उत्तर प्रदेश चुनाव: तीसरे चरण में इन नेताओं की क़िस्मत का होगा फ़ैसला

इमेज स्रोत, Getty Images
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान 20 तारीख को होने जा रहा है.
इस चरण में 16 ज़िलों की 59 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. तीसरे चरण में 627 उम्मीदवारों की क़िस्मत का फ़ैसला होगा.
मतदान सवेरे सात बजे शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा.
जिन ज़िलों में मतदान होगा उनमें हाथरस, फिरोज़ाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, फर्रुख़ाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा शामिल हैं.
जहां तीसरे चरण का चुनाव होने जा रहा है उसे समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है लेकिन पिछली बार बीजेपी ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था. 2017 के चुनावों में, बीजेपी ने 59 में से 49 सीटें जीती थीं, जबकि सपा नौ पर सिमट गई थी. कांग्रेस को एक सीट मिली थी और बहुजन समाज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी.
ऐसे में एक नज़र डालते हैं उन उम्मीदवारों पर जिनपर सबकी निगाहें टिकी होंगी.

इमेज स्रोत, Getty Images
अखिलेश यादव
करहल विधानसभा सीट, जहां से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं, तीसरे चरण में रविवार को वहां भी मतदान होना है.
इस सीट से बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा है. बीजेपी ने चुनाव आयोग से करहल के सभी बूथों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की थी.
करहल अखिलेश यादव के पारिवारिक गांव सैफ़ई से सटी हुई सीट भी है. करहल मैनपुरी लोकसभा सीट में आती है, जहां से मुलायम सिंह मौजूदा सांसद हैं.
करहल से ही मुलायम सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और वहां बतौर शिक्षक नौकरी की थी. ऐसे में तीसरे चरण के चुनाव में ये सीट बेहद अहम मानी जा रही है.

इमेज स्रोत, Ani
एसपी बघेल
अखिलेश के ख़िलाफ करहल के चुनावी मैदान में उतरे एसपी बघेल पर सबकी नज़रें टिकी होंगी. एसपी बघेल केंद्रीय क़ानून राज्य मंत्री हैं.
ये जानना दिलचस्प है कि एसपी बघेल समाजवादी पार्टी, बसपा के बाद अब बीजेपी के साथ आए हैं.
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि एसपी सिंह बघेल के आने से करहल और आसपास की सीटों के सामाजिक और जातीय समीकरण पर असर पड़ सकता है.
अब देखना ये है कि एसपी सिंह बघेल अखिलेश यादव को घेरने में कितना कामयाब होते हैं.

इमेज स्रोत, FACEBOOK/SHIVPAL SINGH YADAV
शिवपाल यादव
एक और चेहरा जो तीसरे चरण के मतदान के दौरान फोकस में होगा, वो हैं शिवपाल यादव.
रविवार का मतदान समाजवादी पार्टी प्रमुख के चाचा शिवपाल सिंह यादव के भाग्य पर भी मुहर लगाएगा, जो अपनी पारंपरिक जसवंत नगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
इटावा ज़िले की जसवंत नगर सीट पर अधिकतर बार मुलायम सिंह के कुनबे का ही कब्ज़ा रहा है. सिर्फ एक बार 1980 में यहां कांग्रेस ने अपना परचम लहराया था. 1996 से लगातार मुलायम सिंह के भाई और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यहां से विधायक चुने जाते रहे.
बीजेपी ने शिवपाल यादव के सामने विवेक शाक्य को मैदान में उतारा है.

इमेज स्रोत, Satish Mahana/Facebook
सतीश महाना
इस चरण में मैदान में आए बीजेपी के प्रमुख चहरों में एक कैबिनेट मंत्री सतीश महाना भी हैं, जो कानपुर के महाराजपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.
लगातार सात बार से विधायक रहे सतीश महाना बीते 32 साल से लगातार कानपुर में कमल खिला रहे हैं.
वो पांच बार लगातार मुस्लिम बहुल कैंट सीट से विधायक रहे और दो बार महाराजपुर विधानसभा सीट से जीते.
कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कनिष्क पांडेय को खड़ा किया है. कनिष्क पांडेय प्रियंका गांधी के क़रीबी माने जाते हैं.
समाजवादी पार्टी ने उनका मुक़ाबला करने के लिए फतेहबहादुर गिल को मैदान में उतारा है. वहीं बसपा यहां ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश में है. बसपा ने सुरेंद्र पाल को मैदान में उतारा है.
इस बार यहां चुनावी लड़ाई ज़्यादा रोचक नज़र आ रही है.

इमेज स्रोत, Asim arun/facebook
असीम अरुण
कन्नौज सदर सीट से बीजेपी के टिकट पर लड़ रहे पूर्व आईपीएस अफ़सर असीम अरुण पर भी सभी की नज़रें होगी.
असीम अरुण पूर्व पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ दलित समुदाय से भी हैं.
चुनाव से ठीक पहले यहां के कारोबारियों पर भ्रष्टाचार से जुड़ी छापेमारियों के बीच एक पुलिस अधिकारी को मैदान में उतारकर बीजेपी दलितों से जुड़ी अपनी राजनीति को नयी दिशा देने की भी कोशिश कर रही है.
यहां असीम अरुण का मुक़ाबला लगातार तीन बार सपा विधायक रहे अनिल दोहरे से है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












