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कर्नाटक विधानसभा में रेप वाले विवादित बयान पर छह मिनट का माफ़ीनामा
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक विधानसभा में रेप पर दिए बयान (मजाक) पर माफ़ी मांगने में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को गुरुवार को केवल छह मिनट लगे क्योंकि वर्तमान अध्यक्ष ने विरोध कर रही महिला सदस्यों को इस मुद्दे पर एक भी शब्द बोलने की अनुमति नहीं दी.
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को सोशल मीडिया पर यूजर्स का और सदन में कांग्रेस और बीजेपी की महिला सदस्यों का गुस्सा तब झेलना पड़ा जब उन्होंने बुधवार को विधानसभा में कहा कि, "एक बात कही जाती है... जब बलात्कार होना एकदम तय हो तो लेट जाओ और इसका मज़ा लो. यह ठीक वही स्थिति है जिसमें आप अभी हैं."
बुधवार को रमेश कुमार का 'रेप' वाला बयान तब आया जब विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने हाल ही में आई बाढ़ के कारण फ़सलों को हो रहे नुकसान की समस्या पर सदस्यों की प्रतिक्रिया के बाद अपनी पीड़ा ज़ाहिर की थी.
तब विधानसभा अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि, "आप जानते हैं रमेश कुमार मुझे लगता है कि अब मुझे जो कुछ भी हो रहा है बस उसका आनंद लेना चाहिए. मैंने अब स्थिति को संभालने और सुधारने की कोशिश नहीं करने का फ़ैसला किया है. मैं इसके नतीजे देखूंगा."
तभी रमेश कुमार खड़े होते हुए वो विवादास्पद बयान देते हैं जिसपर विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही सदन में मौजूद बाकी सदस्य भी हंसते हैं.
पहले भी दे चुके हैं ऐसा ही बयान
उस दौरान सदन में मौजूद किसी भी सदस्य ने उनके बयान पर आपत्ति नहीं जताई, ठीक वैसे ही जैसा फ़रवरी 2019 में हुआ था जब बतौर विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने ठीक इसी तरह की एक बात कही थी.
तब भ्रष्टाचार के एक मामले में उनका नाम आने पर रमेश कुमार ने कहा था कि वो एक रेप पीड़ित की तरह महसूस कर रहे थे. उन्होंने कहा था कि, "एक बार मेरा 'रेप' हुआ था. लेकिन हर 'रेप' पीड़ित की तरह ही मुझे भी बार बार यह अहसास होता है कि मेरा 'रेप' कई बार हुआ था."
रमेश कुमार के 'रेप' वाले इस बयान के बाद कांग्रेस सदस्य अंजलि निंबालकर ने एक पत्र लिखकर उनसे माफ़ी मांगने की मांग की. फिर शुक्रवार को उन्होंने सदन में माफ़ी मांगी.
माफ़ी मांगते हुए उन्होंने कहा, "अगर मेरे बयान से महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं तो मुझे माफ़ी मांगने में कोई दिक़्क़त नहीं है."
स्पीकर कागेरी ने कहा कि उन्होंने अपने कहे के लिए माफ़ी मांग ली है और अब इसे और तूल न दिया जाए.
रमेश कुमार के बयान पर प्रतिक्रियाएं
हालांकि शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, "वाकई बहुत दुख होता है, क्या यह माफ़ी है? 'इसे तूल न दिया जाए', अध्यक्ष कह रहे हैं क्योंकि वे भी इस पर हंसते हुए पकड़े गए थे?"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट करके इस संबंध में टिप्पणी की है.
उन्होंने लिखा है, "कांग्रेस पार्टी कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक के बीच हुई बेहद आपत्तिजनक बातचीत और असंवेदनशील मज़ाक को पूरी तरह ख़ारिज करती है."
"बतौर कस्टोडियन स्पीकर से और वरिष्ठ नेता से रोल मॉडल होने की उम्मीद की जाती है. उन्हें इस तरह के व्यवहार से बचना चाहिए."
रमेश कुमार ने क्या कह कर माफ़ी मांगी?
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने आज जब माफ़ी मांगी तो उन्होंने क्या कहा?
वे बोले, "कल आपने कहा कि बोलने वालों की संख्या में इजाफ़ा हुआ है और आप भी दर्द महसूस कर रहे हैं. इसलिए मैंने अंग्रेज़ी में केवल एक कहावत कही जिस पर आपने कहा कि हमें बैठ कर इसका आनंद लेना चाहिए. मेरा महिलाओं के अपमान का या सदन की मर्यादा कम करने का कोई इरादा नहीं था और न ही इसके बारे में मजाक करने का. मेरा कोई अप्रत्यक्ष इरादा नहीं था. लेकिन हुआ ये कि जिस प्रसंग में ये बात कही गई वो भुला दिया गया."
