चंडीगढ़ में बत्ती गुल: क्यों घुप्प अंधेरे में है भारत का 'सिटी ब्यूटीफ़ुल'

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- Author, सरबजीत सिंह धालीवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, चंडीगढ़
'मैं पिछले 14-15 साल से चंडीगढ़ में काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी.'
ये बात सेक्टर-16 के बाजार में पराठे का ठेला लगाने वाले राजू ने कही. वो मूल रूप से बिहार के हैं और यहां कमाई के लिए आए हैं.
मंगलवार रात करीब 10 बजे बीबीसी से बातचीत में कुछ और स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजली कर्मियों की हड़ताल से आधा शहर अंधेरे में डूब गया.
रिंकू नाहर नाम के एक अन्य व्यक्ति ने भी कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ में पहले कभी 'ऐसी दिक्कत का सामना नहीं किया. जब बिजली आपूर्ति इस तरह से ठप हुई हो.'
स्थानीय लोग अपने इस शहर को प्यार से 'द सिटी ब्यूटीफ़ुल' कहते हैं. उनके लिए ये वाक़ई अपनी तरह का पहला वाकया है.

72 घंटे की हड़ताल
दरअसल, चंडीगढ़ में बिजली कर्मियों की हड़ताल से आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई.
चंडीगढ़ दो राज्यों (पंजाब और हरियाणा) की संयुक्त राजधानी है, लेकिन इसका प्रशासन केंद्र के अंतर्गत आता है. ये एक केंद्र शासित प्रदेश है. पंजाब के राज्यपाल इस शहर के मुख्य प्रशासक भी हैं.
यहां बिजली कर्मचारी लंबे समय से 'चंडीगढ़ बिजली बोर्ड' के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन ने विरोध को नजरअंदाज करते हुए बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है.
बिजली कर्मचारियों ने इसके विरोध में 72 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है. हड़ताल सोमवार की मध्यरात्रि 12 बजे शुरू हुई और बुधवार को ख़बर लिखे जाने तक जारी है.
शहर के कई इलाकों में अब भी बिजली नहीं है. लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और वो लगातार शिकायत कर रहे हैं.
शहर की ट्रैफिक लाइट भी बंद हैं और ट्रैफिक नियंत्रित करने का काम पुलिसकर्मी मैनुअल तरीके से कर रहे हैं.
बिजली विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि वो 'हड़ताल के लिए तय किए 72 घंटों के दौरान काम नहीं करेंगे.'
हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हड़ताल की वजह से शहर में बने अभूतपूर्व बिजली संकट का संज्ञान लिया है और मुख्य अभियंता को तलब किया है.
अदालत ने कहा कि बिजली गुल होने से न केवल आम नागरिक बल्कि अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
वहीं, महामारी के कारण घर से परीक्षा देने वाले छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी.
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में कोर्ट की सुनवाई इससे प्रभावित हो सकती है.
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प्रशासन की सख्ती
दूसरी तरफ, चंडीगढ़ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अगले छह महीने के लिए बिजली कर्मियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है.
बिजली सेवाएं प्रभावित होने की पुष्टि करते हुए चंडीगढ़ के मेयर ने कहा, "पंजाब और हरियाणा के 400 कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के लिए बुलाया गया है."

'फेल हुए इन्वर्टर'
बीबीसी पंजाबी से बात करते हुए कई लोगों ने निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों की भी बात की. उन्होंने आरोप लगाया, "यह सब भाजपा सरकार की निजीकरण की नीतियों के कारण हुआ है."
स्थानीय लोगों ने बीबीसी को अपनी दिक्कतें भी बताईं. कई लोगों ने बताया कि बिजली गुल होने के बाद अब घरेलू इन्वर्टर भी काम करना बंद कर रहे हैं और उन्हें मोमबत्तियों का सहारा लेना पड़ रहा है.
जिन घरों में बच्चों की परीक्षा चल रही हैं या ऑनलाइन क्लास हो रही है, वो भी दिक्कतों से जूझ रहे हैं. चंडीगढ़ से कुछ बच्चों को पढ़ने और पेपर देने के लिए पंजाब और हरियाणा के दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है.
तमाम परिवारों में वृद्ध और बीमार सदस्यों की देखभाल में भी हड़ताल की वजह से काफी मुश्किल हो रही है.
कई लोग हैरानी जाहिर करते हुए कहते हैं कि ये हड़ताल अचानक नहीं हुई.
वो दावा करते हैं, "कर्मचारियों ने इसकी घोषणा काफी समय पहले की थी, लेकिन फिर भी प्रशासन पुख्ता इंतजाम नहीं कर सका."
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