बाग़पतः कारोबारी ने लाइव वीडियो में ज़हर खा कर जान देने की कोशिश की, पत्नी की मौत

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- Author, बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ पारस जैन
- पदनाम, बाग़पत से
उत्तर प्रदेश के बाग़पत में एक जूता व्यापारी ने केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों से नाराज़ होकर फ़ेसबुक लाइव वीडियो के दौरान ज़हर खा लिया. व्यापारी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं.
व्यापारी को बचाने की कोशिश कर रही उनकी पत्नी ने भी ज़हर खा लिया था, उनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
स्थानीय लोगों और क़रीबियों का दावा है कि कारोबारी राजीव तोमर बीजेपी से जुड़े थे. हालांकि उनके परिजनों और बीजेपी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ये घटना मंगलवार दोपहर की है.
बीबीसी ने भी इस बात की पुष्टि करने की कोशिश की लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी.
लाइव वीडियो को दौरान बाग़पत के बड़ौत क़स्बे के क़ासिमपुर खेड़ी गांव के रहने वाले राजीव तोमर ने सरकार की जीएसटी और नोटबंदी की नीति की आलोचना की थी.
जूता कारोबारी राजीव तोमर की बड़ौत के बावली रोड पर दुकान थी और वो थोक कारोबारी भी थे. आत्महत्या के प्रयास के दौरान उनकी पत्नी ने उनसे ऐसा न करने की ग़ुहार लगाई और फिर मायूस होकर खुद भी ज़हर खा लिया. लाइव वीडियो के दौरान राजीव तोमर की पत्नी उन्हें रोकने की कोशिश करती हैं तो वो कहते हैं, "दो मिनट बैठ जा, तू तो मेरी बात मान ले, सरकार तो मानती नहीं है."

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क्या है लाइव वीडियो में?
लाइव वीडियो में राजीव तोमर ज़हर की पुड़िया खोलते हैं और इस दौरान ही वो ज़हर खा लेते हैं.
इस दौरान रोती-बिलखती उनकी पत्नी पूनम तोमर उन्हें मनाने की कोशिश करती हैं. वो उनके मुंह में उंगली डालकर ज़हर निकालने की कोशिश करती हैं. इस दौरान तोमर कहते हैं, "मोदी मेरी मौत का ज़िम्मेदार बनेगा."
लाइव वीडियो में राजीव तोमर कहते हैं, "मैं ये नहीं कहता कि मोदी ने सभी काम ख़राब किए हैं. लेकिन छोटे दुकानदार, किसान के हितैषी नहीं है. जो भी होगा मेरे बीवी बच्चों का होगा, मैं ऊपर वाले में विश्वास रखता हूं, मोदी जी रखते हों या ना रखते हैं."
हालांकि वीडियो में उनकी पत्नी उन्हें बचाती हुई दिख रही हैं. वो ज़हर खाती हुई नहीं दिख रही हैं. पूनम की मौत किन परिस्थितियों में हुई इस बारे में पुलिस ने अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.
परिजनों और परिचितों के मुताबिक राजीव तोमर व्यापार में घाटे से जूझ रहे थे और उन पर क़र्ज़ बढ़ता जा रहा था. तोमर को लग रहा था कि सरकार की नीतियों का उसर उनके कारोबार पर हो रहा है.
तोमर को जानने वालों का कहना है कि उन्होंने कई बार व्यापारियों का कारोबार जीएसटी से प्रभावित होने की शिकायत की थी.
परिचित उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे. राजीव तोमक की जान तो बच गई लेकिन उनकी पत्नी को नहीं बचाया जा सका. फिलहाल वो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं.
इस घटना के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारी हरीश भदौरिया का कहना है कि अभी तक घटना के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है. पुलिस ने कारोबारी की पत्नी के शव का पोस्टमार्टम कराया है.

