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राजस्थान का दलित हत्याकांड: 'मेरे बेटे को बेरहमी से पीटने की जगह गोली ही मार देते'- ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, हनुमानगढ़ से, बीबीसी हिंदी के लिए
"पीट-पीट कर बेरहमी से क्यों मारा? गोली ही मार देते. मेरा बेटा पांच सौ छह सौ रुपए कमा कर लाता था जिससे हम गुज़ारा कर रहे थे. अब क्या करेंगे? मेरे बेटे को बेरहमी से पीटपीट कर क्यों मारा? बेटा, हाय मेरा जगदीश!"
राजस्थान में हनुमानगढ़ ज़िला मुख्यालय से क़रीब 50 किलोमीटर दूर लगभग एक हज़ार घरों और पांच हज़ार आबादी का गांव है प्रेमपुरा.
गांव में प्रवेश करते ही कुछ ही दूरी पर संकरी-सी गली में पीढ़ियों से आमने-सामने कच्चे-पक्के से घरों में रह रहे दो परिवार. कई दशकों बाद अब इन घरों की पहचान 'मृतक जगदीश मेघवाल का घर' और 'हत्या के मुख्य अभियुक्त मुकेश ओढ़ का घर' से की जा रही है.
बीते सात अक्टूबर को जगदीश मेघवाल की सूरतगढ़ के एक सरकारी फ़ार्म पर बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. मारपीट का वीडियो भी बनाया और वायरल किया गया. शव को प्रेमपुरा में जगदीश के घर के बाहर छोड़ दिया गया.
इस घटना के बाद से ही देशभर में राजस्थान का प्रेमपुरा गांव और यह घटना चर्चा में है.
सन्नाटा सा पसरा है गांव में
मंगलवार की सुबह प्रेमपुरा गांव की जिन गलियों से हम गुज़रे वहां शांति थी. वहां कुछ ही लोग नज़र आए. एक संकरी-सी गली में मुड़ते ही पहले मकान के बाहर सफे़द चादर बिछाए कुछ लोग बैठे हुए थे.
ये जगदीश मेघवाल के चाचा का घर था. यहां उनके दादा मनीराम मेघवाल और पिता बनवारी राम मेघवाल बैठे हुए थे. साथ में कुछ ग्रामीण भी मौजूद थे.
इस घर से सटा हुआ मृतक जगदीश का पक्का मकान था.
दो कमरों के इस घर के एक छोटे से कमरे में ठीक से रोशनी भी नहीं है. इस कमरे में पैरों पर हाथ रखे और मुंह को चुन्नी से ढके हुए, रुआंसी-सी आवाज़ में एक मां अपने जवान बेटे की हत्या पर कहती हैं, "बेरहमी से पीट-पीट कर मारने की जगह तो गोली ही मार देते."
ये मारपीट का वीडियो देखने के बाद अपने बेटे की तड़प-तड़प कर हुई मौत को महसूस कर रही एक मां का दर्द है.
क्या है पूरा मामला?
सात अक्टूबर के दिन जगदीश मेघवाल अपने घर (प्रेमपुरा) से सूरतगढ़ गए हुए थे. परिजनों का दावा है कि मुख्य अभियुक्त मुकेश ओढ़ सूरतगढ़ से जगदीश को मोटर साइकिल पर बिठा कर सूरतगढ़ सिटी में एक सुनसान फ़ार्म पर ले गए.
परिवार वालों की तरफ़ से दर्ज की गई एफ़आईआर के मुताबिक, ''क़रीब आधा दर्जन अभियुक्तों ने डंडों से जगदीश को बेरहमी से पीटा और घटना का वीडियो भी बनाया. इसे परिचितों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया गया.''
''बेतहाशा पिटाई के बाद अभियुक्त मोटर साइकिल से ही जगदीश को प्रेमपुरा गांव लाए और शाम क़रीब साढ़े चार बजे घर के बाहर छोड़ दिया.''
घर के बाहर बैठे मृतक के पिता बनवारी लाल ने हमें हाथ से इशारा करते हुए बताया, "यहां घर के बाहर जगदीश को फेंक दिया. जब मैंने भागकर उसे संभाला तो उसकी सांसें नहीं चल रही थीं."
वो कहते हैं, "अभियुक्तों को अंदाज़ा नहीं था कि जगदीश की मौत हो चुकी है. वे उसे ज़िंदा समझ कर यहां छोड़ गए थे."
एफ़आईआर और पुलिस की कार्रवाई
एफ़आईआर घटना के अगले दिन आठ अक्टूबर को सुबह सवा दस बजे पीलीबंगा थाने में मृतक के पिता बनवारी लाल मेघवाल ने दर्ज करवाई.
एफ़आईआर में अभियुक्त मुकेश और उनकी पूर्व पत्नी, विनोद, संदीप, लालचंद, ओमप्रकाश, इंद्राज, गंगाराम, हंसराज समेत 11 लोगों को नामज़द किया गया.
पुलिस ने आईपीसी की धारा 302, 365, 147, 149, 120बी और एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) व 3(2)(वीए) में मामला दर्ज किया.
