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हिजाब विवाद: मामला अब कर्नाटक हाई कोर्ट की बड़ी बेंच के हवाले
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
हिजाब विवाद पर सुनवाई कर रही कर्नाटक हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है. अब तक मामले की सुनवाई जज कृष्णा दीक्षित की सिंगल बेंच कर रही थी. अब यह मामला हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को सौंप दिया गया है.
दरअसल कर्नाटक के उडुपी के गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर विमेन की छह छात्राओं ने याचिका दायर कर कहा था कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है. छात्राओं ने कहा कि उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता. अदालत में अब छात्राओं की ओर से जाने-माने वकील संजय हेगड़े दलील देंगे.
इस विवाद की शुरुआत तब शुरू हुई, जब गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर विमेन में छह छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोक दिया गया. छात्राओं ने कॉलेज के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हाईकोर्ट में इसके खिलाफ दायर कर दी. छात्राओं ने इस फैसले के विरोध में कक्षाओं का बहिष्कार कर रखा था.
हिजाब विवाद को लेकर भड़क उठी थी हिंसा
हाई कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. लेकिन सुनवाई से पहले सुबह से ही मामले ने हिंसक मोड़ ले लिया. हालांकि पथराव और नारेबाजी की कुछ घटनाओं के बाद पुलिस ने हालात काबू कर लिए. कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जज ने लोगों से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की.
मंगलवार सुबह ही दावणगेरे, हरिहर और शिवमोगा जिले में छात्रों और उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए थे. टकराव तब शुरू हुआ, जब सुबह हिजाब पहन कर अपने-अपने कॉलेजों में जा रही लड़कियों को कुछ छात्र रोकने की कोशिश कर रहे थे.
इससे छात्र-छात्राओं के दो गुटों के बीच झड़प शुरू हो गई थी. छात्राओं का एक गुट हिजाब पहने हुआ था, जबकि कुछ छात्र भगवा शॉल पहने पहुंच गए. दोनों गुटों के बीच नारेबाजी और तीखी बहस हुई. इस वजह से उडुपी में हिजाब मुद्दे पर कोर्ट का फैसला आने तक प्राइवेट कॉलेज बंद कर दिए गए.
इससे छात्र-छात्राओं के दो गुटों के बीच झड़प शुरू हो गई थी. छात्राओं का एक गुट हिजाब पहने हुआ था, जबकि कुछ छात्र भगवा शॉल पहने पहुंच गए. दोनों गुटों के बीच नारेबाजी और तीखी बहस हुई. इस वजह से उडुपी में हिजाब मुद्दे पर कोर्ट का फैसला आने तक प्राइवेट कॉलेज बंद कर दिए गए.
शिवमोगा, बनहट्टी और बगलकोट (उत्तरी कर्नाटक ) में दोनों ओर से झड़प हुई. एक वीडियो में एक छात्रा के अभिभावक भी पत्थर फेंकते नज़र आए. उत्तेजना तब फैली जब छात्राओं को हिजाब पहनने की वजह से कॉलेज के बाहर रोक दिया गया. बगलकोट के एसपी बी जगलासर ने बीबीसी से कहा, '' बनहट्टी में हालात काबू में हैं. ''
हिंसा और झड़प के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों को तीन दिन बंद रखने का आदेश दिया है.
अदालत ने क्या कहा था?
हिंसा और झड़प की वारदातें ऐसे वक्त में हुई हैं, जब कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई चल रही है. सुनवाई आज पूरी नहीं हो सकी. बुधवार को भी इस पर बहस होगी. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने कैंपस के बाहर और भीतर हिंसा पर चिंता जताई और शांति बनाए रखने की अपील की . अदालत उन छात्राओं की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने हिजाब पर रोक को चुनौती दी है.
