शेख हसीना ने कहा, भारत प्रतिक्रिया को लेकर सतर्क रहे- प्रेस रिव्यू

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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के मौक़े पर कई मंदिरों पर हमले की घटनाओं के बाद नई दिल्ली और ढाका के बीच इस घटना पर चर्चा हुई है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर के अनुसार, नई दिल्ली ने एक नोट के ज़रिए ढाका के समक्ष चिंता जताई है कि इससे चरमपंथी तत्व बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा न दें.
वहीं, गुरुवार को दुर्गा पूजा के मौक़े पर अपने भाषण में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने उम्मीद जताई कि अगर भारत में कोई प्रतिक्रिया होती है तो वहाँ की सरकार इसके ख़िलाफ़ क़दम उठाएगी क्योंकि बांग्लादेश में इसका असर हो सकता है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ढाका में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी और बांग्लादेश में चार वाणिज्य दूतावास बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं.
अधिकारियों के मुताबिक़ ढाका से दक्षिण-पूर्व में 100 किलोमीटर दूर कोमिल्ला ज़िले में एक दुर्गा पूजा पंडाल में तोड़फोड़ हुई थी, जिसके बाद मंदिरों और पंडालों पर हमले की घटनाएं सामने आईं. इस दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई है और पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल हुए हैं.
एसोसिएटेड प्रेस न्यूज़ एजेंसी ने शुक्रवार को बताया था कि इन घटनाओं के ख़िलाफ़ राजधानी ढाका में प्रदर्शन कर रहे हज़ार के कऱीब प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुईं. पुलिस ने बताया कि जुमे की नमाज़ के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए थे.
ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस डिप्टी कमिश्नर सज्जाद हुसैन ने कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं.
प्रदर्शनकारी भारत विरोधी नारे लगा रहे थे और हसीना पर 'नई दिल्ली से बहुत क़रीब होने का' आरोप लगा रहे थे.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चला है कि हिंसा की घटनाओं को बाहरी समर्थन के ज़रिए घरेलू तत्वों ने ही अंजाम दिया है क्योंकि दुर्गा पूजा पंडालों और मंदिरों पर सुनियोजित ढंग से एक साथ कई जगहों पर हमले किए गए.
एक अधिकारी ने अख़बार से कहा, "बांग्लादेश प्रशासन जमात-ए-इस्लामी की भागीदारी की ओर देख रहा है."

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'हम अपराधियों को ढूंढ निकालेंगे, जैसे पहले भी किया'
गुरुवार को ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर के श्रद्धालुओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए हसीना ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश में हमारे हिंदू समुदाय के साथ हुई इस घटना से वहाँ पर (भारत में) कुछ नहीं होगा. इन घटनाओं की पूरी तरह जांच की जाएगी और किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा. यह मायने नहीं रखता है कि वो किस धर्म से संबंध रखते हैं. उनको खोज निकाला जाएगा और सज़ा दी जाएगी."
प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने किसी भी धर्म की परवाह किए बिना आपराधिक तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं किया है.
उन्होंने कहा, "उन्हें ढूंढ निकाला जाएगा. हमने ऐसा पहले भी किया है और आगे भविष्य में भी करेंगे. उनको सज़ा का सामना करना होगा. हम ऐसी सज़ा चाहते हैं जिससे आगे भविष्य में किसी को ऐसा करने की हिम्मत ही न हो."
हसीना ने ऐसे लोगों को लेकर बेहद चौंकन्ना रहने को कहा. "अगर हम सब साथ मिलकर काम करें तो कोई भी नुक़सान नहीं पहुंचा सकेगा.
हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाते हुए हसीना ने कहा कि दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के समय सभी तरह के सुरक्षा एहतियात बरते जाएंगे ताकि कोई हिंसा की घटना दोबारा न हो. बांग्लादेश की 16.9 करोड़ की आबादी में 10% आबादी हिंदुओं की है.
उन्होंने हिंदू समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वो ख़ुद को अल्पसंख्यक न समझे और अपने धार्मिक रीति-रिवाज का वैसी ही स्वतंत्रता के साथ पालन करे जैसा बाक़ी करते हैं. उन्होंने कहा कि सबने 1971 के मुक्ति संग्राम में मिलकर मज़बूत लड़ाई लड़ी है.
हसीना ने कहा कि वो इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि बांग्लादेश एक शांतिपूर्ण देश बने जहां पर चरमपंथ या आतंकवाद के लिए कोई जगह न हो.

