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ममता बनर्जी की निगाहें भवानीपुर उपचुनाव में जीत के बाद अब दिल्ली पर
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
"भवानीपुर में ममता बनर्जी की जीत कोई मुद्दा नहीं थी. हमारा लक्ष्य था जीत के अंतर को बढ़ाना और भवानीपुर से पूरे देश को संदेश देना. टीएमसी को इसमें भारी कामयाबी मिली है. अब हमारा लक्ष्य वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को दिल्ली की कुर्सी से हटाना है. वही असली जीत होगी."
पहले दिन से ही भवानीपुर में ममता के चुनाव अभियान का जिम्मा संभालने वाले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने उपचुनाव के नतीजे के एलान के बाद ये बात कही.
उधर, रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल करने के बाद ममता ने कहा, "भवानीपुर के लोगों ने नंदीग्राम की साज़िश का जवाब दे दिया है."
टीएमसी नेता की इस टिप्पणी ने पार्टी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एजेंडा साफ कर दिया है. भवानीपुर सीट पर रिकॉर्ड जीत दर्ज कर ममता ने अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
महज 57 फीसदी मतदान के बावजूद उन्होंने इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को करीब 59 हजार वोटों के अंतर से पराजित कर दिया है.
बीजेपी दफ़्तर का हाल
भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए नाक का सवाल बन गया था.
दरअसल, भवानीपुर में सवाल कभी यह नहीं रहा कि ममता जीतेंगी या नहीं. यहां सबसे बड़ा सवाल था कि वे कितने वोटों के अंतर से जीतेंगी?
भवानीपुर सीट का नतीजा सामने आते ही तृणमूल कांग्रेस खेमे में जहां जश्न का माहौल है वहीं बीजेपी खेमे में सन्नाटा पसरा है. सुबह से न तो कोई नेता नजर आ रहा है और न ही कार्यकर्ता.
बीजेपी के मुख्यालय और चुनाव कार्यालय में भारी तादाद में सुरक्षा बल तैनात हैं. लेकिन वहां सुबह से कोई नेता या कार्यकर्ता नहीं पहुंचा है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "यह नतीजा तो प्रत्याशित ही था."
ममता ने करीब 59 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की है. इससे पहले वर्ष 2011 में हुए उपचुनाव में यहां वे करीब 54 हजार वोटों से जीती थीं.
वर्ष 2016 में उनकी जीत का अंतर करीब 25 हजार था जबकि इस साल अप्रैल में हुए चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार शोभनदेव चटर्जी ने करीब 29 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. इससे साफ़ है कि अबकी जीत का अंतर दोगुने से ज्यादा है.
चुनाव आयोग के लिए क्या बोलीं ममता
ममता ने इस जीत के बाद अपने कालीघाट आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में जहां भवानीपुर और राज्य के लोगों के प्रति आभार जताया, वहीं छह महीने के भीतर उपचुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के प्रति भी कृतज्ञता जताई.
ममता ने कहा, "भवानीपुर सीट के नतीजे पर पूरे राज्य की निगाहें थीं. इलाके के वोटरों ने तमाम साजिशों को फेल करते हुए मेरा समर्थन किया है."
टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उनको हराने की साजिश रची थी. इसलिए वे चुनाव हार गईं.
उन्होंने इस मामले के अदालत में होने की वजह से इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. ममता ने किसी तरह का विजय जुलूस निकालने से भी मना कर दिया है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल बाढ़ पीड़ितों के समर्थन में खड़ा होना जरूरी है. ममता ने 30 अक्तूबर को चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नामों का भी एलान किया.
वैसे, चुनाव आयोग ने पहले ही विजय रैलियों पर पाबंदी लगा दी है. चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को रविवार सुबह भेजे गए एक पत्र में ममता बनर्जी सरकार से कहा कि वह ऐसे तमाम जरूरी कदम उठाए जिनसे नतीजे आने के बाद किसी भी तरह की कोई हिंसा न हो.
ध्यान रहे कि पिछली बार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही राज्य में भारी हिंसा भड़की थी और कई जगहों पर आगजनी की खबरें भी सामने आई थीं. बीजेपी ने उस दौरान पश्चिम बंगाल की हिंसा के लिए टीएमसी समर्थकों पर आरोप लगाया था.
अब 2024 पर है नज़र
टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम कहते हैं, "बीजेपी कहीं मुकाबले में ही नहीं थी. उससे पहले ही लड़ाई से हट जाना चाहिए था. इसके बाद अब दिल्ली जाना होगा. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली की कुर्सी से मोदी सरकार को हटाना ही असली जीत होगी. पूरे देश को लोग ममता को ही मोदी-विरोधी चेहरे के तौर पर देखना चाहते हैं."
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि चुनाव के नतीजे इलाके के लोगों में ममता बनर्जी के प्रति उत्साह का सबूत नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "ममता का इलाका होने के बावजूद राज्य में सबसे कम वोट यहीं पड़े थे. इससे साफ है कि ममता के प्रति लोगों में पहले की तरह भारी उत्साह नहीं है."
कांग्रेस नेता का कहना था कि ममता की जीत की भविष्यवाणी करना कोई मुश्किल नहीं था. यह तो सबको पहले से मालूम था. लेकिन मतदान के प्रतिशत से लोगों के उत्साह का पता नहीं चलता.
भवानीपुर के अलावा मुर्शिदाबाद जिले के दो सीटों—जंगीपुर और शमशेरगंज में भी 30 सितंबर को उपचुनाव हुआ था. जंगीपुर में वाम मोर्चा उम्मीदवार के निधन की वजह से बीते अप्रैल में मतदान स्थगित हो गया था.
शमशेरगंज में भी कांग्रेस उम्मीदवार की मतदान से पहले ही मौत हो गई थी. इन दोनों सीटों पर भी टीएमसी अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे है और उसकी जीत लगभग तय है.
जंगीपुर लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा था. बीच में वाममोर्चा के घटक आरएसपी का भी कुछ समय तक इस सीट पर कब्जा रहा. लेकिन वर्ष 2016 में तृणमूल कांग्रेस के जाकिर हुसैन की जीत के साथ यहां पार्टी का खाता खुला था.
जाकिर ममता सरकार में मंत्री भी रहे. शमशेरगंज सीट वर्ष 2011 में वाममोर्चा के कब्जे में आई थी. लेकिन 2016 के विधानसभा में यहां भी तृणमूल उम्मीदवार की जीत हुई थी.
राजनीतिक राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भवानीपुर सीट से ममता की जीत पर कोई संदेह नहीं था. बीजेपी खुद को मुकाबले में जरूर बता रही थी. लेकिन नतीजों से साफ हो गया है कि कौन कितने पानी में है.
राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर समीरन पाल कहते हैं, "ममता इस सीट पर भारी अंतर से जीत कर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एक कड़ा संदेश देना चाहती थीं. उन्होंने कहा भी है कि यह खेल भवानीपुर से शुरू होकर केंद्र की जीत पर ही खत्म होगा. यही वजह है कि मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी ने इस उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी."
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