हनुमानगढ़ ज़िले की पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रीति जैन ने बताया, "इस प्रकरण में नामज़द 11 में से आठ और वीडियो बनाने वाले समेत नौ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है."
एसपी प्रीति जैन ने बताया, "अभियुक्त मुकेश की पूर्व पत्नी और एक अन्य अभियुक्त की इस मामले में संलिप्तता नहीं पाई गई है. अभियुक्तों ने जगदीश को अकेले में पकड़ा था. इस घटनाक्रम में शामिल सभी नौ अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. अब अनुसंधान के कुछ बिंदु बाक़ी हैं, उसे पूरा कर जल्द से जल्द आगे की कार्रवाई करेंगे."
क्या दलित होने के कारण हुई हत्या?
इस घटना और मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद जगदीश की हत्या को उनके दलित होने से जोड़ा जा रहा है.
इसके बारे में पूछे जाने पर एसपी प्रीति जैन ने बताया, "कलेक्टर और मैं जब मुआवज़ा सुपुर्द करने गए तो मृतक के परिजनों का कहना था कि हम तो 100 साल से आमने-सामने के पड़ोसी हैं. हमारा इनके सामाजिक कार्यक्रमों में आना-जाना है. दलित होने के चलते हत्या की गई है, ऐसी बात अभी तक अनुसंधान के किसी भी स्तर पर नहीं आई है."
उन्होंने स्पष्ट किया, "प्रेम संबंध का विवाद था और उस विवाद के कारण हत्या करने की बात सामने आई है. हमने कोशिश की है कि सभी एंगल से इस मुद्दे की जांच करें."
'पैसे के चलते हुई हत्या'
ग्रामीणों और मृतक के परिजनों से भी बातचीत के दौरान जगदीश के दलित होने की वजह से हत्या का कोई कारण सामने नहीं आया है.
गांव के ही सलीम ख़ान कहते हैं, "जगदीश और अभियुक्त अच्छे साथी थे. जगदीश ने उनका मकान बनाया था, उसके पैसे को लेकर विवाद था."
मृतक जगदीश की माता गीता देवी रह-रह कर अपने बेटे को याद कर रोने लगती हैं. हत्या का कारण क्या रहा होगा, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने तेज़ आवाज़ में कहा, "दो महीने उनके यहां काम किया और दिन-रात काम कर मकान पूरा किया. पैसों की ख़ातिर मेरे बेटे को मारा है और कोई हमारा लड़ाई-झगड़ा नहीं था."
हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "सब घर वालों का आपस में एक-दूसरे के यहां आना-जाना था."
जिस कमरे में हम मृतक जगदीश की मां से बात कर रहे थे, ठीक उनके ऊपर दीवार पर चार युवाओं की एक तस्वीर लगी हुई थी. हमने तस्वीर उतार कर उनसे पूछा, ''कौन हैं ये लोग''. तो वो तस्वीर पर उंगली रख कर बताने लगीं कि, ''आगे बैठा हुआ जगदीश है और पीछे लालचंद और विनोद हैं.''
वही लालचंद और विनोद, जो हत्या के अभियुक्त हैं. एक साथ लगी इस चार साल पहले की तस्वीर से दोनों परिवारों के घनिष्ठ संबंधों का पता चल रहा था. हालांकि, जगदीश की मां अब कहती हैं कि ''जगदीश की तस्वीर अलग निकलवाऊंगी. इन हत्यारों की तस्वीर हटाऊंगी.''
'प्रेम प्रसंग से बढ़ा विवाद'
मृतक जगदीश मेघवाल के पिता बनवारी लाल ने बताया कि जगदीश का तलाक़ बीस दिन पहले ही हुआ है.
जगदीश और अभियुक्त मुकेश की पूर्व पत्नी के बीच प्रेम प्रसंग की बात सामने आ रही है. हमारी इस बात पर बनवारी लाल ने ज़ोर देकर कहा, "प्रेम प्रसंग जैसा कोई मामला नहीं था. उनका मकान भी जगदीश ने ही बनाया था. अगर ऐसा मामला था तो मकान बनवाने के लिए जगदीश को ही क्यों रखा था?"
हत्या के कारण पर वो कहते हैं, "जगदीश अच्छा कमाता था और उसके साथ मज़दूर काम करते थे. उनको (अभियुक्तों) को कोई पूछता नहीं था."
ज़िले की एसपी प्रीति जैन बताती हैं, "अब तक जो साक्ष्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक़ प्रेम प्रसंग के चलते दोनों का अपनी-अपनी पत्नियों से तलाक़ भी हुआ था."
जगदीश मेघवाल पर पूर्व में क्या कोई मामला दर्ज है? इस पर एसपी प्रीति जैन कहती हैं, "दोनों पक्षों के बीच जो प्रेम संबंध था, उसके चलते मृतक के ख़िलाफ़ उनकी पत्नी ने इसी साल धारा 498 ए में पीलीबंगा थाने में मामला दर्ज कराया था. इसमें पुलिस ने चालान पेश किया है. उन्होंने अलग रहना भी स्वीकार किया."
