'पीएम मोदी के माफ़ी मांगने से किसानों को फ़सल के दाम नहीं मिल जाएंगे': राकेश टिकैत

राकेश टिकैत

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    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तीनों विवादास्पद कृषि क़ानून की वापसी की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार को लखनऊ में किसान महापंचायत का आयोजन किया.

पीएम मोदी के इन क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद मोर्चे की यह पहली बड़ी जनसभा थी जिसे उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों के मद्देनजर एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.

महापंचायत की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने की और मंच से भाषण देते हुए कहा, "क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा तो की लेकिन कटाक्ष के साथ. बात तो ठीक की कि वापस ले रहा हूँ लेकिन इसके बाद भी किसानों को बांटने का काम किया. कहा कि हम कुछ लोगों को समझाने में नाकाम रहे, देश से माफ़ी मांगते हैं. देश का प्रधानमंत्री न देश से माफ़ी मांगे, न ही माफ़ी मांगने से इन किसानों को फसलों के रेट मिलेंगे."

किसानों की महापंचायत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए राकेश टिकैत ने उनकी नीयत पर सवाल लिया और कहा कि, "हमारे मसले बहुत हैं, सरकार हमसे बातचीत करे. देश के प्रधानमंत्री ने बहुत मीठी बात की. शहद से भी मीठी आवाज़ थी. हमको ख़तरा लगता है. कमज़ोर नहीं, हम चाहते हैं कि देश का प्रधानमंत्री मज़बूत रहे लेकिन हमारे मसले भी ठीक करे. हम नहीं चाहते कि दुनिया यह कहे कि प्रधानमंत्री ने माफ़ी मांगी ना, आप सख्त होकर बात करो लेकिन हमारे मसलों का समाधान करो, मसलों का समाधान नहीं होगा, तो आंदोलन आपके ख़िलाफ़ होगा."

संयुक्त किसान मोर्चा एमएसपी को क़ानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर सरकार से बातचीत के लिए तैयार है. टिकैत ने एमएसपी के लिए क़ानून लाने की मांग करते हुए कहा, "जब संयुक्त मोर्चे और भारत सरकार की बातचीत होती थी, उस समय मोर्चे में तय हुआ था कि जब क़ानून वापसी हो जाएंगे, एमएसपी पर गारंटी क़ानून बन जायेगा, यह धरना समाप्त हो जायेगा और उसके बाद में एक समिति बनेगी जो और मामलों पर बातचीत करती रहेगी."

किसान आंदोलन

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उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. राकेश टिकैत इसे बखूबी समझते है और अपने भाषण में उन्होंने कहा कि चुनावी मुद्दों में सांप्रदायिकता घोलने के कोशिश हो सकती है और कहा, "आपको उलझायेंगे हिन्दू मुसलमान में, सिख हिन्दू में, आपको उलझायेंगे जिन्ना में और यह देश बेचने का काम करेंगे."

लखीमपुर की हिंसा में मारे किसान के परिवार पंचायत में पहुँचे

लखीमपुर की हिंसा में मारे गए 19 साल के किसान गुरविंदर सिंह के पिता सुखविंदर सिंह भी किसान महापंचायत को अपना समर्थन देने के लिए पहुँचे. साथ में मारे गए किसान लवप्रीत के पिता सतनाम सिंह और मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के पिता भी मौजूद थे.

महापंचायत में सभी का सम्मान किया गया और मृतकों को श्रद्धांजलि दी गयी. गुरविंदर के पिता सुखविंदर सिंह ने कहा वो एक किसान की हैसियत से महापंचायत में शामिल हुए हैं.

किसानों की महापंचायत

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उन्होंने कहा , "हम लोग तो किसान हैं ना. किसान महापंचायत जहां होगी वहां हम जाएँगे. नहीं भी कोई बुलाए

तब भी हम जाएँगे. सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा करते हैं कि वो हमको न्याय दिलाएगा. मंत्री अजय मिश्र को मंच पर खड़ा करके अमित शाह जी कहते हैं कि हमें दूर दूर तक बाहुबली नज़र नहीं आता है. अजय मिश्र उनके बगल में खड़े होते हैं और उनको नज़र नहीं आते हैं. लेकिन जनता को तो नज़र आते हैं."

