हैदरपोरा मुठभेड़: पुलिस की जांच रिपोर्ट से परिवार नाराज़, न्यायिक जांच की मांग

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

हैदरपोरा विवादित मुठभेड़ में जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच रिपोर्ट को घरवालों ने ख़ारिज करते हुए मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए.

जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष जांच टीम या एसआईटी ने मंगलवार को श्रीनगर में एक प्रेस सम्मेलन में दावा किया कि बीते महीने हैदरपोरा मुठभेड़ में जो चार व्यक्ति मारे गए थे उनमें डॉक्टर मुदासिर गुल को इमारत में मौजूद एक पाकिस्तानी चरमपंथी ने मारा था और जबकि अल्ताफ़ बट और आमिर मगरे क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे.

पुलिस ने दावा किया है कि इस मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी चरमपंथी 'बिलाल भाई' भी मारा गया था.

मारे गए चार व्यक्तियों में से तीन- अल्ताफ़ बट ,आमिर मगरे और डॉ मुदासिर गुल के परिजनों का दावा है कि तीनों को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारा गया था.

परिवार के लोग नाराज़

डॉक्टर मुदासिर गुल की पत्नी हुमैरा गुल ने बीबीसी से बातचीत में पुलिस की जांच रिपोर्ट को भ्रमित करने वाली और गढ़ी गई कहानी बताया.

उनका कहना था, "पुलिस ने बुधवार को जो भी बातें प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही हैं, मैं उनको मानने के लिए तैयार नहीं हूं. जो भी पुलिस ने आरोप लगाए हैं, वो सब झूठे हैं. जहां पुलिस एनकाउंटर की बात कह रही है, वहां ये कैसे हो सकता है. क्योंकि वो बहुत सुरक्षित जगह है. वहां चरमपंथी कैसे आ सकते हैं?"

उन्होंने आगे कहा, "जहां ये घटना हुई वो रियल एस्टेट की जगह है, जहां दिन में सौ लोग आते-जाते रहते हैं. पुलिस कह रही है कि वहां विदेशी चरमपंथी रह रहा था. लेकिन क्या उसकी भाषा से और अगर कोई नया व्यक्ति वहां रह रहा है तो लोगों को शक़ नहीं होता. ये सब मेरी नज़र में बनाई गई कहानी है."

हुमैरा ने अपने पति के बारे में बात करते हुए कहा कि मेरे पति एक डॉक्टर और रियल एस्टेट के करोबारी थे. उनका इन चीज़ों से कोई लेना देना नहीं था.

उनके अनुसार, "मेरे पति घरवालों की जान को क्यों दाव पर लगाते. पुलिस कह रही है किसी ने उन्हें मेरे पति के चरमपंथियों के साथ संबंध होने का दावा किया लेकिन क्या एक व्यक्ति के कहने पर उनके चरित्र पर सवाल उठाए जा सकते हैं? मेरे पति को सैकड़ों लोग जानते थे. पुलिस ने इस बारे में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए हैं. मैं इस जांच रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज करती हूं."

'पुलिस सच नहीं बता रही'

हुमैरा ने कहा, "पुलिस आमिर के बारे में कह रही है कि वो भी चरमपंथियों से मिला हुआ था. इस मामले में भी कोई सच्चाई नहीं है."

वो कहती हैं, "आमिर हमारे साथ काम करते थे और उनके लिए कमरे में अलग कम्पार्टमेंट बनाया गया, जहां वे रहते थे. कभी-कभी उनके गांव के लोग भी वहां आते थे. ऐसी जगह पर चरमपंथियों के छिपने की जगह कैसे होगी? जहां पर हर समय सुरक्षाबल और पुलिस की गाड़ी तैनात रहती हैं, वहां कैसे कोई चरमपंथी एक महीने तक छिप सकता है?"