प्रेम संबंधों को वजह मानने से परिवार का इनकार
एसपी जैन ने ये भी कहा, "मुख्य अभियुक्त मुकेश ओढ़ ने पूरी घटना को अंजाम दिया. उनका भी अपनी पत्नी से इसी प्रेम संबंध के चलते अलगाव हुआ. उनकी पत्नी ने सूरतगढ़ क्षेत्र में मामला दर्ज़ करवाया है. उसके बाद उनका भी आपसी सहमति से तलाक़ हुआ."
लाल चुन्नी से चेहरा ढंके हुए मृतक की दादी गुलाब देवी, प्रेम संबंधों को लेकर हुई हत्या की बात पर तेज़ आवाज़ में कहती हैं, "प्रेम प्रसंग का कोई मामला नहीं था."
हालांकि प्रेमपुरा गांव के ही एक शख़्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "प्रेम संबंधों के चलते ही मुकेश का तलाक़ हुआ और जगदीश की पत्नी ने भी तलाक़ लिया था." उन्होंने ये भी बताया, "जगदीश के तलाक़ के बाद तनाव में आए उनके ससुर कृष्ण लाल मेघवाल ने कुछ दिन पहले ही आत्महत्या कर ली."
जगदीश के परिवार वालों में कोई भी उनके तलाक़ पर बात नहीं करना चाहता.
अभियुक्तों के घरों में कोई नहीं
मृतक जगदीश के दादा मनीराम ने बताया, "जगदीश को ज़िंदा समझ कर घर के आगे पटक कर अभियुक्त सामने अपने घरों में चले गए. लेकिन, कुछ ही देर बाद जब उन्हें मालूम हुआ कि जगदीश मर चुका है, तो वे सब फ़रार हो गए."
प्रेमपुरा गांव के एक हज़ार परिवारों में तक़रीबन आधे परिवार मेघवाल समाज के हैं, जबकि मुश्किल से पंद्रह घर ही ओढ़ राजपूत समाज के हैं. जगदीश की हत्या के मुख्य अभियुक्त मुकेश समेत अन्य भी ओढ़ राजपूत समाज से हैं.
अभिुयक्तों के घरों पर ताले लटके हुए हैं, जबकि कुछ कमरे खुले हैं. सामान और बर्तन घर में बिखरे पड़े हैं क्योंकि घटना के बाद से ही अभिुयक्त और उनके परिजन घर छोड़ कर जा चुके हैं. उनके दुधारू पशुओं को ग्रामीणों ने नज़दीक की ही गौशाला में रखवा दिया है.
क्या मामले पर राजनीति हो रही है?
कांग्रेस शासित राजस्थान की इस घटना पर दिल्ली तक से विपक्ष की प्रतिक्रियाएं आई हैं.
भाजपा, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लखीमपुर खीरी जाने और राजस्थान न आने पर ज़ुबानी हमले कर रही है. वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने तीन विधायकों की समिति बनाकर पीड़ित परिवार के घर भेजा.
मंगलवार को पीड़ित परिवार के घर पहुंचे भाजपा के विधायक मदन दिलावर ने पुलिस प्रशासन पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, प्रशासन जगदीश मेघवाल के प्रेम प्रसंग की बात कहकर मामले को पलटने की कोशिश कर रहा है.
मंगलवार को जयपुर में सीएम अशोक गहलोत ने मीडिया को दिए बयान में कहा,, ''हनुमानगढ़ में दलित की हत्या के मामले को लखीमपुर से जोड़ना बेवकूफ़ी है.''
इस मामले पर राजनीति गर्म है. सत्ता और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. लेकिन, इन सबके अपने भाई, अपने बेटे और अपने पोते को खोने का ग़म परिवार पर टूटा है.
एससी कमीशन के अध्यक्ष का दौरा
बुधवार को अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला पीड़ित परिवार के घर प्रेमपुरा पहुंचे.
स्थानीय पत्रकार पुरुषोत्तम उपाध्याय के अनुसार, विजय सांपला ने परिजनों से बंद कमरे में मुलाक़ात की. इसके बाद पीड़ित परिवार के घर मौज़ूद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जगदीश का एक वीडियो मीडिया में बहुत प्रचलित हुआ है. इसमें उन्हें पीटते हुए दिखाया गया और उन्हें इतना पीटा कि उनकी मौत हो गई."
उन्होंने कहा, "बताया गया है कि उनके मरने के बाद उन्हें यहां गली में उनके घर के आगे फेंक दिया गया और मृतक को भी लातों से मारा गया."
इस घटना को अमानवीय बताते हुए अध्यक्ष सांपला ने कहा, "हमने इस मामले का संज्ञान लिया है. आज हम परिवार के पास संवेदना व्यक्त करने आए हैं."
हालांकि इस मामले में कार्रवाई को लेकर बुलाए गए एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में समय देकर भी विजय सांपला नहीं पहुंचे.
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