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स्वास्थ्य मंत्री के दौरे पर मनमोहन सिंह की फ़ोटो लेने पर परिजनों को आपत्ति
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अस्पताल में मुलाक़ात के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ फ़ोटोग्राफ़र के होने पर मनमोहन सिंह के परिवार ने आपत्ति जताई है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' लिखता है कि पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी दमन सिंह ने शुक्रवार को एक बयान जारी करके कहा है कि उनकी मां ने मंत्री के दौरे के दौरान मनमोहन सिंह के कमरे में फ़ोटोग्राफ़र के होने पर आपत्ति जताई थी लेकिन उनकी आपत्ति को नज़रअंदाज़ कर दिया गया.
उन्होंने कहा, "एम्स में मेरे पिता का डेंगू का इलाज चल रहा है. उनकी हालत स्थिर है लेकिन इम्युनिटी बेहद कम है. हमने इंफ़ेक्शन के ख़तरे के कारण मिलने आने वालों पर रोक लगा रखी है. स्वास्थ्य मंत्री का आना और चिंता ज़ाहिर करना बहुत अच्छा था हालांकि मेरे परिजन इस हालत में नहीं थे कि उनकी तस्वीर ली जाए."
उन्होंने कहा, "मेरी मां ने ज़ोर देते हुए कहा कि फ़ोटोग्राफ़र को कमरे से चला जाना चाहिए लेकिन उनकी बात को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया. वो बहुत दुखी थीं. मेरे परिजन मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की कोशिश कर रहे हैं."
89 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री को बुख़ार के कारण एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया था.

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आगरा में डेंगू बुख़ार जारी, महिला सिपाही और 6 बच्चों की मौत
उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में बुख़ार से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. बरौली अहीर, बाह, लादूखेड़ा और मलपुरा में बुख़ार से छह और बच्चों की मौत हो गई है.
'अमर उजाला' अख़बार लिखता है कि चार बच्चों की निजी पैथोलॉजी में कराई गई जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी. वहीं, एत्माद्दौला के एक निजी अस्पताल में भर्ती सिपाही की शुक्रवार को डेंगू से मौत हो गई.
बरौली अहीर में चार साल के नमन यादव पुत्र मुकेश कुमार, 14 साल के ऋषिकेश पुत्र विजेंद्र निवासी कुआंखेड़ा और श्यामो निवासी छह साल की रोशनी पुत्री राजकुमार की बुख़ार से मौत हो गई है.
परिजनों ने बताया कि तीन-चार दिन से बुख़ार आ रहा था. निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां जांच में डेंगू बताया गया था.
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती 11 मरीज़ों में डेंगू की पुष्टि हुई है. इसमें आगरा के सबसे ज़्यादा नौ मरीज़ हैं. मथुरा और इटावा का एक-एक मरीज़ है. छह मरीज़ ठीक होने पर डिस्चार्ज कर दिए गए हैं. अब एसएन मेडिकल कॉलेज के डेंगू वॉर्ड में 14 मरीज़ों का इलाज चल रहा है.

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शीर्ष माओवादी कमांडर की बीमारी से मौत
छत्तीसगढ़ में सीपीई (माओवादी) की केंद्रीय समिति के शीर्ष नेता अक्कीराजू उर्फ़ रामाकृष्ण की मौत हो गई है.
'दैनिक जागरण' अख़बार लिखता है कि 14 अक्टूबर को दक्षिण बस्तर के जंगल में बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई जिसकी पुष्टि बस्तर के आईजीपी सुंदरराज ने समाचार एझेंसी एएनआई से की है.
आईजीपी सुंदरराज ने बताया कि इस बात की जानकारी माओवादियों की ओर से दी गई है. पिछले दो सालों से दवाइयों की किल्लत की वजह से इसके 3 समिति सदस्यों की मौत हो गई है.
माओवादी अक्कीराजू पर एक करोड़ रुपये का इनाम था. पिछले कुछ समय से रामकृष्ण बीमार थे. उन्होंने 2004 के सितंबर में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए नल्लामाला जंगल से नक्सल टीम का नेतृत्व किया था.
66 वर्षीय रामाकृष्ण गुंटूर ज़िले के तुमरूपेटा के रहने वाले थे. वह आंध्र प्रदेश और ओडिशा में सुरक्षा बलों के टारगेट पर थे. वह आंध्र-ओडिशा सीमा (एओबी) क्षेत्रों में माओवादियों को निर्देशित करने वाले मुख्य शख्स थे.
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