कृषि क़ानूनों की वापसी के बारे में सुखविंदर सिंह ने कहा कि, " जब तक सरकार कुछ लिखित में नहीं देती है तब तक हम इनकी नीयत के बारे में क्या कह सकते हैं. यह लोग तो अपना मन बदलते रहते हैं."

लखीमपुर खीरी के किसानों को इंसाफ़ दिलाना भी महापंचायत का एक बड़ा मुद्दा था. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि, "सात दिसंबर के बाद से तीन दिन लखीमपुर खीरी में हूं. प्रशासन का विरोध नहीं करना, सिर्फ प्रशासन को कह दो कि मंत्री अजय मिश्र टेनी अगर गन्ना मिल का उद्घाटन करने आए तो गन्ना डीएम के ऑफिस में लेकर जायेंगे. संघर्ष होने दो, जो भी होगा. उनको हीरो बनाना चाहते हैं अब."

हालांकि अभी तक अजय मिश्र टेनी के लखीमपुर खीरी में ऐसे किसी गन्ना मिल के उद्घाटन की सूचना नहीं है.

महापंचायत

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महापंचायत में दूर दूर से आए किसान

जगजीत सिंह राजस्थान के कोटा से किसान हैं. उनका दावा है कि ग़ाज़ीपुर से लखनऊ दो दिन साइकिल चला कर महापंचायत में किसान नेताओं को बधाई देने के लिए आये हैं. वो हिंदी नहीं बोल सकते हैं तो उनके साथी ने हमसे उनकी पंजाबी में अनुवाद करके हमारी बातचीत करायी.

जगजीत सिंह ने कहा, "मैं किसान मोर्चे के साथ बहुत समय से जुड़ा हुआ हूँ. मैं 20 तारीख़ को तीन बजे लखनऊ के लिए रवाना हुआ था और सोमवार दोपहर को मैं लखनऊ पहुंचा हूँ. बहुत सुन्दर जीत हुए है हमारी. थोड़ी रह गयी है, जोकि एमएसपी पर गारंटी है."

पंजाब में लुधियाना से आए किसान कुलवीर सिंह ने कहा, "मैं पूरे भारत में किसान आंदोलन के लिए प्रचार कर रहा हूँ. कल हम लोगों जो छह मांगे रखी हैं वो हमारे लिए अहम मुद्दे हैं. वैसे सच यह है कि उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी की हिंसा की घटना के बाद ही सरकार दबाव में ज़्यादा आयी है."

महापंचायत में आयी भीड़ का आकलन करते हुए कुलवीर सिंह कहते हैं कि, "आज हम शहर के बीचों बीच हैं. जो किसान हैं वो गांव से आ रहे हैं. यहाँ के स्थानीय किसान हैं वो ग़रीब लोग हैं. वो इतने ताक़तवर नहीं हैं. पंजाब के किसानों की तुलना में उनके पास साधन कम हैं. किसान बसों में आये हैं, और यह भीड़ बढ़ती जाएगी."

लखनऊ से किसान गंगा प्रसाद यादव ने कहा, "जुमला छोड़ने से कुछ नहीं होता है. यह सिर्फ़ कह दिए. सरकारी आदेश पारित कराएं. मेरी 78 साल की उम्र है. हम महेंद्र सिंह टिकैत के समय से 36 साल से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े हैं. लखनऊ में जगह जगह बल्ली बांध कर रास्ता रोका है, वरना यहाँ और भी ज़्यादा किसान पहुँचता.''

