गंगूबाई काठियावाड़ी के रिलीज़ पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

Bhansali production

इमेज स्रोत, Bhansali production

इमेज कैप्शन, Bhansali production
    • Author, मधु पाल, सुचित्र मोहंती
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने गंगूबाई काठियावाड़ी फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है और फ़िल्म को बिना किसी बदलाव रिलीज़ करने की अनुमति दे दी है. न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और जेके माहेश्वरी की एक बेंच ने ये आदेश दिए हैं. अब ये फ़िल्म तय दिन यानी 25 फ़रवरी को रिलीज़ होगी.

संजय लीला भंसाली की तरफ़ से वकील आर्यमा सुंदरम ने दलील दी,'' हम समाज सुधार का काम कर रहे हैं और कोई बुरा नहीं कर रहे हैं. ये प्रेरित करने वाली फ़िल्म है और ये बताया गया है कि कैसे उनकी छवि बढ़ी और अपने इलाके के लिए उन्होंने काम किया.''

वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी का कहना था, ''ये किताब साल 2011 में आई थी और ये अपमानजनक कतई नहीं है.''

वहीं गंगूबाई के दत्तक पुत्र की तरफ से वकील राकेश सिंह ने वकील सुंदरम और रोहतगी का विरोध किया और कहा ,'' ये फ़िल्म किताब पर आधारित है और अगर किताब ही मानहानिकारक है तो फ़िल्म भी मानहानिकारक है.''

इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना था,'' इसमें क्या मानहानिकारक है उसका सबूत दे साथ ही कोर्ट का कहना था कि इस मामले में याचिकार्ता से क़ानूनी तौर पर गोद लिए जाने के दस्तावेज़ मांगे.''

इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील राकेश सिंह का कहना था, '' जैसा की कोर्ट जानता है पहले अनाथ बच्चों का गोद लेना संभव नहीं था.''

इस पर कोर्ट का कहना था ,''ऐसे में इस मामले में क़ानूनी तौर पर गोद ही नहीं लिया गया.''

वीडियो कैप्शन, गंगूबाई बनने के लिए आलिया भट्ट को क्या करना पड़ा?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म निर्माताओं से गंगूबाई काठियावाड़ी का नाम बदलने का सुझाव दिया था

ये मामला इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में गया था जहां कोर्ट ने इस फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था. हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

गंगूबाई के परिवार की तरफ से केस लड़ रहे वकील नरेंद्र दुबे ने बीबीसी से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा,'' हम केस हारे नहीं. ये केस आगे भी चलेगा लेकिन परिवार की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग नहीं मानी गई है और फ़िल्म रिलीज़ होगी.''

गंगूबाई के गोद लिए गए बच्चों ने बीबीसी से बातचीत में ये आरोप लगाया था कि उनकी मां एक सोशल वर्कर थी और फ़िल्म में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है.

गंगूबाई ने चार बच्चों को गोद लिया था जिसमें दो लड़के और दो लड़की शामिल है और अब ये परिवार बढ़कर करीब तीस सदस्यों का हो गया है.

परिवार की क्या थी आपत्ति

गंगूबाई की नातिन भारती ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि गंगूबाई का ट्रेलर अगस्त महीने में निकला, तब हमें पता चला कि हमारी नानी के नाम पर ऐसा कुछ हो रहा है और जो बातें सामने आई है वो सब ग़लत हैं.

उन्होंने बताया , ''इस फ़िल्म के ट्रेलर में जो भी दिखाया है वो गंदा है. आज़ाद नगर में ये भाषण देते हुए दिखाया कि हमें श्रीमति किसी ने बनने नहीं दिया. अगर अभी गूगल होता तो पता चलता ना कि उन्होंने क्या कहा था. जो बनते बना है वो लिखा गया है. गंगूबाई इस तरह से धंधा करती थी, कोई फलाना लाला उसके साथ बलात्कार किया. सब अपने मन से निकाला. हमें मुंह छिपाना पड़ रहा है. हम सोसाइटी में रहते तो पता तो चलता है ना.''

वो आगे कहती हैं, ''हमने लोगों को बताया कि हमारी नानी ये थी अब लोग आकर ये पूछते हैं कि अरे तुम्हारी ऐसा बेकग्राउंड है क्या? इस फ़िल्म पर रोक लगे और हम नहीं चाहते ही हमारी नानी को इस तरह से दिखाया जाए. इतना हम सहन नहीं करेंगे.''

Bhansali production

इमेज स्रोत, Bhansali production

इमेज कैप्शन, Bhansali production

गंगूबाई के गोद लिए बेटे बाबूजी रावजी शाह अब 75 वर्ष के हैं.

