यूपी में बीजेपी के MLA खब्बू तिवारी की विधायकी गई, क्या है कारण

खब्बू तिवारी

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    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तर प्रदेश में गोसाईंगंज से बीजेपी के विधायक खब्बू तिवारी की उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई है. तिवारी की विधायकी फ़र्ज़ी मार्कशीट के मामले में रद्द की गई है.

इंद्र प्रताप उर्फ़ खब्बू तिवारी की सदस्यता रद्द करने वाली अधिसूचना विधानसभा कार्यालय से जारी हुई है.

अधिसूचना विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने जारी की है. इसके अनुसार विधायक इंद्र प्रताप सिंह की सदस्यता 18 अक्टूबर 2021 से समाप्त मानी जाएगी और उनका पद खाली हो गया है.

यह सदस्यता 2022 के विधानसभा चुनावों के काफ़ी क़रीब ख़त्म हो रही है, इस कारण अब इसके लिए उपचुनाव नहीं कराया जाएगा.

29 साल पहले अयोध्या के साकेत महाविद्यालय के फ़र्ज़ी मार्कशीट के एक मामले में इसी साल 18 अक्टूबर को अयोध्या की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी क़रार दिया था.

अदालत ने उन्हें पाँच साल की सज़ा सुनाई थी. उन्हें आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 के तहत दोषी पाया गया है. साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफ़ेसर यदुवंश राम त्रिपाठी की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप था कि इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू ने 1990 में बीएससी प्रथम वर्ष की मार्कशीट में फ़र्ज़ीवाड़ा करके बीएससी द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया था.

2017 में बीजेपी से चुनाव जीतने वाले वाले इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू तिवारी अयोध्या सीट से वर्ष 2007 में समाजवादी पार्टी और गोसाईंगंज सीट से 2012 में बीएसपी से चुनाव हार गए थे.

सदस्यता खोने वाले अन्य नेता

उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा के दौरान कुल चार विधायकों की सदस्यता रद्द हो चुकी है. इससे पहले दिसंबर 2019 में रामपुर के सवार से समाजवादी पार्टी के विधायक अब्दुल्लाह आज़म की सदस्यता निरस्त कर दी गई थी. अब्दुल्लाह आज़म समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान के बेटे हैं और उन्हें चुनाव लड़ने के समय उम्र कम पाए जाने के बाद अपनी सदस्यता गँवानी पड़ी थी.

आदेश

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बांगरमऊ से भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव के बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी, जिसके बाद दिसंबर 2019 में उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई.

हमीरपुर सदर से बीजेपी के विधायक अशोक चंदेल को 1997 के हत्याकांड में दोषी क़रार दिया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी. उसके बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी. इस हत्याकांड में पाँच लोगों की जान गई थी.

आम आदमी पार्टी के विधायक जितेंद्र सिंह तोमर भी फ़र्ज़ी डिग्री के मामले में गिरफ़्तार किए गए थे. उन्हें दिल्ली पुलिस ने 9 जून 2015 को गिरफ़्तार किया था. अरविंद केजरीवाल ने उन्हें क़ानून मंत्री बनाया था लेकिन लॉ की फ़र्ज़ी डिग्री सामने आने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

अंकिव बसोया

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इससे पहले 2018 में फ़र्ज़ी डिग्री मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकिव बसोया को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

एबीवीपी ने भी उन्हें डीयू प्रशासन की जाँच पूरी होने तक संगठन से निलंबित कर दिया था. अंकिव ने तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय से मिली बीए की डिग्री के आधार पर डीयू के बुद्धिस्ट स्टडीज़ विभाग में दाख़िला लिया था. अंकिव के चुनाव जीतने के बाद एनएसयूआई और आइसा ने फ़र्ज़ी डिग्री का आरोप लगाते हुए इस्तीफ़े की मांग की थी.

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