कन्हैया कुमार प्रेस कॉन्फ़्रेंस को लेकर सीपीआई नेताओं को कराते रहे इंतज़ार - प्रेस रिव्यू

कन्हैया कुमार

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सीपीआई नेता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सोमवार को दिल्ली में पार्टी के नेताओं को काफ़ी इंतज़ार कराया.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने के अनुमानों का खंडन करने के लिए सीपीआई ने कन्हैया को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने को कहा था.

दरअसल ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि 28 सितंबर को कन्हैया कुमार गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी के साथ कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं जिसके बाद सीपीआई और कन्हैया के बीच बेचैनी बढ़ गई है.

अख़बार से सीपीआई नेताओं ने सोमवार को कहा कि पार्टी महासचिव डी राजा ने कन्हैया कुमार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके उनके कांग्रेस में शामिल होने की अफ़वाहों का 'खंडन' करने को कहा था.

दिल्ली में सोमवार को सीपीआई मुख्यालय के अजय भवन में उनकी पार्टी के साथी उनका इंतज़ार भी कर रहे थे.

एक पार्टी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर अख़बार को बताया, "कन्हैया ने फ़ोन और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया."

वहीं एक अन्य नेता ने कहा, "अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से ख़ुद को लेकर लगाए जा रहे अनुमानों पर कुछ भी नहीं कहा है."

कन्हैया और जिग्नेश

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आज कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं कन्हैया और जिग्नेश

बीते शनिवार को गुजरात के विधायक और दलित नेता मेवाणी ने मीडिया के एक तबके से कहा था कि वो और कन्हैया 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं.

डी राजा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'हम इसको देखते हैं.'

ऐसा कहा जा रहा है कि कन्हैया अभी अपनी पार्टी से निराश हैं क्योंकि वो एक बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं.

रविवार को बिहार में सीपीआई नेताओं का एक समूह कन्हैया से पार्टी मुख्यालय में मिला था और उन्होंने कन्हैया को पार्टी में ही रहने को कहा था.

एक अन्य पार्टी नेता ने कहा, "बातचीत के दौरान कन्हैया ने उन्हें कहा था कि उन्हें पार्टी का राज्य प्रमुख और पार्टी की शीर्ष चुनाव समिति का चेयरमैन बनाया जाना चाहिए जो चुनाव के लिए उम्मीदवार तय करती है."

एक और पार्टी नेता ने कहा, "किसी भी पार्टी में कोई भी ऐसी मांग नहीं कर सकता है. ये पार्टी है जो फ़ैसला करती है और अपने लोगों को ज़िम्मेदारियां देती है. अगर उनकी ऐसी कोई महत्वाकांक्षा है तो उन्हें शीर्ष नेताओं को बताना चाहिए."

अब सभी की निगाहें 2 अक्तूबर को होने जा रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर टिकी हैं. इस बैठक में कई मुद्दों के साथ-साथ कन्हैया कुमार के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है.

कन्हैया कुमार ने 2019 में लोकसभा का आम चुनाव बेगूसराय लोकसभा सीट से सीपीआई उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था, लेकिन वो बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से चुनाव हार गए थे.

लद्दाख़

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चीनी सेना नहीं हट रही पीछे, भारतीय सेना तैनात करेगी भारी हथियार

पूर्वी लद्दाख़ में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन पीछे न हटने के संकेत दे रहा है जिसके बाद भारतीय सेना ने वहां पर भारी हथियारों की और ज़्यादा तैनाती का फ़ैसला किया है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' लिखता है कि भारतीय सेना ने 105 एमएम फ़ील्ड गन्स, बोफ़ोर्स और रॉकेट सिस्टम को हटाकर नई एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र तोपों को तैनात करने का फ़ैसला लिया है.

चीन के सामने ऊंचे इलाक़ों में एम-777 को एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में चिनूक हेलिकॉप्टर के ज़रिए ले जाया जाएगा. वहीं जहां तक बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन ने बीते कुछ सालों में सड़कें बना दी हैं वहां तक इन भारी तोपख़ानों को सड़क के ज़रिए ले जाया जाएगा.