हुमैरा सवाल करती हैं कि पुलिस अगर ये सब दावा कर रही है तो वो सबूत क्यों नहीं दिखाती? वो पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाते हुए पूछती हैं, "पुलिस के अनुसार मेरे पति क्रेटा गाड़ी में चरमपंथियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते थे जबकि उनके पति ने एनकाउंटर से पांच दिन पहले क्रेटा खरीदी थी."

वो बताती हैं, "मेरे पति के शरीर पर कई तरह के ज़ख्म के निशान थे. जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि उन्हें टॉर्चर किया गया था."

वो कहती हैं, "उनकी गरदन पर मैंने खुद निशान देखे हैं. अगर हम तस्वीरें भी देखें तो उससे भी ये सब साफ़ होता है कि उनके गले को कुछ न कुछ किया गया था. उनके चेहरे पर काले धब्बे साफ़ दिख रहे थे. ये कैसे हुआ? इसका मतलब तो यही है न कि कुछ न कुछ किया गया था. पुलिस केस को कवर-उप करना चाहती है और खुद को सही दिखाने के लिए हमें बदनाम कर रही है. हमें ये क़ुबूल नहीं है."

साथ ही वो कहती हैं कि अल्ताफ़ बट के शरीर पर जिस तरह के निशान थे उससे भी यही साबित होता है कि उन्हें टॉर्चर किया गया था.

हुमैरा पुलिस के सीसीटीवी फुटेज के दावा को भी ख़ारिज करती है. उनके अनुसार सीसीटीवी कैमरा बहुत दिनों से ख़राब पड़ा था. ऐसे में अगर उनके पास सीसीटीवी फुटेज है तो वो आया कहां से है?

इसी मुठभेड़ में मारे गए अल्ताफ़ भट की भतीजी साइमा बट का कहना है कि अगर पुलिस को आशंका थी कि इमारत में चरमपंथी छिपे थे, तो अल्ताफ़ और दूसरे लोगों को इमारत में क्यों जाने दिया गया?

वो सवाल करती हैं, "वो कैसे आम नागरिक को वहां जाने दे सकते हैं. उन्हें क्यों ख़तरे में डाला गया."

सीसीटीवी के मामले में हुमैरा से सहमत होते हुए उहोंने उसके काम न करने वाली बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अल्ताफ़ के भाई ने ये बात डीआईजी को भी बताई थी.

क्या है मामला?

15 नवंबर, 2021 को पुलिस ने शाम के क़रीब छह बजे इस घटना पर एक ट्वीट में बताया था, "श्रीनगर के हैदरपोरा में मुठभेड़ शुरू हो गई है और पुलिस और सुरक्षाकर्मी कार्रवाई कर रहे हैं."

कुछ ही समय बाद पुलिस ने एक चरमपंथी को मारने का दावा करते हुए एक दूसरे ट्वीट में बताया था "एक अज्ञात चरमपंथी मारा गया है.''

इसके बाद पुलिस ने अपने एक और ट्वीट में बताया कि एक और अज्ञात चरमपंथी को मारा गया है.

पुलिस ने देर रात एक और ट्वीट किया जिसमें कहा गया, "मकान का मालिक जो चरमपंथियों की गोली लगने से ज़ख़्मी हुआ था, उसकी मौत हो गई है. चरमपंथी मारे गए व्यक्ति के मकान के ऊपरी मंज़िल पर छिपे हैं. सूचना के मुताबिक़ ये व्यक्ति चरमपंथियों का साथी था."

मुठभेड़ के अगले दिन क्या हुआ?

पुलिस के दावों के बाद मारे गए चार लोगों में से तीन के परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और मामले की जांच और शव लौटाने की मांग की.

एनकाउंटर में मारे गए चार लोगों के शव श्रीनगर से क़रीब 80 किलोमीटर दूर हिंदवारा के एक क़ब्रिस्तान में दफ़न किए थे.

पिछले तीन साल से पुलिस एनकाउंटर में मारे गए लोगों के शव परिवार को वापस नहीं किए जा रहे हैं. पुलिस का कहना है कि कोरोना की वजह से वो शव परिवारवालों नहीं लौटाती है.

