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पाकिस्तान: पिता के सामने दी बेटी के रेपिस्ट को फांसी
पाकिस्तान में एक बच्ची के रेप केस की पूरी सुनवाई और अभियुक्त को फांसी की सज़ा. महज़ 9 महीने के भीतर ये सब कुछ कर लिया गया.
इसे लेकर पाकिस्तान के सोशल मीडिया में काफ़ी चर्चा हो रही है. जनवरी में जब ये मामला सामने आया था तब इसे पाकिस्तान का 'रेयरस्ट ऑफ़ द रेयर' केस घोषित किया गया था.
24 साल के इमरान अली जिन्हें 6 साल की बच्ची ज़ैनब अंसारी के रेप के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था, उन्हें बुधवार सुबह फांसी दे दी गई.
रेप के बाद ज़ैनब अंसारी को इमरान अली ने कसूर शहर के एक बड़े कूड़ेदान के पास फेंक दिया था. इस केस के बाद पाकिस्तान के कसूर शहर में बच्चों के ख़िलाफ़ हुए यौन अपराधों से नाराज़ लोगों ने बड़े प्रदर्शन आयोजित किए थे.
बुधवार सुबह जब लाहौर स्थित कोट लखपत जेल में इमरान अली को फांसी दी गई, उस वक़्त ज़ैनब के पिता अमीन अंसारी ज़िला मजिस्ट्रेट के साथ वहीं पर खड़े थे.
फांसी होने के बाद अमीन अंसारी ने कहा, "मैं इस अंजाम से संतुष्ट हूं. और मुझे ख़ुशी है कि मैंने इस शख़्स का अंत अपनी आँखों से देखा."
इमरान अली पर ज़ैनब के अलावा 6 अन्य बच्चियों के साथ भी वैसी ही दरिंदगी करने का आरोप लगा था और वो उन मामलों में दोषी भी पाये गए थे.
अमीन अंसारी ने रोते हुए स्थानीय पत्रकारों से कहा कि उनकी बेटी के साथ अगर ये सब न हुआ होता, तो उनकी बेटी अब सात साल दो महीने की होती.
उन्होंने निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, "इस फांसी को टीवी पर भी प्रसारित किया जाना चाहिए था. इससे बड़ा संदेश जाता. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया."
अमीन अंसारी ने लाहौर हाई कोर्ट में ये याचिका भी दायर की थी कि आरोपी इमरान अली को चौराहे पर फांसी दी जाए. लेकिन कोर्ट ने उनकी इस अपील को ख़ारिज कर दिया था.
#JusticeforZainab
इसी साल 4 जनवरी को कुरान की क्लास के लिए जाते हुए ज़ैनब अंसारी कसूर से ग़ायब हो गई थीं.
ज़ैनब को आख़िरी बार एक सीसीटीवी फ़ुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति का हाथ पकड़ कर जाते हुए देखा गया. कुछ दिनों बाद उसका शव एक कचरे के ढेर से मिला.
इसके बाद पाकिस्तान के कई शहरों में लोगों का ग़ुस्सा फूट पड़ा था. #JusticeforZainab उस दौरन सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड बन गया था.
कई जगहों पर इस घटना के ख़िलाफ़ हिंसा हुई. हिंसा में दो लोगों की जान गई और कई लोग घायल भी हुए.
इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी ना होने के कारण पुलिस और अभियोजन पक्ष को जाँच के लिए कई वैज्ञानिक तरीक़ों का सहारा लेना पड़ा था.
इमरान कसूर शहर में ही रहता था. इमरान को पकड़ने के लिए पुलिस और ख़ुफ़िया जाँच एजेंसियों ने ज़ैनब के घर के ढाई किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 20 से 45 साल के सभी पुरुषों का डीएनए टेस्ट कराने का फ़ैसला लिया था.
क़ातिल को पकड़ने के लिए 1150 मर्दों के डीएनए जाँच की गई थी.
इमरान का डीएनए न सिर्फ़ ज़ैनब के रेप मामले में मैच हुआ था बल्कि इसी इलाक़े में जिन बच्चियों का रेप और मर्डर हुआ था, उनमें भी इमरान का डीएनए मैच हुआ था.
इसके आधार पर कोर्ट ने ज़ैनब अंसारी के साथ रेप और हत्या के मामले में इमरान अली को चार बार मृत्युदंड देने का फ़ैसला किया था.
कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ इमरान अली ने अपील भी की थी जो खारिज हो गई थी. इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने भी इमरान की दया याचिका ख़ारिज कर दी थी.
इससे कुछ बदलेगा?
इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता एम इलियास ख़ान के मुताबिक ज़ैनब के हत्यारे की फांसी ने उन सभी ज़ख़्मों को ताज़ा कर दिया है जिन्हें पूरे पाकिस्तान ने इस साल जनवरी में महसूस किया था.
पूरे देश में इसे लेकर प्रदर्शन हुए थे. लोगों में इस घटना को लेकर काफ़ी ग़ुस्सा था.
जिस सीसीटीवी फ़ुटेज में ज़ैनब एक अनजान शख़्स के साथ जाती दिख रही थी, उसे पुलिस ने नहीं बल्कि ज़ैनब के परिवार ने हासिल किया था. ये फ़ुटेज इस केस का सबसे मुख्य सबूत साबित हुई.
इस केस का सबसे बड़ा योगदान ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इसने पाकिस्तान में होने वाले बाल-शोषण की ओर काफ़ी लोगों का ध्यान खींचा.
बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ साहिल ने जो आंकड़े जमा किये हैं, उनके अनुसार साल 2018 के शुरुआती छह महीनों में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के 2300 मामले दर्ज किये गए हैं.
इनमें से 57 मामलों में रेप के बाद पीड़ित बच्चों की हत्या कर दी गई.
ज़ैनब का केस इस लिहाज़ से रेयर है क्योंकि इस केस ने लोगों के बीच एक बड़ी बहस को जन्म दिया.
उम्मीद की जा सकती है कि इस फांसी के बाद बाल शोषण के ख़िलाफ़ एक मज़बूत संदेश गया होगा.
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