ख़ुर्रम परवेज़ कौन हैं जिन्हें कश्मीर में गिरफ़्तार किया गया है?

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, श्रीनगर से
कश्मीर के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता 43 वर्षीय ख़ुर्रम परवेज़ को एनआईए ने राजधानी श्रीनगर के उनके घर से गिरफ़़्तार किया है.
जाँच एजेंसी ने ख़ुर्रम परवेज़ के घर और दफ़्तर की सोमवार घंटों तलाशी ली और बाद में उन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ़्तार किया.
ख़ुर्रम की पत्नी समीना ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि एनआईए ने सोमवार सुबह आठ बजे उनके घर पर छापा मारा और क़रीब डेढ़ बजे तक घर की तलाशी ली.
उनका कहना था कि तलाशी के बाद एनआईए ख़ुर्रम को अपने साथ ले गई और शाम छह बजे उन्हें गिरफ़्तारी की सूचना दी गई और उनके कपड़े लेकर आने को कहा गया.
ख़ुर्रम की पत्नी के अनुसार एनआईए की टीम ख़ुर्रम का लैपटॉप और उनके दो मोबाइल फ़ोन भी अपने साथ ले गई.
समीना का कहना था कि एनआईए अधिकारी कुछ किताबें भी अपने साथ ले गए.

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किन आरोपों में केस?
ख़ुर्रम परवेज़ के ख़िलाफ़ यूएपीए और आईपीसी की गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है.
घरवालों को जो अरेस्ट मेमो दिया गया है उसके अनुसार ख़ुर्रम पर आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साज़िश में शामिल होना), और धारा 121 (भारत सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ना) लगाई गई है.
ख़ुर्रम के ख़िलाफ़ अनलॉफ़ुल ऐक्टिविटिज़ (प्रीवेंशन) क़ानून (यूएपीए) के तहत भी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं.
उन पर यूएपीए की धारा 17 (आतंकी गतिविधियों के लिए फ़ंड जुटाना), धारा 18 (साज़िश रचना) और 18B (आतंकी गतिविधि के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को तैयार या बहाल करना), धारा 38 (किसी आतंकी संगठन का सदस्य होना) और धारा 40 (आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाना) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
बीते साल अक्टूबर में भी ख़ुर्रम के घर और दफ़्तर पर एनआईए ने छापा मारा था.
इससे पहले ख़ुर्रम परवेज़ को वर्ष 2016 में भी उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब कश्मीर में चरमपंथी कमांडर बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद कश्मीर में कई दिनों तक हिंसा जारी रही थी.
उस समय महबूबा मुफ़्ती मुख्यमंत्री थीं और ख़ुर्रम पर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (पीएसए) लगाया गया था. ख़ुर्रम को दो महीने से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा था. बाद में अदालत से उन्हें राहत मिली थी. कोर्ट के आदेश पर उनके ख़िलाफ़ लगे पीएसए को हटा लिया गया.
ख़ुर्रम संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सेशन में भाग लेने के लिए जेनेवा जा रहे थे, तभी उन्हें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ़्तार कर लिया गया था.
इससे पहले साल 2004 में ख़ुर्रम परवेज़ की गाड़ी उत्तरी कश्मीर के लोलाब इलाक़े में उस समय विस्फोट की ज़द में आ गई थी, जब वह उस समय हो रहे चुनाव की निगरानी कर रहे थे. उस विस्फोट में उनकी एक टांग कट गई, उनकी एक साथी आसिया जीलानी गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गई थीं जिनकी बाद में मौत हो गई.

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मानवाधिकार उल्लंघन के ख़िलाफ़ उठाते रहे आवाज़
ख़ुर्रम परवेज़ जम्मू-कश्मीर कोअलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी (जेकेसीसीएस) नाम की एक ग़ैर-सरकारी संस्था के प्रोग्राम कोर्डिनेटर हैं.
इस संस्था ने पिछले तीन दशकों से कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर आधारित कई रिपोर्ट जारी की है.
इन रिपोर्टो में जेकेसीसीएस ने कश्मीर में कथित तौर पर हुए मानवाधिकार उल्लंघन, हिरासत में दी गई प्रताड़ना, जबरन लापता किए गए लोगों, हत्या और गिरफ़्तारियों से जुड़ी जानकारी को उजागर किया है.
वर्ष 2020 में भी इस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि संदिग्ध क़ानूनी फ़्रेमवर्क की आड़ में सरकार जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी लगा रही है.
जेकेसीसीएस के प्रोग्राम कोर्डिनेटर के अलावा ख़ुर्रम फ़िलीपींस स्थित एशियन फ़ेडरेशन अगेंस्ट इन्वॉलन्ट्री डिसपियरेंस (एएफ़एडी) के चेयरपर्सन भी हैं.
वर्ष 2006 में ख़ुर्रम को रीबॉक ह्यूमन राइट्स अवार्ड से भी नवाज़ा गया था. ये अवार्ड तीस वर्ष की उम्र के अंदर के उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए मानवाधिकार के लिए लड़ाई लड़ी हो.

