फ़्रांस है जिससे नाराज़, उसे ऑस्ट्रेलिया ने भारत को पहले ही बता दिया था- प्रेस रिव्यू

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ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के जिस रक्षा सौदे से फ़्रांस ग़ुस्से में है, उसे लेकर भारत को पहले से जानकारी दी गई थी. फ़्रांस ने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका पर पीठ में छुरा भोंकने का आरोप लगाया है.
'द हिन्दू' की ख़बर के अनुसार भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बेरी ओफेरल ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को इस नए समझौते की जानकारी औपचारिक घोषणा से पहले ही दे दी थी.
बेरी ओफेरल ने कहा है, ''इस नई साझेदारी के फ़ैसले से स्पष्ट होता है कि सामरिक माहौल काफ़ी चुनौतीपूर्ण है और भारत को पहले ही सूचित कर दिया गया था. ताइवान और दक्षिण चीन सागर में शक्ति की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा है. हालात लगातार चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं.''
अख़बार के अनुसार, ओफेरल ने एक वर्चुअल संवाद में कहा, ''हम किसी भी स्तर पर टकराव के माहौल में कमज़ोर नहीं पड़ना चाहते हैं ताकि किसी देश को ऐसा ना लगे कि वो आगे निकल चुका है. यह किसी को उकसाने के लिए नहीं है बल्कि भारत और अन्य देशों के साथ मिलकर हम किसी भी ख़तरे से निपटने के लिए तैयार हैं. इंडो-पैसिफिक में भविष्य में स्थिरता और शांति के लिए यह ज़रूरी क़दम है.''
ओफेरल ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ रक्षा और विदेश मंत्रियों ने भारत में अपने समकक्ष को इसकी जानकारी दी थी.
हालांकि उन्होंने कहा कि इस पर इंडिया-ऑस्ट्रेलिया 2+2 मंत्री स्तरीय बैठक में बात नहीं हुई थी.
ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने कहा कि चीन इंडो-पैसिफिक में अपनी सैन्य क्षमता बहुत तेज़ी से बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि ऑकस से ऑस्ट्रेलिया की रक्षा क्षमता बढ़ेगी और यह उसकी रणनीति का हिस्सा है.
उन्होंने ये भी कहा कि इससे क्वॉड पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

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क्या है पूरा मामला जिससे फ़्रांस है नाराज़
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बुधवार को घोषणा की थी कि उन्होंने अमेरिकी न्यूक्लियर सबमरीन में निवेश करने और फ़्रांस के साथ हुए डीज़ल-इलेक्ट्रिक सबमरीन्स अनुबंध से अलग होने का फ़ैसला किया है.
ऑस्ट्रेलिया के इस फ़ैसले से फ़्रांस ख़ासा नाराज़ है और उसने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है.
मॉरिसन ने कहा था कि उन्होंने यह फ़ैसला बदले रणनीतिक माहौल के कारण लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ नए सुरक्षा समझौते की घोषणा की थी.
इस सुरक्षा समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया में परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियां बनाई जाएंगी.
इस समझौते के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने फ़्रांस की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी डीसीएनएस से 12 पनडुब्बी बनाने का अनुबंध तोड़ दिया है.
2016 में फ़्रांस ने ऑस्ट्रेलिया के साथ इस समझौते को किया था और तब से ऑस्ट्रेलिया इस पर 1.8 अरब डॉलर ख़र्च कर चुका है.
मॉरिसन ने कहा था कि 2016 में जब ऑस्ट्रेलिया ने 43 अरब डॉलर की डील की थी तब अमेरिकी न्यूक्लियर सबमरीन तकनीक का विकल्प नहीं था. लेकिन अमेरिका अब ब्रिटेन के साथ मिलकर तकनीक साझा करने के लिए तैयार है.
इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभाव की काट में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत ने क्वॉड गुट बनाया है और इसी बीच अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का ऑकस सुरक्षा समझौता हुआ है.
इस समझौते को भी चीन के ख़िलाफ़ देखा जा रहा है. भारत को ऑकस के बारे में ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही जानकारी दे दी थी.

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ठाकरे ने बीजेपी नेता को कहा- 'भविष्य का सहकर्मी'
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को बीजेपी-शिवसेना गठजोड़ के अनुमान को फिर हवा दे दी.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू लिखता है कि औरंगाबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे को ठाकरे ने भविष्य का संभावित 'सहकर्मी' बता दिया.
औरंगाबाद ज़िला परिषद की बिल्डिंग के शिलान्यास समारोह के दौरान ठाकरे और रेल राज्य मंत्री दानवे ने मंच साझा किया था. इसी दौरान ठाकरे ने यह बातें कही थीं.
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि 'यहां पर मौजूद मेरे पूर्व और अगर हम साथ आए तो भविष्य के सहकर्मी...'
हालांकि ठाकरे ने बाद में कहा कि यह हल्के-फुल्के अंदाज़ में की गई टिप्पणी थी क्योंकि वो अपने 'पुराने दोस्त' से काफ़ी लंबे समय बाद मिले थे.
उन्होंने कहा, "मेरा मतलब ये था कि अगर वो हमारे साथ आते हैं तो वो हमारे भविष्य के सहकर्मी होंगे. लेकिन समय तय करेगा कि क्या होगा."

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पंजाब में आज फिर आमने-सामने होंगे सिद्धू और कैप्टन के विधायक
पंजाब के सभी कांग्रेस विधायकों की बैठक शनिवार को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुलाई गई है. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस में विवाद अभी थमा नहीं है.
अमर उजाला अख़बार लिखता है कि यह बैठक शाम को पांच बजे होगी जिसमें पंजाब के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू शामिल होंगे.
यह बैठक इस मामले में भी दिलचस्प है क्योंकि पंजाब में अभी तक विधायकों की सभी बैठकें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में हुईं हैं लेकिन अब जिस तरह नेतृत्व ने विधायकों की बैठक कांग्रेस कार्यालय में बुलाने को कहा है, इससे कई कयास लगाए जा रहे हैं.
अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि बैठक में कैप्टन और सिद्धू विधायकों के समर्थन को लेकर अपनी-अपनी ताक़त दिखाएंगे.
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ लामबंद हो रहे कई विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मांग की थी कि पंजाब विधायक दल की बैठक बुलाई जाए, जिसमें विधायकों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके.
इन विधायकों ने सोनिया गांधी को इस बारे में एक पत्र भेजा था, जिसमें कैप्टन के कामकाज पर उंगली उठाते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की गई थी. इसके साथ ही विधायक दल की बैठक बुलाने के लिए दो पर्यवेक्षकों को चंडीगढ़ भेजने की मांग भी हाईकमान से उठाई गई थी.

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कोवैक्सीन को कब मिलेगी WHO की मंज़ूरी?
कोरोना वायरस की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मंज़ूरी कब मिलेगी इसका पता अब 5 अक्तूबर को ही चल पाएगा.
दैनिक जागरण अख़बार लिखता है कि WHO की कोरोना वैक्सीनेशन पर विशेषज्ञों के रणनीतिक सलाहकार समूह की बैठक 5 तारीख़ को होनी है जिसमें इस वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंज़ूरी दी जा सकती है.
पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी WHO की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन से मुलाकात के दौरान कोवैक्सीन की मंज़ूरी पर चर्चा की थी.
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वीके पाल ने इसी सप्ताह WHO से भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की सूची में शामिल करने की मंज़ूरी जल्द ही मिलने की उम्मीद जताई थी.
डॉक्टर पाल ने कहा था कि डाटा साझा करने और डाटा मूल्यांकन करने का काम चल रहा है.
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