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ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान में दलित भाजपा विधायक के घर पर हमला क्यों किया गया?
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हिंडौन (राजस्थान) से
राजस्थान के हिंडौन में दो दिनों में लगातार दो बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. दो अप्रैल को प्रशासन की आज्ञा से दलितों का और तीन अप्रैल को 'सर्वसमाज की प्रतिक्रिया' वाला विरोध प्रदर्शन जो तब निकाला गया, जब शहर में क़रीब 22 घंटे से धारा 144 लागू थी. धारा 144 यानी लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी.
ज़िला कलेक्टर अभिमन्यु कुमार कहते हैं, "फिर भी तीन अप्रैल को कुछ लोगों ने शहर में जुलूस निकाला और भारी भीड़ इकट्ठा हो गई, उनके पास जुलूस निकालने की आज्ञा भी नहीं थी. उन्हें पहले तो धारा 144 का उल्लंघन नहीं करना चाहिए था."
सुरक्षा के कामों में लगे एक कर्मचारी ने बीबीसी से कहा, "जुलूस रोकने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रशासन पर पथराव भी हुए. भीड़ उग्र थी, कुछ लोग माहौल को बिगाड़ना चाहते थे."
और हुआ भी यही, दलित वर्ग से ताल्लुक रखने वाले दो नेताओं- एक पूर्व मंत्री भरोसी लाल जाटव और वर्तमान भाजपा विधायक राजकुमारी जाटव के घरों में आग लगा दी गई.
जयपुर में हैं विधायक
जाटव छात्रावास के प्रांगण में मोटरसाइकिल-स्कूटर-साइकिलों के जले फ्रेम, पिचकी हुई कड़ाही-हांडी, कमरों के दीवारों पर काले धुएं की परतें और किताबों-कापियों के हवा में फड़फड़ा रहे पन्ने, उस दिन की कहानी ख़ुद कह देते हैं.
एक कहानी विधायक राजकुमारी जाटव के जले घर की छत पर अब तक लहरा रहा पार्टी का झंडा भी कह रहा है.
करसौली के सरपंच हरि चरण व्यंग्यात्मक हंसी के साथ कहते हैं, "जो सरकार अपनी पार्टी के विधायक को सुरक्षा न दे सकी, वो हम दलितों की क्या हिफ़ाज़त करेगी?"
राजकुमारी जाटव फ़िलहाल जयपुर में डेरा डाले हैं और उनका घर ख़ाली है.
इन हालात में अगर विपक्षी दल कांग्रेस के नेता भरोसे लाल जाटव अगर ख़ुद को 'असुरक्षित महसूस कर रहे हैं' तो समझा जा सकता है.
क्यों लगाई आग?
लेकिन एक पूर्व और एक वर्तमान विधायक के घरों को क्यों आग लगाई?
जाटव बस्ती में रहने वाले रवि कुमार कहते हैं, "उनके घर में जातीय कारणों से आग लगाई गई. उस दिन यहां जितने भी घर जलाए गए वो दलितों के थे."
विजय सिंह कहते हैं, "ये लोग दलितों को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते हैं."
महाभारत के पांडवों में से एक भीम की पत्नी हिडिंबा का मायका बताया जाने वाला हिंडौन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है.
लेकिन एक तथ्य ये भी है कि दलितों के बंद के दिन यानी दो अप्रैल को भी शहर में तोड़फोड़ की कई वारदातें हुईं, जिसमें रेलवे स्टेशन के एक हिस्से में आग का लगना और सात सरकारी बसों को फूंका जाना भी है.
हरि चरण दावा करते हैं कि कुछ लोग मुंह बांधे उनकी रैली में शामिल हुए और उन्होंने ही पूरा उपद्रव मचाया.
कलेक्टर का कहना है कि प्रशासन ने एक विशेष जांच दल तैयार किया है जो उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है जिन्होंने दो तारीख़ को तोड़-फोड़ की. इनमें से कुछ लोग बाहर के भी बताए जा रहे हैं.
हालांकि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राज्यसभा पहुंचने वाले किरोड़ीलाल मीणा इस पूरे हंगामे के लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार बताते हैं जो उनके मुताबिक़ राज्य में भाईचारा और शांति की स्थिति को भंग करना चाहती है.
बीजेपी सांसद कहते हैं, "कांग्रेस के पूर्व मंत्री के नेतृत्व में दो तारीख़ को बाज़ार में जो हुड़दंग मचाया गया उसके बाद जो प्रतिक्रिया हुई ये उसका नतीजा है."
अफ़वाहों का दौर चलता रहा
किरोड़ीलाल मीणा आज जो खुले तौर पर कह रहे हैं वे बातें पिछले दिनों अफ़वाहों के रूप में शहर में घूमती रही हैं.
भरोसी लाल जाटव के घर के भीतर जाटव हमलावरों के बड़ी तादाद में जमा होने से लेकर - जिनकी संख्या तीन से पांच हज़ार की बीच घूमती रही, अफ़वाहें ये भी फैलीं कि जाटवों ने बच्चों की स्कूली बसों पर हमला कर दिया है और ये भी कि वो अस्पताल में मरीज़ों के सलाइन के ट्यूब काट रहे हैं.
मगर पूछने पर पता चला कि न तो किसी ने पांच हज़ार की भीड़ को देखा था, न स्कूली बस पर हमले को और न ही अस्पताल की ट्यूब को, लेकिन सुना तकरीबन सबने था.