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गिरफ़्तारी पर प्रतिक्रिया
पीडीपी के प्रवक्ता सुहैल बुख़ारी का कहना है कि यहां जो भी अपनी ज़ुबान खोलता है उसको बंद किया जाता है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "जो भी व्यक्ति किसी बात का इज़हार करना चाहता है या मानवधिकार की बात करता है उसको ऐसा करने से रोका जाता है. ख़ुर्रम की गिरफ़्तारी भी उसी सिलसिले की एक कड़ी है."
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जम्मू-कश्मीर ने गिरफ़्तारी को सही ठहराते हुए कहा कि सियासत और मानवाधिकार के नाम पर लोगों ने आजतक जो जी में आया किया है.
पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर कहते हैं, "जो संगठन यहां मानवधिकार के नाम पर चलते रहे हैं, इन लोगों की हमेशा टेरर फ़ंडिंग में शमूलियत रही है. ख़ुर्रम परवेज़ को (एनआईए) ने जिस तरह से गिरफ़्तार किया है, इसका मतलब है कि उन्हें (एनआईए) ख़ुर्रम के ख़िलाफ़ सबूत मिले होंगे. (एनआईए) की एक विश्वसनियता है. समय आने पर ये सब सामने आएगा. ख़ुर्रम पर एजेंसी की पहले भी नज़र रही होगी. उन्होंने ऐसा कुछ किया होगा, इसीलिए गिरफ़्तार किए गए हैं."
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख ग़ुलाम अहमद मीर ने कहा, "बीते छह-सात वर्षों से केंद्र सरकार को ये मामूल रहा है. ऐसी गिरफ़्तारियां ज़्यादातर राजनैतिक मक़सद के लिए की जाती हैं. बाद में गिरफ़्तार व्यक्ति के ख़िलाफ़ कुछ साबित हो या न हो. ये सब कुछ व्यक्ति की छवि बिगाड़ने के लिए किया जाता है. मेरे ख्याल में अगर किसी व्यक्ति के बारे में निष्पक्ष जाँच की जाए तो सब सामने आएगा कि सच्चाई क्या है."
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने फ़ोन पर बातचीत के दौरान कहा कि वो बाद में अपनी प्रतिक्रिया देंगे. लेकिन फिर उनसे संपर्क नहीं हो सका.
एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स ऑफ़ डिसएपियर्ड पर्सन (एपीडीपी ) की अध्यक्ष परवीना अहंगर ने ख़ुर्रम की गिरफ़्तारी पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
बीबीसी ने ख़ुर्रम के वकील परवेज़ इमरोज़ से संपर्क करने की कोशिश की थी लेकिन उनसे फ़िलहाल बात नहीं हो सकी है.
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'चरमपंथी नहीं हैं ख़ुर्रम'
मानवाधिकार के लिए काम करने वालों को लेकर यूएन की विशेष दूत मैरी लॉलोर ने कहा कि ख़ुर्रम परवेज़ कोई चरमपंथी नहीं हैं.
उन्होंने ट्वीट किया, "मैं परेशान करने वाली ख़बरें सुन रही हूं कि ख़ुर्रम परवेज़ को आज कश्मीर में गिरफ़्तार किया गया है और इस बात का ख़तरा है कि भारत में अधिकारी उन पर आतंकवाद से संबंधित अपराधों के लिए मुक़दमा दर्ज करेंगे. वह आतंकवादी नहीं हैं, वह एक मानवाधिकार रक्षक हैं."
जेनेवा स्थित वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन अगेंस्ट टॉर्चर या (ओएमसीटी) ने भी ख़ुर्रम की गिरफ़्तारी पर चिंता व्यक्त की है.
संस्था ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, "हम पुलिस हिरासत में (ख़ुर्रम को) यातना दिए जाने के ख़तरे को लेकर बहुत चिंतित हैं."
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