अदालत ने कहा, " सारी भावनाएं बाहर रखें. हम इस मामले में संविधान के आधार पर फैसला करेंगे. संविधान हमारे लिए भगवद् गीता है. हिजाब पर रोक को चुनौती देने वाली छात्राओं की ओर से दलील देते हुए उनके वकील देवदत्त कामथ ने कहा कि सरकार के आदेश में कुछ अदालती फैसलों को हवाला देकर छात्राओं को हिजाब पहनने से रोक दिया गया. लेकिन पवित्र कुरान में इसे ज़रूरी रवायत बताया गया है. हम क्या पहनें इसका अधिकार हमें अनुच्छेद 19 (1) देता है. लेकिन इस अधिकार पर सिर्फ अनुच्छेद ( 6) के जरिये ही रोक लग सकती है. सरकार ने जिन अदालती फैसलों का हवाला दिया है, वे इस मामले में लागू नहीं हो सकते. "
हिजाब बनाम भगवा शॉल
पुलिस ने बताया कि उडुपी ज़िले के एमजीएम कॉलेज में छात्र जमा हो गए. कुछ हिजाब पहने छात्राएं कॉलेज में पहले आईं. दूसरा पक्ष भगवा पगड़ी और शॉल डालकर कॉलेज आया था, जिन्हें कॉलेज परिसर में अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई.
हिजाब पहनकर आई एक छात्रा ने बताया,''हमें पूरे साल हिजाब पहनकर कॉलेज में आने की अनुमति दी गई थी. अचानक से ये कहा गया कि हिजाब पहनकर कॉलेज के महिला कक्ष में भी नहीं जाने दिया जाएगा.''
वहीं भगवा शॉल ओढ़े एक लड़की ने कन्नड़ टेलीविजन चैनल से कहा, ''हमें केवल एकरूपता चाहिए. हम इससे पहले भगवा शॉल ओढ़कर कभी नहीं आए.''
पुलिस ने कहा, हालात काबू में
एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रताप रेड्डी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि छात्र कॉलेज में नारेबाज़ी कर रहे थे, ऐसे में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ देवदास भट्ट ने हाईकोर्ट के आदेश तक कॉलेज बंद करने का ऐलान कर दिया. रेड्डी ने कहा, ''ये छोटी घटनाएं हैं, स्थिति नियंत्रण में है.''
अदालती सुनवाई से पहले शनिवार को ही कर्नाटक सरकार ने प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में यूनिफॉर्म अनिवार्य करने का नया आदेश जारी कर दिया था.
राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म को लेकर जो आदेश जारी किया है उसके मुताबिक सरकारी शिक्षा संस्थानों की कॉलेज डेवलपमेंट कमेटियां यह फैसला ले सकती हैं कि यूनिफॉर्म कैसी होगी. निजी संस्थान यह फैसला कर सकते हैं कि कॉलेजों में यूनिफॉर्म ज़रूरी है या नहीं.
पूरा मामला क्या है?
पिछले दिनों ये मामला तब सुर्ख़ियों में आया जब उडुपी के एक प्री-यूनिवर्सिटी गवर्नमेंट कॉलेज की लगभग आधा दर्जन छात्राओं ने हिजाब उतारने से इनकार कर दिया.
दूसरे वर्ष की इन छात्राओं ने हिजाब उतारकर क्लास में बैठने की अपीलों को ख़ारिज कर दिया. जब इन छात्राओं की बात नहीं सुनी गई तो इन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया. ये मामला तब और बढ़ गया जब उडुपी ज़िले के कॉलेज में लड़कियों के हिजाब के जवाब में कुछ छात्र भगवा शॉल पहन कर चले आए थे.
इसके बाद लड़कियों ने भी भगवा शॉल पहन कर जुलुस की शक्ल में एक प्राइवेट कॉलेज में घुसने की कोशिश की. मामला तूल पकड़ता गया और राजनीतिक पार्टियां भी इस विवाद में कूद पड़ीं.
हिजाब पहनने से रोके जाने पर छात्राओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. उनका कहना है कि हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है. लिहाज़ा उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता.
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