वे बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि उनकी मां सोशल वर्कर थी और उनका दो बच्चों का परिवार कमाठीपुरा में ही पला बढ़ा. लेकिन जब से मीडिया में ये ख़बर आने लगी उन्होंने ये इलाका छोड़ दिया.

वो कहते हैं, ''मेरे बच्चे बड़े हो गए हैं. स्कूल-कॉलेज जाते वक्त लोग उन्हें रास्ते में नाम देकर पुकारने लगे थे. इसलिए हमें वो इलाका छोड़ना पड़ा. जो भी फ़िल्म में दिखाया जा रहा है वो सब ग़लत है. जब हमें साल 2020 के अगस्त महीने में पता चला था कि मेरी मां के नाम से फ़िल्म आ रही है तभी हमने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और लड़ रहे हैं.''

विवाद और मामला

गंगूबाई के परिवार की तरफ से केस लड़ रहे वकील नरेंद्र दुबे बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि साल 2020 में जब इस फ़िल्म का प्रोमो आया था तभी हमने संजय लीला भंसाली, आलिया भट्ट, भंसाली प्रोडक्शंस, हुसैन ज़ैदी, सभी को नोटिस भेजा था.

दरअसल ये फ़िल्म 'माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई' नाम की किताब पर आधारित है, जिसे एस. हुसैन ज़ैदी और जेन बोर्गेस ने लिखी है. भंसाली प्रोडक्शन की इस फ़िल्म में अभिनेत्री आलिया भट्ट ने मुख्य किरदार निभाया है.

Bhansali production

इमेज स्रोत, Bhansali production

इमेज कैप्शन, Bhansali production

इस नोटिस के बारे में नरेंद्र दुबे बताते हुए कहते हैं, ''नोटिस में संबंधित पक्षों को ये कहा गया था कि आप जो भी आपत्तिजनक कंटेंट आप बना रहे हैं उसको ना बनाएं क्योंकि इस पर गंगूबाई के परिवार को सख़्त आपत्ति है. साथ ही जिस तरह से उनकी मां को उसमें वेश्या और माफ़िया डॉन के तौर पर दिखाया गया है वह अपमानजनक है.''

वकील के अनुसार इस बारे में उन्हें सिर्फ हुसैन ज़ैदी का जवाब आया था और इसके बाद तो उसके बाद गंगूबाई के परिवार की तरफ़ से इस फ़िल्म को बनाने और इसकी रिलीज़ पर रोक लगाने के लिए सिटी सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया था. उसके साथ ही संबंधित पक्षों के ख़िलाफ़ हम लोगों ने अपराधिक याचिका भी दायर की और फिर मुकदमे की सुनवाई उसी हिसाब से बढ़ती गई. ये मामले बाद में बॉम्बे हाई गया और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

किताब के लेखक हुसैन ज़ैदी की तरफ से वकील मधु गाड़ोदिया ने बीबीसी से बातचीत में शुरूआती चरण के बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट का हवाला देते हुए कहती हैं कि दिनांक 17 फरवरी, 2021 को अपने आदेश में कहा था कि ये मामला मानहानि के संबंध में अयोग्य है क्योंकि मानहानी की कार्यवाही का अधिकार जिस व्यक्ति के पास था उसकी मृत्यु हो चुकी है.

Bhansali production

इमेज स्रोत, Bhansali production

इमेज कैप्शन, Bhansali production

उनके अनुसार ऐसे में इस मुकदमे को योग्य बनाने का कोई आधार ही नहीं है.

ये फ़िल्म गंगूबाई की ज़िंदगी से प्रेरित है, जो 1960 के दशक में मुंबई के कमाठीपुरा में 'वेश्यालय' चलाती थीं. फ़िल्म 'माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई' नाम की किताब पर आधारित है.

गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था. उनका जन्म गुजरात के काठियावाड़ में हुआ था और वो वहीं पलीं-बढ़ीं.

'माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई' के सह-लेखक एस. हुसैन ज़ैदी ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि वो कोठा चलाती थीं. उन्हें धोखा देकर इस धंधे में लाया गया था. वो काठियावाड़ के सम्पन्न परिवार से थीं. परिवार के लोग पढ़े-लिखे थे और वकालत से जुड़े थे. गंगा को रमणीकलाल नाम के एक अकाउंटेंट से प्यार हो गया. उनका परिवार इस रिश्ते के लिए राज़ी नहीं था तो वो मुंबई भाग आईं.

हिंदी फ़िल्मों और विवादों का रिश्ता गहरा है और संजय लीला भंसाली की फ़िल्मों के साथ विवाद का ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले इस निर्देशक और निर्माता की फ़िल्म गोलियों की रासलीला रामलीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत विवादों में रह चुकी है.

ISOWTY

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)