परिवारवालों के विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद अल्ताफ़ बट और डॉ मुदासिर गुल के शव पुलिस ने घरवालों को लौटाए थे. एनकाउंटर में मारे गए तीसरे व्यक्ति आमिर मगरे का शव अभी तक घर वालों को वापस नहीं मिला है.

इस विवादित एनकाउंटर के बाद सरकार ने मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे. आदेश के बाद एक टीम का गठन किया गया था. इस टीम की रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है हालांकि जांच के आदेश के समय कहा गया था की पंद्रह दिनों तक रिपोर्ट सौंप दी जाएगी.

आमिर मगरे के पिता ने क्या कहा था ?

आमिर मगरे के पिता लतीफ़ मगरे से बीबीसी ने बात करने की कोशिश लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

लेकिन इस मुठभेड़ के बाद जब बीबीसी ने लतीफ़ मगरे से बात की थी तो उन्होंने सभी आरोपों को गलत ठहराया था और शव लौटाने की मांग की थी.

साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर से साबित हो जाता है कि उनका बेटा चरमपंथी था तो उन्हें कोई भी सज़ा क़ुबूल है.

आमिर मगरे रामबन इलाके में रहते थे जबकि अल्ताफ़ बट और डॉक्टर मुदासिर श्रीनगर के निवासी थे.

राजनीतिक दलों ने भी उठाए सवाल

पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन का कहना है इस मामले में पुलिस की जांच एक गढ़ी हुई कहानी है और सच्चाई को छिपाने की कोशिश हो रही है.

एक बयान जारी कर पीएजीडी ने इस मामले कि न्यायिक जांच की मांग की है. पीएजीडी राजनीतिक दलों को मिलाकर बनाया गया समूह है जिसमें पीडीपी, एनसी, कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा है, "अगर एसआईटी अभी भी मामले की जांच कर रही है तो एक बयान के साथ प्रेस के पास जाने की क्या जरूरत थी?"

पुलिस ने बुधवार को जम्मू -कश्मीर के राजनैतिक दलों को ख़बरदार किया है कि वो हैदरपोरा एनकाउंटर पर सवाल उठाने से परहेज़ करें वरना उनके ख़िलाफ़ कारवाई हो सकती है.

पुलिस की इस चेतावनी पर अपनी प्रक्रिया ज़ाहिर करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के नेता यूसफ़ तारिगामी ने बीबीसी को बताया, "दंडात्मक कार्रवाई की पुलिस की चेतावनी का फरमान और आधिकारिक प्रवृत्ति के बेशर्म विचित्र प्रदर्शन का प्रमाण है."

उनका कहना था कि "राजनीतिक नेताओं को सवाल पूछने का अधिकार है और सवाल के अधिकार पर धमकी देना क़ानून का उल्लंघन है. पुलिस को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए."

पुलिस की जांच रिपोर्ट

श्रीनगर के पुलिस डीआईजी सुजीत कुमार ने मंगलवार को जांच रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि डॉक्टर मुदासिर गुल चरमपंथियों को अपनी गाड़ी में बिठाकर घुमाते थे.

उनका कहना था कि डॉक्टर मुदासिर के चैम्बर में पाकिस्तानी चरमपंथी को पिस्तौल के साथ पाया गया था.

आमिर मगरे के बारे में पुलिस ने बताया है की उन्होंने ही पाकिस्तानी चरमपंथी के लिए श्रीनगर में रहने का इंतज़ाम किया था. पुलिस ने आमिर को स्थानीय चरमपंथी क़रार दिया गया है.

पुलिस ने बताया की घटनासाथल से उन्हें दो पिस्तौल, चार मैगज़ीन, कुछ गोलियां और दूसरी चीज़ें मिली थें , जो उन्होंने ज़ब्त की हैं. पुलिस के अनुसार सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि हैदरपोरा की एक इमारत में एक पाकिस्तानी और एक स्थानीय चरमपंथी रह रहे थे.

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