चंद्रग्रहण लगा, 580 साल में सबसे लंबी अवधि का ग्रहण

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शुक्रवार को एक आंशिक चंद्रग्रहण लगनेवाला है जिसे दुनिया में 580 सालों में सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है.
नासा के मुताबिक़, ये आंशिक चंद्र ग्रहण 18 और 19 नवंबर की दरमियानी रात होगा, जब चंद्रमा कुछ घंटों के लिए पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा. ये आपके टाइमज़ोन पर निर्भर करता है कि ये वहां किस वक़्त होगा.
भारत में आंशिक चंद्रग्रहण की शुरुआत 19 नवंबर, शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से होगी और ये 4 बजकर 17 मिनट तक दिखाई देगा. ये मौका 580 साल बाद आया है.
अमेरिका की बात करें तो ये नज़ारा ईस्टर्न ग्रीनलैंड को छोड़कर पूरे उत्तरी अमेरिका से दिखेगा. ये दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों और रूस से भी दिखाई देगा.
हालांकि यह तकनीकी रूप से पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है, इसे उपछाया ग्रहण कहा जाता है.

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क्या होता है उपछाया ग्रहण
ग्रहण की शुरुआत से पहले चंद्रमा धरती की उपछाया में प्रवेश करता है. चंद्रमा जब धरती की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तभी उसे पूर्ण रूप से चंद्र ग्रहण माना जाता है.
लेकिन अगर चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया में प्रवेश किए बिना ही बाहर आ जाता है, तो उसे उपछाया ग्रहण कहते हैं.
कहा जाता है कि ज्योतिष में भी उपछाया को ग्रहण का दर्जा नहीं दिया गया है. इस लिहाज़ से उपछाया ग्रहण को वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं माना जाता है.
स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक इस चंद्र ग्रहण की अवधि सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली है. चंद्र ग्रहण तीन घंटे, 28 मिनट और 24 सैकेंड तक रहेगा और यह 580 सालों में सबसे लंबा आंशिक ग्रहण बन जाएगा.
नासा के मुताबिक चंद्र ग्रहण के समय पर चांद पूरी तरह निकला होता है. नवंबर के इस पूरे चांद को अमेरिका में 'बीवर मून' भी कहा जाता है जो उस समय का संकेत देता है जब बीवर यानी ऊदबिलाव सर्दियों में सक्रिय होते हैं और उनके लिए जाल बिछाए जाते हैं.
नासा ने इस महीन में होने वाली सर्दी को देखते हुए इसे फ्रॉस्ट या स्नो मून का नाम भी दिया है. इसे 'ब्लड मून' भी कहा जाता है क्योंकि ग्रहण लगने पर चांद गहरे रंग का भी दिखाई देता है.
यूएस ईस्ट कोस्ट में आंशिक चंद्र ग्रहण रात 1:02 बजे शुरू होगा, जो सुबह 4 बजे चरम पर होगा. इसे चरम पर देखने के लिए कम से कम 2:18 बजे तक का इंतजार करना होगा. वहीं वेस्ट कोस्ट में रात 10:02 बजे के बाद शुरू होगा और रात 1 बजे चरम पर होगा.
मध्य अमेरिका के इलाक़ों में आसमान साफ़ होने के कारण वहां से सबसे अच्छा नज़ारा देखने को मिल सकता है. दूसरे इलाक़ों में बादलों के कारण आंशिक चंद्र ग्रहण दिखने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है.

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कब लगता है चंद्रग्रहण?
चंद्रमा को प्रकाश सूर्य से मिलता है. लेकिन, सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है. यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे की बिल्कुल सीध में हों.
पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा की बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा का छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण के मुक़ाबले ज़्यादा व्यापक स्तर पर दिखाई देता है और इसे पृथ्वी पर रात में कहीं भी देखा जा सकता है.

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ये साल का दूसरा और आख़िरी चंद्र ग्रहण होगा. इससे पहले 26 मई को चंद्र ग्रहण लगा था, जो सुपरमून या रेड ब्लड मून यानी लाल रंग का चांद था.
19 नवंबर के आंशिक चंद्र ग्रहण के दो हफ़्ते बाद 4 दिसंबर 2021 पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा.
इसके बाद भारत में अगला चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को देखा जाएगा.
नासा के मुताबिक़, एक साल में अधिकतम तीन चंद्र ग्रहण हो सकते हैं. नासा का अनुमान है कि 21वीं सदी में कुल 228 चंद्र ग्रहण होंगे.
सूर्य ग्रहण को देखने के लिए खास उपकरणों की ज़रूरत होती है लेकिन चंद्र ग्रहण के साथ ऐसा नहीं है. आप नग्न आंखों से भी चांद को देख सकते हैं.
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