारत के प्रतिनिधि मुकुल आर्या का शव रविवार को रामल्ला स्थित उनके कार्यालय परिसर में मिला. फ़लस्तीन और भारत दोनों ही जगहों पर अधिकारियों की ओर से अभी तक आर्या की मौत के कारण को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, 2008 बैच के आईएफ़एस अधिकारी मुकुल आर्या के शव को भारत भेजने के लिए फ़लस्तीनी विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली से संपर्क किया है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट किया, "रामल्ला में भारत के प्रतिनिधि की मौत की जानकारी पाकर स्तब्ध हूं. वे बेहद प्रतिभाशाली अधिकारी थे जिन्हें जीवन में बहुत कुछ करना बाकी था."
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आर्या ने दिल्ली, पेरिस में यूनेस्को के स्थायी प्रतिनिधिमंडल, काबुल और मॉस्को में भारत के दूतावासों में काम किया था. साल 2008 में भारतीय विदेश सेवा जॉइन करने से पहले आर्या दिल्ली में पले-बढ़े थे.
फ़लस्तीनी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट के ज़रिए बताया कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्षों से संपर्क किया है ताकि आर्या के शव को भारत भेजने का प्रबंध किया जा सके.
एनएसई फ़्रॉड केस में पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण गिरफ़्तार

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण को रविवार को सीबीआई ने एनएसई को-लोकेशन मामले में गिरफ़्तार कर लिया है. चित्रा पर आरोप है कि वो 'हिमालय के किसी योगी' के इशारे पर काम करती थीं और संवेदनशील जानकारी भी साझा करती थीं.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक़, इस मामले में ये दूसरी हाई-प्रोफ़ाइल गिरफ़्तारी है. इससे पहले सीबीआई ने बीते महीने एनएसई के पूर्व ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफ़िसर और रामकृष्ण के भरोसेमंद माने जाने वाले आनंद सुब्रमण्यम को गिरफ़्तार किया था.
रामकृष्ण पर ये भी आरोप है कि उन्होंने आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन किया था. सेबी ने 11 फ़रवरी को दिए अपने आदेश में सुब्रमण्यम की नियुक्ति के लिए चित्रा रामकृष्ण पर तीन करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था.
सेबी के मुताबिक़, सुब्रमण्यन की नियुक्ति सहित साल 2013 से 2016 के बीच एनएसई की एमडी और सीईओ रहते हुए रामकृष्ण ने कई महत्वपूर्ण फ़ैसले एक अज्ञात "योगी" से प्रभावित होकर लिए, जो संभवतः हिमालय पर रहते थे.
हालांकि, अर्न्स्ट एंड यंग की ऑडिट रिपोर्ट में ये संकेत मिले कि ये योगी कोई और नहीं बल्कि आनंद सुब्रमण्यम ही थे. हालांकि जांच एजेंसियां योगी की पहचान को लेकर अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं.
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