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हिजाब विवाद: सोमवार को जारी रहेगी सुनवाई, अगले आदेश तक धार्मिक पोशाक पहनने पर रोक
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
छात्राओं के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट के तीन जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू कर दी है. गुरुवार को शुरुआती दलीलें सुनने के बाद बेंच ने कहा कि अब अगले सोमवार को आगे की सुनवाई होगी.
साथ ही कर्नाटक हाई कोर्ट ने जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता तब तक के लिए छात्रों को कोई ऐसा कपड़ा नहीं पहनने का आदेश दिया है जो लोगों को उकसा सकता है, चाहे वह हिजाब या केसरिया कपड़ा ही क्यों न हो.
कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस रितु राज अवस्थी ने एक मुसलमान महिला जज को इस तीन सदस्यीय बेंच का सदस्य बनाया है.
जस्टिस जैबुनिसा मोहिउद्दीन खाजी इस बेंच की सदस्य हैं जिन्हें पिछले साल एक ज़िला जज के पद से पदोन्नति देकर हाईकोर्ट का जज बनाया गया था.
इस बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश ख़ुद कर रहे हैं. पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति कृष्णा दीक्षित हैं जिन्होंने तीन दिनों तक हिजाब मामले पर सुनवाई करने के बाद इसे बड़ी पीठ के पास भेजने का फैसला लिया क्योंकि इस मामले में संवैधानिक सवाल और व्यक्तिगत क़ानून दोनों शामिल हैं.
बिगड़ते हालात को देखते हुए मंगलवार को राज्य सरकार ने तीन दिनों तक सभी हाईस्कूल और कॉलेज बंद करने का आदेश दिया.
कहां से शुरू हुआ हिजाब विवाद
कर्नाटक के उडुपी ज़िले में एक कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू किया. उडुपी कर्नाटक के उन ज़िलों में शामिल हैं जो सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील हैं.
कॉलेज ने कहा कि उसने छात्राओं को परिसर में हिजाब पहनने से नहीं रोका बल्कि केवल क्लासरूम में हिजाब उतारकर आने को कहा है. लेकिन प्रदर्शन कर रही छात्राओं का मत इससे अलग था. उनका कहना है कि क्लास के अंदर भी उन्हें हिजाब पहनने दिया जाए.
हिजाब पहनने से रोके जाने पर छात्राओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. उनका कहना है कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है. लिहाज़ा उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता.
विवाद दूसरे कॉलेजों तक कैसे पहुंचा?
उडुपी के कॉलेज में प्रदर्शन कर रही छात्राओं की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इसके बाद कुछ अन्य कॉलेजों में हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल पहनना शुरू कर दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने साफ़ किया कि हिजाब और भगवा शॉल दोनों ही कॉलेज परिसर में नहीं चलेंगे.
बीते सप्ताह कर्नाटक के उडुपी ज़िले के कुंदापुर में एक कॉलेज के प्रवेश द्वार के बाहर खड़ी हिजाब पहनी छात्राओं का वीडियो वायरल हुआ जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ा.
हिंदू छात्र-छात्राओं ने भी हिजाब पहनने वाली स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ मार्च शुरू कर दिया. हालांकि, मंगलवार तक सब शांतिपूर्वक चल रहा था. मामले में छात्राओं की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई से चंद घंटों पहले ही कुछ शहरों में छात्रों द्वारा पत्थरबाज़ी और आगज़नी की घटनाएं सामने आईं.
शिवमोगा ज़िले में छात्रों का एक समूह कॉलेज में भगवा झंडा फ़हराते कैमरे में क़ैद हो गया जिसके बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए.
मुस्कान प्रकरण ने मामले को अंतरराष्ट्रीय बनाया
इसी दिन मंड्या ज़िले में हिजाब पहनी एक छात्रा को भगवा गमछे वाले युवकों की एक भीड़ ने घेरा और लगातार 'जय श्री राम' के नारे लगाए. इसके जवाब में मुस्कान नाम की इस छात्रा ने तेज़ आवाज़ में 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाया. यह वीडियो देश ही नहीं विदेश में भी वायरल हुआ.
पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूज़र्स ने मुस्कान को 'शेरनी' बताया तो वहीं, इमरान ख़ान के मंत्रियों ने इस घटना के ज़रिए भारत की मोदी सरकार पर निशाना साधा. वहीं, नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने भी कहा कि भारतीय नेता मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकें.
राज्य सरकार ने क्या कहा?
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री नागेश बीसी ने कॉलेज प्रशासन का समर्थन करते हुए कहा है कि परिसर में भगवा गमछे और हिजाब दोनों ही पर रोक लगनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं और प्रदर्शन के लिए उकसा रहे हैं. मुख्यमंत्री बासवराज एस बोमई और राज्य के गृह मंत्री ने छात्रों के साथ ही सभी लोगों ने शांति बनाए रखने की अपील की है.
कोर्ट ने क्या कहा?
इस पूरे प्रकरण को लेकर मुसलमान छात्राओं ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. बुधवार को जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया. बड़ी बेंच आज सुनवाई करेगी.
इससे पहले मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने कैंपस के बाहर और भीतर हिंसा पर चिंता जताई और शांति बनाए रखने की अपील की. अदालत उन छात्राओं की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिन्होंने हिजाब पर रोक को चुनौती दी है.
अदालत ने कहा, " सारी भावनाएं बाहर रखें. हम इस मामले में संविधान के आधार पर फैसला करेंगे. संविधान हमारे लिए भगवद् गीता है. हिजाब पर रोक को चुनौती देने वाली छात्राओं की ओर से दलील देते हुए उनके वकील देवदत्त कामथ ने कहा कि सरकार के आदेश में कुछ अदालती फैसलों को हवाला देकर छात्राओं को हिजाब पहनने से रोक दिया गया.
लेकिन पवित्र कुरान में इसे ज़रूरी रवायत बताया गया है. हम क्या पहनें इसका अधिकार हमें अनुच्छेद 19 (1) देता है. लेकिन इस अधिकार पर सिर्फ अनुच्छेद ( 6) के जरिये ही रोक लग सकती है. सरकार ने जिन अदालती फैसलों का हवाला दिया है, वे इस मामले में लागू नहीं हो सकते. "
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