मंगलवार को गनर्स डे के मौक़े पर डायरेक्टर जनरल (आर्टिलरी) लेफ़्टिनेंट जनरल टीके चावला ने कहा, "बीआरओ जैसे-जैसे आगे के इलाक़ों में रोड नेटवर्क को ले जाएगा, हम बहुत सी जगहों पर अपने हथियार तैनात करने में सक्षम होंगे."

उन्होंने यह भी बताया कि सेना स्व-चालित ट्रैक गन के-9 वज्र की तैनाती को लेकर ट्रायल कर रही है कि इसे ऊंची जगहों पर कैसे स्थापित किया जा सकता है.

नीतीश कुमार

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नीतीश कुमार बीजेपी के ख़िलाफ़ जाकर करा सकते हैं जातिगत जनगणना

केंद्र सरकार के इनकार के बाद जातिगत जनगणना पर अड़े बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तल्ख़ी बढ़ गई है.

हिंदी अख़बार 'अमर उजाला' लिखता है कि जातिगत जनगणना को लेकर नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग राह ले सकते हैं. जातिगत जनगणना को लेकर नीतीश कुमार के बयान से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि बिहार अपने बूते कर्नाटक की तर्ज़ पर जाति आधारित जनगणना करा सकता है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साफ़ कह चुके हैं कि पूरे देश में एक जाति की कई उपजातियां होती हैं. अगर हाउसहोल्ड सर्वे में आप किसी की जाति पूछेंगे तो पड़ोसी यह बता सकता है कि उसके बगल में रहने वाला पड़ोसी किस जाति का है.

हालांकि नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना पर केंद्र सरकार से पूर्ण विचार करने का आग्रह किया है. नीतीश ने कहा कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए.

कर्नाटक में साल 2015 के अप्रैल-मई में 1.3 करोड़ घरों में सर्वे हुआ था. इस सर्वे का नाम सोशल एंड एजुकेशनल सर्वे दिया गया था. इसमें 1.6 लाख कर्मियों को लगाया गया था जिस पर सरकार ने 169 करोड़ रुपये खर्च किए थे. उसके बाद भी अभी रिपोर्ट नहीं आ सकी है.

बिहार के साथ-साथ देश के दूसरे क्षेत्रीय दल भी जातिगत जनगणना कराने की पुरज़ोर मांग कर रहे हैं.

छात्रा

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ICMR ने स्कूल खोलने के लिए चरणबद्ध तरीक़े अपनाने को कहा

भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए चरणबद्ध तरीक़ा अपनाने पर ज़ोर दिया है. ICMR की एक नई स्टडी सामने आई है जिसमें ये बातें कही गई हैं.

हिंदी अख़बार 'दैनिक जागरण' में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्डटी में स्कूलों को खोलने के मुद्दे पर भारत और विदेश से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशेषज्ञों ने कहा है कि स्कूलों में संक्रमण की जांच करने से वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.

इसके अलावा विशेषज्ञों के अनुसार अध्यापकों, कर्मचारियों और बच्चों को लाने-ले जाने में शामिल लोगों का टीकाकरण होना चाहिए और उन्हें टीका लगवाने के बाद भी मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए.

यह उपाय इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कोरोना संक्रमण होने या उसके फैलाव को टीकाकरण से नहीं रोका जा सकता है, यह बात बड़ों और बच्चों के लिए समान रूप से सच है.

उन्होंने कहा कि विभिन्न उपायों के साथ स्कूल खोलने से न केवल व्यक्तिगत रूप से सीखने की निरंतरता सुनिश्चित होगी बल्कि माता-पिता में यह विश्वास भी पैदा होगा कि स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित हैं.

वहीं UNESCO की रिपोर्ट के अनुसार 500 से अधिक दिनों तक भारत में स्कूलों के बंद रहने से 32 करोड़ से अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं.

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