"मैं अपना बचाव नहीं करूंगा. ऐसी स्थिति में हम अनजाने में ऐसी बयानबाजी करते हैं. जो कुछ मैंने कहा वो किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं था. जैसा कि कन्फ्यूशियस ने कहा था- जब कोई इंसान अपनी ग़लती को सुधारता नहीं है तो वो एक और ग़लती करता है. मुझे महिलाओं समेत उनसे माफ़ी मांगने में कोई हिचक नहीं है जिन्हें मेरे बयान से ठेस पहुंची है. मैं तहे दिल से और बिना कोई शर्त ऐसा करता हूं."
"आपको (अध्यक्ष) भी इसमें सह आरोपी बनाया गया है. चूंकि मुझे दोषी पाया गया है और फ़ैसला भी सुना दिया गया है, तो मैं माफ़ी मांगता हूं. अब इस मुद्दे को यहीं ख़त्म करते हैं. दुर्भाग्य से आपका भी नाम इसमें है, तो यदि ज़रूरी समझें तो आप इस पर अपना बयान भी दे सकते हैं."
सदन में चर्चा नहीं करने दी गई
इसके ठीक बाद विधानसभा अध्यक्ष कागेरी ने सदन को संबोधित करना शुरू किया तब एक महिला सदस्य ने बीच में बोलने की कोशिश की, तो उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया.
अध्यक्ष ने कहा, "उन्होंने माफ़ी मांग ली है. हम सभी सदस्य एक परिवार की तरह हैं. कल जो कुछ भी हुआ वो ये था कि मैंने कहा कि हम स्थिति का आनंद ले (जब कई सदस्य बोलना चाहते थे) तब रमेश कुमार ने अपना वो बयान दिया जो कि एक विवाद बन गया."
अध्यक्ष कागेरी ने कहा, "हम सभी महिलाओं का सम्मान करते हैं और हम सभी यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि उनकी गरिमा में कोई कमी न आए. मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे को और उठाने और विवाद पैदा करने की ज़रूरत है. मैं अनुरोध करता हूं कि आप बाहर भी इस तरह के शब्द न बोलें. चलिए प्रश्नकाल शुरू करते हैं."
कुछ महिला सदस्यों को इस मुद्दे को उठाने की कोशिश करते सुना गया लेकिन अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान अपने सवाल पूछने के लिए पहले से सूचीबद्ध किए गए नामों को पुकारना जारी रखा. इससे बीजेपी और कांग्रेस की महिला सदस्यों का सदन में पूर्वनियोजित काला झंडा दिखाने का प्रदर्शन भी धरा का धरा रह गया.
प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस की महिला सदस्य अंजलि निंबालकर बीबीसी हिंदी से बोलीं, "यह बहुत शर्मनाक है. क़ानून बनाने वाले ही कभी भी ऐसी टिप्पणी करते हैं. सवाल बीजेपी या कांग्रेस का नहीं है. इस तरह उपमा देना अब पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए."
विधानसभा की बैठक शुरू होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा, "रमेश कुमार ने महिलाओं के प्रति बहुत अपमानजनक टिप्पणी की. यह निंदनीय है. उन्हें सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए."
जब पत्रकारों ने उनसे कहा कि अध्यक्ष भी उनके बयान पर हंस रहे थे तो येदियुरप्पा ने कहा, "इस टिप्पणी के लिए रमेश कुमार ही ज़िम्मेदार हैं."
बीजेपी की पूर्णिमा श्रीनिवास पत्रकारों से बोलीं, "जब हम विधानसभा में आए तो सदन की समझ के लिए उनकी ओर ताकते थे. अब लगता है कि उनके मन में महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है. मैं मानती हूं कि अध्यक्ष को भी नहीं हंसना चाहिए था."
कांग्रेस विधायक रूपा शशिधर ने कहा, "मैं नहीं जानती कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जाना चाहिए. महिला के लिए इसे स्वीकार करना आसान नहीं होता क्योंकि वह ऐसी परिस्थिति में दर्द और सदमे से गुज़रती है. अगर आप सदन के भीतर या बाहर ऐसे शब्द बोलने की आदत डालेंगे तो ऐसी घटनाएं बार बार होंगी."
कर्नाटक विधानसभा एक ऐसी घटना का गवाह भी रह चुका है जब तीन बीजेपी सदस्य (सीसी पाटिल, लक्ष्मण सावदी और कृष्णा पालेमर) अपने मोबाइल फ़ोन पर सदन में ही पोर्नोग्राफ़ी देखते हुए पाए गए थे.
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