गंगा प्रसाद यादव के बेटे देवेंद् यादव अपने पिता के साथ महापंचायत में आए हैं, "देश बचाने के लिए हमारा आना यहां बहुत ज़रूरी है." गंगा प्रसाद यादव कहते हैं कि "मेरे छह बेटे हैं और मैंने सभी से कह दिया है कि देश बचाने के लिए संघर्ष करने में लग जाओ."

महापंचायत

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महिलाओं में भी दिखा महापंचायत का उत्साह

लखनऊ से 50 किलोमीटर दूर से आयी 45 साल की गुड्डी रावत 15 साल से किसान आंदोलनों से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने सिंघु सीमा पर तीन महीने धरना भी दिया.

क़ानून वापसी के बाद क्या आंदोलन ठंडा होगा, इसके जवाब में गुड्डी कहती हैं, "यह तब तक ठंडा नहीं होगा जब तक हम इसे ठंडा नहीं करेंगे. प्रधानमंत्री तो कह रहे हैं कि यह लोग घर भाग जाएँ. यह तो बहुत दिन से कह रहे हैं कि हम लोग घर भाग जाएँ. हम लोग एक साल से टिके हुए हैं तो हम लोग 2024 तक टिके रहेंगे. जब तक तक सारे क़ानून वापस नहीं होते हैं, एमएसपी पर क़ानून नहीं बनाते हैं. जब तक 700 शहीद किसानों को मुआवज़ा नहीं देते हैं, अपने मंत्री को बर्ख़ास्त नहीं करते हैं, अपनी पार्टी से नहीं निकालते हैं, तब तक बराबर लड़ाई लड़ते रहेंगे और बराबर पंचायतें होती रहेंगी."

इस आंदोलन की वापसी के बारे में राकेश टिकैत ने भी मंच से कहा कि, "संघर्ष विश्राम की घोषणा हमने नहीं की, संघर्ष विश्राम की घोषणा भारत सरकार ने की है. हमने वो प्रस्ताव अभी ठुकरा दिया है, हमारे मसले बहुत हैं अभी."

उर्मिला यादव प्रतापगढ़ की भारतीय किसान यूनियन की ज़िला सचिव हैं और रविवार रात को ही वो लखनऊ पहुँच गयी थीं और महापंचायत स्थल पर ही उन्होंने रात बिताई. उर्मिला कहती हैं, "सरकार अब तक कहाँ थी. अगर उन्हें यह कृषि क़ानून वापस ही लेने थे तो उन्होंने यह क़ानून लागू क्यों किए. दूसरी बात सरकार देख रही है कि चुनाव नज़दीक आ रहा है तो वो क़ानून वापस लेने लगी."

महापंचायत में सीपीएम की महिला विंग आल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन महिलाओं ने भी मौजूदगी दर्ज की. राकेश टिकैत ने कहा की संयुक्त किसान मोर्चा की खूबसूरती यही है कि इसमें किसानों के हितैषी किसी भी झंडे या या बैनर के लोग शामिल हो सकते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी

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क्या है भाजपा की किसान महापंचायत पर राय

इस विशाल किसान महापंचायत ने निश्चित तौर पर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार की चुनौतियों को बढ़ाया होगा लेकिन पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का दावा है कि किसान बीजेपी के साथ हैं.

उन्होंने कहा, "देखिए प्रधानमंत्री जी ने बड़ा मन दिखाते हुए इन कृषि कानूनों को वापस लिया है. कहा है कि वो किसानों का किसी भी तरीके से अहित नही होने देंगे, तो जो लोग किसानों के नाम पर यह आंदोलन कर रहे हैं उन सभी को यह आंदोलन समाप्त कर देना चाहिए था. कुछ लोग जान बूझ करके पॉलिटिकली मोटिवेटेड आंदोलन जारी रखना चाहते हैं, ऐसे लोगों को जनता ख़ारिज करेगी, किसान ख़ारिज करेंगे, क्योंकि वे उत्तर प्रदेश में और देश में भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े हैं."

वीडियो कैप्शन, राकेश टिकैत प्रधानमंत्री मोदी के बारे में क्या बोले?

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