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आर्थिक तंगी
मूलरूप से क़ासिमपुर गांव के रहने वाले राजीव तोमर पिछले पांच सालों से बड़ौत की सुभाषनगर कॉलोनी में रहते हैं. उनके दो बेटे हैं.
अब उनके घर पर मातम पसरा है. रिश्तेदार और दोस्त उदास बैठे हैं. दोस्तों का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से राजीव अपने परिवार का पेट भी नहीं भर पा रहे थे.
उनके भाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "वो आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. घटना के समय हम दिल्ली में थे, जैसे ही पता चला है तो हम भागकर यहां पहुंचे हैं."
स्थानीय लोगों के मुताबिक राजीव बीजेपी में भी सक्रिय थे लेकिन उनके भाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है.
वहीं देशखाप के मुखिया चौधरी ने कहा, "हमने वीडियो देखी है, लाचारी और बेबसी में कारोबारी ने अपने जीवन का त्याग करने का प्रयास किया है. सरकार को कारोबारियों और बेरोज़गारों के बारे में विचार करना चाहिए. हम सरकार से इस परिवार के पालन-पोषण के लिए मुआवज़े की मांग करते हैं."
राजीव के बीजेपी से जुड़े होने के सवाल पर चौधरी कहते हैं, "वो नेता हैं या नहीं इससे अहम बात ये है कि वो हमारे समाज के आदमी है, इंसान है. किसी इंसान सामने ऐसी परिस्थिति ना आए कि उसे आत्महत्या करनी पड़े."
वहीं राजीव के परिवार से जुड़े सतवीर सिंह कहते हैं, "जो हुआ है वो राजीव ने लाइव बता ही दिया है. हालांकि उन्होंने कभी परिवार से आर्थिक तंगी का ज़िक्र नहीं किया. अभी हम इस स्थिति में नहीं है कि इस घटना पर कुछ कहा जाए. लेकिन ये बात है कि वो आर्थिक रूप से तंग थे."
राजीव के पड़ोसी ज़ुल्फ़िक़ार कहते हैं, "राजीव जी के ज़हर खाने की सूचना मिलते ही लोग यहां इकट्ठा हो गए थे. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया था."
ज़ुल्फ़िक़ार के मुताबिक, "राजीव का जूतों का काम था. कारोबार ख़त्म हो गया था. पहले इनके पास चार पांच कर्मचारी काम करते थे, बहुत अच्छा कारोबार था. बड़ौत और आसपास जूते सप्लाई करते थे. धीरे-धीरे सभी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था. शोरूम बंद हो गया था. धीरे धीरे बीते पांच साल में सब ख़त्म हो गया. इनकी पत्नी सिलाई करके ख़र्च चला रहीं थीं."
ज़ुल्फ़िक़ार दावा करते हैं , "राजीव पिछले पांच साल से बीजेपी से भी जुड़े थे."

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व्यापार संघ जनपद बाग़पत के ज़िलअध्यक्ष अरुण तोमर इस घटनाक्रम पर कहते हैं, "व्यापारी ने बार-बार ये कहा है कि मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापारियों की नीतियों से तंग आकर और क़र्ज़ में डूबकर ये क़दम उठा रहा हूं. वो बार-बार यही कह रहे थे."
अरुण तोमर कहते हैं, "अगर मैं एक कारोबारी के नज़रिए से बात करूं तो हालात ये हैं कि छोटा व्यापारी बहुत तंग है. छोटा व्यापार ख़त्म होता जा रहा है. बीजेपी बार-बार कहती है कि दो साल से कोरोना है और उसकी वजह से ये हाल है. लेकिन सच यह है कि सरकार की नीतियां छोटो कारोबारियों के हित में नहीं है और बड़े कारोबारियों के हितों का ध्यान रखकर बनाई गई हैं."
अरुण कहते हैं, "इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि सरकार डिजिटल इंडिया के नाम पर ऑनलाइन कारोबार को बढ़ावा दे रही है और छोटा कारोबारी ख़त्म होता जा रहा है. जो किराए की दुकान में काम कर रहे हैं, किराया नहीं दे पा रहे हैं. जो अपनी दुकान के मालिक हैं वो भी अपना घर नहीं चला पा रहे हैं."
अरुण आरोप लगाते हैं, "सरकार इंस्पेक्टर राज ख़त्म करने का वादा करके आई थी लेकिन आज हर चीज़ पर इंसपेक्टर राज हावी हो गया है. अधिकारी निरंकुश हैं. कारोबारी परेशान हैं, लेकिन हालात ये हैं कि रोएं तो किसके सामने रोएं. सरकार ये मानने को ही तैयार नहीं है कि व्यापारी परेशान हैं."
इस रिपोर्ट के लिए हमने बाग़पत ज़िले के बीजेपी अधिकारियों से बात करने की कोशिश की लेकिन सभी ने चुनाव की व्यस्तता का हवाला देकर इनकार कर दिया.

महत्वपूर्ण जानकारी-
मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-
समाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज-9868396824, 9868396841, 011-22574820
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000
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