गोरखपुर शहर सीट से योगी को चंद्रशेखर से मदद मिलेगी या नुक़सान होगा?- प्रेस रिव्यू

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भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के ख़िलाफ़ गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है.
गुरुवार को सहारनपुर में दलित युवा नेता चंद्रशेखर ने कहा था कि यह मंडल बनाम कमंडल की लड़ाई है. चंद्रशेखर ने योगी आदित्यनाथ को लोगों के लिए ख़तरनाक बताया था.
चंद्रशेखर आज़ाद की इस घोषणा को कोलकाता से प्रकाशित होने वाले अंग्रेज़ी दैनिक टेलीग्राफ़ ने प्रमुखता से जगह दी है. टेलीग्राफ़ ने इस बात की पड़ताल की है कि योगी को चंद्रशेखर किस हद तक टक्कर दे पाएंगे.
अख़बार ने लिखा है कि चंद्रशेखर ने 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बनारस से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने नामांकन नहीं भरा था.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''अगर चंद्रशेखर इस बार योगी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ते हैं तो दो चीज़ें हो सकती हैं- बीजेपी विरोधी वोट बँट सकता है और इससे योगी को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलेगी. लेकिन योगी के दलित समर्थन को चंद्रशेखर अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहे तो मुश्किल भी खड़ी कर सकते हैं.''

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मंडल राजनीति का नाम उस आयोग के अध्यक्ष बीपी मंडल के नाम पर है, जिन्होंने पिछड़ी जातियों को सरकारी नौकरियों में 27 फ़ीसदी आरक्षण देने की सिफ़ारिश की थी. इस सिफ़ारिश को सामाजिक न्याय और हाशिए पर खड़े लोगों के सशक्तीकरण में ख़ासा अहम माना जाता है.
वहीं बीजेपी की धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति को कमंडल की राजनीति नाम दिया गया है. कमंडल पानी रखने में काम आता है और अक्सर साधु इसका इस्तेमाल करते हैं.
उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में चंद्रशेखर की आज़ाद समाज पार्टी 100 सीटों पर लड़ सकती है. चंद्रशेखर आज़ाद ने योगी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद कहा था, ''मेरी आज़ाद समाज पार्टी चाहती है कि मैं आदित्यनाथ को चुनौती दूँ और मैं इसके लिए तैयार हूँ.''
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, ''योगी आदित्यनाथ अपने ख़िलाफ़ लोगों को बोलने नहीं देते हैं. उनके शासन में नौकरी मांगने पर पुलिस युवाओं पर हमला करती है, दलित न्याय मांगते हैं तो उन्हें मार दिया जाता है. ऐसे में उन्हें वापस मंदिर भेजना ज़रूरी है.'' योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं.

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1998 से 2017 के बीच योगी आदित्यनाथ पाँच बार गोरखपुर से लोकसभा सांसद चुने गए. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि गोरखपुर में मंदिर के प्रभाव के कारण दलितों का समर्थन योगी के साथ रहा है. चंद्रशेखर दलित वोटरों को शायद अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं.
इसके अलावा योगी आदित्यनाथ के लिए गोरखपुर शहर सीट पर दूसरी परेशानी राधा मोहन दास अग्रवाल हैं. अग्रवाल बच्चों के डॉक्टर हैं और 2002 से विधायक हैं. अग्रवाल पार्टी के भीतर योगी के आलोचक के रूप में जाने जाते हैं.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अग्रवाल एक वीडियो में कहते दिखे थे कि उत्तर प्रदेश में केवल ठाकुर सुरक्षित हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जाति ठाकुर है. बीजेपी ने 200 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और इसमें अग्रवाल का नाम नहीं है. लेकिन किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में अग्रवाल के नामांकन से इनकार नहीं किया जा सकता है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''गोरखपुर में अग्रवाल की बहुत अच्छी छवि है. वह बच्चों का इलाज मुफ़्त में करते हैं. योगी की उम्मीदवारी की घोषणा के बावजूद वो शांत हैं. अगर चुनावी प्रचार से वह ख़ुद को दूर रखते हैं तो योगी को नुक़सान हो सकता है.''

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समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में कहा था, ''अगर अग्रवाल समाजवादी पार्टी में शामिल होने की दिलचस्पी रखते हैं तो हम उन्हें गोरखपुर (शहर) सीट से उम्मीदवार बना सकते हैं.''
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''अपुष्ट रिपोर्टों के मुताबिक़ समाजवादी पार्टी शुभावती शुक्ला को योगी के ख़िलाफ़ उतर सकती है. शुभावती उपेंद्र दत्त शुक्ला की विधवा हैं. 2018 में गोरखपुर में सांसदी के उप-चुनाव में उपेंद्र दत्त शुक्ला, बीजेपी के उम्मीदवार थे और उन्हें 434,788 वोट मिले थे.''
हालांकि वह समाजवादी पार्टी समर्थित उम्मीदवार निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद से 21,801 मतों से हार गए थे. अब निषाद पार्टी बीजेपी की सहयोगी है. 2019 में बीजेपी ने गोरखपुर लोकसभा सीट फिर से जीत ली थी. गोरखपुर (शहर) सीट पर मतदान छठे चरण में तीन मार्च को है. उपेंद्र दत्त शुक्ला योगी के बेहद ख़ास माने जाते थे.

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सुप्रीम कोर्ट ने NEET में ओबीसी आरक्षण को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने NEET में ओबीसी के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आरक्षण योग्यता में बाधक नहीं है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को पहले पन्ने की लीड बनाई है. इस ख़बर को लगभग सभी अख़बारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है.
अख़बार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने नीट में ओबीसी कोटे का समर्थन करते हुए कहा, ''परीक्षा में उच्च अंक योग्यता का पैमाना नहीं है. योग्यता सामाजिक रूप से प्रासंगिक होनी चाहिए. समानता जैसे आगे बढ़ाने वाले सामाजिक मूल्यों के लिए औजार की तरह इस्तेमाल होनी चाहिए. इसलिए आरक्षण योग्यता के लिए बाधक नहीं है.''
हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने भी इस ख़बर को पहले पन्ने की लीड ख़बर बनाई है. दैनिक जागरण के अनुसार, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की बेंच ने नीट के ऑल इंडिया कोटे में ओबीसी और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने को हरी झंडी दे दी है.

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भारतीय सेना ने कहा- हम चीनी सेना के संपर्क में
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, भारतीय सेना ने चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी से अरुणाचल प्रदेश से कथित रूप से अगवा हुए 17 साल के मिराम तरोन की खोजबीन कर उसे जल्दी भारत को सौंपने के लिए कहा है.
भारतीय सेना ने कहा है कि वो इस मामले में चीनी सेना के संपर्क में है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, तरोन के पिता ने कहा है कि उनके बेटे को चीनी सेना ने अगवा कर लिया है.
ओपांग तरोन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ''हम इसे लेकर बहुत चिंतित हैं. मैं साधारण किसान हूँ. मैं लुंगता जोर जंगल के एक गाँव में रहता हूँ. मेरा बेटा जंगल में गया था तभी चीनी सैनिकों ने उसे अगवा कर लिया. मैं सरकार से अपील करता हूँ कि मेरे बेटे को वापस लाए.''
गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा था, ''गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले भारत के एक भाग्य विधाता का चीन ने अपहरण किया है- हम मिराम तरोन के परिवार के साथ हैं और उम्मीद नहीं छोड़ेंगे, हार नहीं मानेंगे. पीएम की बुज़दिल चुप्पी ही उनका बयान है- उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता.''
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